मदीना में यूरेनियम का भंडार! सऊदी अरब ने किया 11 करोड़ टन रेयर अर्थ मिनरल्स होने का दावा

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सऊदी अरब ने मदीना में यूरेनियम और दुर्लभ खनिजों से युक्त कच्चे माल के विशाल भंडार की खोज का दावा किया है. सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान के मुताबिक, मदीना के जबल सैयद प्रोजेक्ट में किए गए भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और खोज के दौरान करीब 11 करोड़ टन अयस्क (110 mill...

सऊदी अरब ने मदीना में यूरेनियम और दुर्लभ खनिजों से युक्त कच्चे माल के विशाल भंडार की खोज का दावा किया है. सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान के मुताबिक, मदीना के जबल सैयद प्रोजेक्ट में किए गए भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और खोज के दौरान करीब 11 करोड़ टन अयस्क (110 million tonnes) होने का अनुमान लगाया गया है. इसमें रेयर अर्थ मिनरल्स की उच्च सांद्रता के साथ यूरेनियम की भी संभावनाएं मिली हैं.

'अरब न्यूज' के मुताबिक, सऊदी ऊर्जा मंत्री ने कहा कि जबल सैयद परियोजना में हुई खोज और भूवैज्ञानिक अध्ययनों में करीब 110 मिलियन टन अयस्क संसाधनों का अनुमान सामने आया है. इनमें विशेष रूप से हेवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स की उच्च सांद्रता मिली है. इसके साथ ही यूरेनियम की भी उत्साहजनक सांद्रता का पता चला है. हालांकि, यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 11 करोड़ टन शुद्ध यूरेनियम मिलने की बात नहीं कही गई है. यह यूरेनियम और रेयर अर्थ तत्वों की सांद्रता वाला अनुमानित कुल अयस्क संसाधन है.

मदीना इस्लाम के सबसे पवित्र शहरों में से एक है. पैगंबर मोहम्मद ने 622 ईस्वी में मक्का से मदीना की ओर हिजरत की थी. इसके बाद मदीना शुरुआती इस्लामी समुदाय का प्रमुख केंद्र बना. ऐसे में इस क्षेत्र में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों की खोज ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है. यह खोज ऐसे समय सामने आई है, जब मध्य पूर्व में सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रमों को लेकर तनाव बना हुआ है.

सऊदी अरब लंबे समय से क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है. दूसरी ओर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और इजरायल की चिंताएं क्षेत्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा रही हैं. ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण और नागरिक उद्देश्यों के लिए है.

यूरेनियम और रेयर अर्थ मिनरल्स की यह खोज सऊदी अरब की Vision 2030 रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है. दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल सऊदी अरब अपनी अर्थव्यवस्था और ऊर्जा स्रोतों को तेल पर निर्भरता से आगे ले जाने की कोशिश कर रहा है. इसी रणनीति के तहत खनन, अक्षय ऊर्जा और नागरिक परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया जा रहा है. सऊदी अरब घरेलू स्तर पर यूरेनियम संसाधनों की खोज और भविष्य में उनके इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी काम कर रहा है.

मदीना में यूरेनियम की संभावनाओं का दावा इसलिए भी अहम है क्योंकि सऊदी अरब नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. अमेरिका और सऊदी अरब के बीच भी इस क्षेत्र में सहयोग को लेकर बातचीत और समझौते हुए हैं. यूरेनियम परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण कच्चा माल है. हालांकि प्राकृतिक अयस्क मिलने से सीधे परमाणु ईंधन तैयार नहीं हो जाता. इसके लिए खनन के बाद कई चरणों में प्रोसेसिंग, कन्वर्जन और जरूरत के मुताबिक संवर्धन (enrichment) जैसी प्रक्रियाएं करनी पड़ती हैं.

वहीं रेयर अर्थ एलिमेंट्स आधुनिक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं. इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन ऊर्जा, रक्षा उपकरणों और दूसरी हाई-टेक इंडस्ट्री में होता है. ऐसे में अगर मदीना क्षेत्र में मिले संसाधन व्यावसायिक रूप से निकालने योग्य साबित होते हैं, तो यह खोज सऊदी अरब की ऊर्जा सुरक्षा के साथ खनिज और औद्योगिक रणनीति के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.

Original Source
https://www.aajtak.in/world/story/saudi-arabia-medina-jabal-sayid-uranium-rare-earth-minerals-110-million-tonnes-ore-ntcpvp-dskc-2642853-2026-09-14?utm_source=rss
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