बुलाई मीटिंग, थमा दी 12 लोगों की लिस्ट, कहा- कर दो फायर, मैनेजर ने शेयर किया अनुभव   

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कॉर्पोरेट दुनिया में छंटनी की खबरें अक्सर कर्मचारियों की संख्या और कंपनी की लागत घटाने तक सीमित रह जाती हैं. लेकिन इसका असर उन लोगों पर भी पड़ता है, जिन्हें अपने ही साथ काम करने वालों को नौकरी से निकालने की बात कहनी पड़ती है. चेन्नई की एक IT कंपनी में डिलीवरी मैनेजर के तौर पर काम...

कॉर्पोरेट दुनिया में छंटनी की खबरें अक्सर कर्मचारियों की संख्या और कंपनी की लागत घटाने तक सीमित रह जाती हैं. लेकिन इसका असर उन लोगों पर भी पड़ता है, जिन्हें अपने ही साथ काम करने वालों को नौकरी से निकालने की बात कहनी पड़ती है. चेन्नई की एक IT कंपनी में डिलीवरी मैनेजर के तौर पर काम करने वाले शख्स ने रेडिट पर ऐसा ही अनुभव शेयर किया है.

पोस्ट में उन्होंने कहा कि सीनियर अधिकारियों ने उसे 12 कर्मचारियों को शुक्रवार तक नौकरी से निकालने का निर्देश दिया है. पोस्ट में उसने आगे बताया कि ये सभी लोग उसके साथ साल 2016 से उसके साथ काम कर रहे थे और उसे'अन्ना' यानी बड़ा भाई कहकर बुलाते थे.

मैनेजर ने रेडिट पर पोस्ट करते हुए लिखा कि कंपनी के सीनियर अधिकारियों ने उसे एक बंद कमरे में मीटिंग के लिए बुलाया. इसके बाद उसे वहां पर 12 कर्मचारियों के नाम वाली एक Excel शीट दी गई और शुक्रवार तक सभी को नौकरी से हटाने के लिए कहा गया. मैनेजर के मुताबिक, उसे हर कर्मचारी के साथ 15 मिनट की अलग-अलग मीटिंग करनी थी. इन कर्मचारियों के साथ वह करीब 10 साल से काम कर रहा था. उसके लिए वे सिर्फ टीम के सदस्य नहीं बल्कि परिवार जैसे थे.

केवल नौकरी से निकालने की बात नहीं है बल्कि मैनेजर ने पोस्ट में कई इमोशनल पहलुओं पर भी बात की है. मैनेजर ने पोस्ट में बताया कि टीम ने कई बार प्रोडक्शन से जुड़ी समस्याएं सुलझाने के लिए रात के तीन बजे तक ऑफिस में काम किया. साथ खाना खाना, ऑफिस के बाहर चाय पीना और एक-दूसरे की शादियों में शामिल होना उनकी दिनचर्या का हिस्सा रहा था. उसने आगे बताया कि टीम के सदस्य उसे 'अन्ना' कहकर बुलाते थे. यही वजह है कि जिन लोगों के साथ उसने इतने साल काम किया, उन्हें नौकरी से निकालने की जिम्मेदारी मिलने पर वह भावुक हो गया.

पोस्ट में मैनेजर ने टीम के कुछ सदस्यों की निजी परेशानियों का भी जिक्र किया. उसके मुताबिक, एक सीनियर डेवलपर ने चार महीने पहले ही बड़ा होम लोन लिया था. वहीं, एक अन्य कर्मचारी की मां कैंसर से जूझ रही थीं और उनका परिवार इलाज के लिए कंपनी के हेल्थ इंश्योरेंस पर निर्भर था. वहीं, एक तीसरे कर्मचारी की पत्नी अगले महीने बच्चे को जन्म देने वाली थीं. मैनेजर ने चिंता जताई कि ऐसे समय में इन लोगों को नौकरी से निकाले जाने की खबर कैसे देगा.

मैनेजर ने अपनी पोस्ट में सीनियर नेतृत्व के फैसले पर भी सवाल उठाए. उसका कहना था कि छंटनी का निर्णय बड़े अधिकारी लेते हैं, लेकिन कर्मचारियों को इसकी जानकारी देने और उनकी प्रतिक्रिया का सामना करने की जिम्मेदारी मैनेजरों पर छोड़ दी जाती है. उसने यह भी बताया कि एक समय उसके मन में नौकरी छोड़ने का विचार आया, ताकि उसे अपने साथ काम करने वाले लोगों को निकालने की जिम्मेदारी न निभानी पड़े. हालांकि, उसकी पत्नी ने उसे समझाया कि अगर वह यह काम नहीं करेगा तो कोई दूसरा मैनेजर उसकी जगह यह जिम्मेदारी निभाएगा.

इस पोस्ट के सामने आने के बाद रेडिट पर नौकरी की सुरक्षा को लेकर चर्चा शुरू हो गई. कुछ यूजर्स ने सरकारी नौकरी को अधिक सुरक्षित बताया, जबकि कुछ ने कहा कि प्राइवेट सेक्टर में बेहतर सैलरी और करियर के अवसरों के साथ छंटनी का जोखिम भी रहता है. कुछ लोगों ने यह सवाल भी उठाया कि नौकरी की सुरक्षा का मतलब जवाबदेही से छूट मिलना नहीं होना चाहिए.

वहीं, इस चर्चा में कई यूजर्स ने माना कि छंटनी का फैसला लेने वाले अधिकारियों और उसे कर्मचारियों तक पहुंचाने वाले मैनेजरों की भूमिका अलग-अलग होती है. मैनेजर की यह कहानी बताती है कि छंटनी सिर्फ नौकरी गंवाने वाले कर्मचारियों के लिए ही मुश्किल नहीं होती, बल्कि उन लोगों के लिए भी भावनात्मक रूप से कठिन हो सकती है, जिन्हें यह फैसला सुनाना पड़ता है.

Original Source
https://www.aajtak.in/education/career/story/it-company-layoffs-emotional-manager-story-job-security-debate-ngix-dskc-2687096-2026-11-03?utm_source=rss
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