10 बैल खरीदकर लौट रहे थे आदिवासी किसान, रास्ते में गौसेवकों ने रोककर करा दी FIR, जानें पूरा मामला

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मध्य प्रदेश के गुना में पशुओं से भरे दो वाहनों को गौसेवकों द्वारा रोकने का मामला सामने आया है. बताया गया कि अलीराजपुर के आदिवासी किसान गुना के छिकारी गांव से खेती के लिए बैल लेने पहुंचे थे. दोनों वाहनों में कुल 10 बैल ले जाए जा रहे थे. गौसेवकों को सूचना मिली थी कि पशुओं को अवैध र...

मध्य प्रदेश के गुना में पशुओं से भरे दो वाहनों को गौसेवकों द्वारा रोकने का मामला सामने आया है. बताया गया कि अलीराजपुर के आदिवासी किसान गुना के छिकारी गांव से खेती के लिए बैल लेने पहुंचे थे. दोनों वाहनों में कुल 10 बैल ले जाए जा रहे थे. गौसेवकों को सूचना मिली थी कि पशुओं को अवैध रूप से ले जाया जा रहा है. इसके बाद उन्होंने दोनों वाहनों को रोक लिया और कैंट पुलिस को इसकी सूचना दी. सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों वाहनों को जब्त कर लिया.

इस मामले में सबसे अहम बात यह सामने आई कि किसानों के पास कैबिनेट मंत्री नागर सिंह चौहान का एक पत्र भी था. यह पत्र फतेहगढ़ थाना प्रभारी के नाम जारी किया गया था. पत्र में लिखा गया था कि अलीराजपुर के पांच किसानों को खेती के लिए गुना के छिकारी गांव से कुल 10 बैल ले जाने की अनुमति दी जाए. पत्र में दोनों वाहनों के नंबर भी दर्ज थे. इनमें MP45 G 2710 और MP69 G 1140 शामिल हैं. पत्र में दोनों वाहनों में पांच-पांच बैल ले जाने का उल्लेख किया गया था. किसानों के पहचान पत्र, जमीन के कागज और अन्य दस्तावेज भी पत्र के साथ संलग्न होने की बात कही गई है.

सामने आए पत्र में अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान ने बैल ले जाने की अनुमति देने का अनुरोध किया था. यानी किसान खेती के काम के लिए बैल लेकर अलीराजपुर जाना चाहते थे. इसके बावजूद रास्ते में गौसेवकों ने वाहनों को रोक लिया. गौसेवकों ने पशुओं के परिवहन को लेकर आपत्ति जताई और पुलिस को इसकी सूचना दी.

गौसेवक मोनू ओझा के अनुसार, गौवंश के गले में रस्सियां बंधी हुई थीं. उनका आरोप है कि पशुओं के लिए चारा और पानी की कोई व्यवस्था नहीं थी. इसी आधार पर गौसेवकों ने पशुओं के परिवहन पर आपत्ति जताई. इसके बाद पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू की. गौसेवक मोनू ओझा की रिपोर्ट पर पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है.

पुलिस के अनुसार, कैंट थाने में छह लोगों के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत FIR दर्ज की गई है. जिन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, उनमें अमन सिंह मेंढ़ा, छगन मेंढ़ा, हीरू सिंह चौहान, केरम सिंह, दीपक बघेल और कमल सिंह पटेलिया शामिल हैं. पुलिस ने दोनों वाहनों को भी जब्त कर लिया है. वाहनों में कुल 10 बैल पाए गए थे, जिन्हें दो अलग-अलग वाहनों में ले जाया जा रहा था.

गुना पुलिस के ASP प्रशांत सिंह सुमन ने बताया कि छह लोगों के खिलाफ कैंट थाने में पशु क्रूरता अधिनियम के तहत FIR की गई है. उन्होंने बताया कि 10 बैलों को दो वाहनों में भरकर ले जाया जा रहा था. ASP के मुताबिक, गौवंश के परिवहन की अनुमति को लेकर मंत्री का पत्र भी पुलिस को देखने को मिला है. इस तरह इस पूरे मामले में एक तरफ किसानों के पास खेती के लिए बैल ले जाने को लेकर मंत्री का पत्र था, वहीं दूसरी तरफ गौसेवकों ने पशुओं के परिवहन और उनकी स्थिति पर सवाल उठाते हुए पुलिस को शिकायत दी.

गुना में सामने आए इस मामले में अब मंत्री का पत्र और पुलिस की FIR दोनों चर्चा में हैं. किसान अलीराजपुर से गुना के छिकारी गांव बैल लेने पहुंचे थे. उनके पास पहचान पत्र, जमीन के कागज और अन्य दस्तावेज होने की बात कही गई है. वहीं, गौसेवकों की शिकायत के बाद पुलिस ने पशु क्रूरता अधिनियम के तहत कार्रवाई की है. पुलिस ने दोनों वाहनों को जब्त कर लिया है और छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. फिलहाल मामले में पुलिस की कार्रवाई जारी है. एक तरफ मंत्री के पत्र में खेती के लिए 10 बैल ले जाने की अनुमति देने का अनुरोध है, तो दूसरी तरफ गौसेवकों की शिकायत पर पशु क्रूरता अधिनियम के तहत FIR दर्ज की गई है.

Original Source
https://www.aajtak.in/madhya-pradesh/story/guna-alirajpur-tribal-farmers-cattle-transport-minister-letter-fir-lclar-strc-2652359-2026-09-24?utm_source=rss
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