जमुई में 19 सितंबर की शाम को हुआ क्या था? पुलिस की लापरवाही और एक्शन में देरी पर उठ रहे सवाल
बिहार के जमुई में 19 सितंबर की शाम जो हुआ, वह सिर्फ एक नाबालिग लड़की के साथ बदसलूकी की घटना भर नहीं है, बल्कि पूरे पुलिस तंत्र की कार्यशैली पर एक बड़ा सवालिया निशान है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल नहीं होता, तो क्या पुलिस को इसकी भनक तक लगती?
दो दिन तक यह मामला पूरी तरह दबा रहा, न पीड़िता की तरफ से कोई शिकायत आई, न पुलिस की तरफ से कोई हरकत हुई. जब वीडियो वायरल हुआ, तब जाकर पुलिस नींद से जागी, एफआईआर दर्ज हुई, एसआईटी बनी और तीन नाबालिगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि बाकी चार से पांच आरोपी अब भी खुलेआम घूम रहे हैं. राष्ट्रीय महिला आयोग ने संज्ञान लेकर डीजीपी को सख्त कार्रवाई का आदेश दिया है, लेकिन सवाल यह है कि आयोग को दखल देने की नौबत आई ही क्यों?
घटना जमुई लखीसराय मुख्य मार्ग से करीब तीन किलोमीटर दूर पहाड़ी इलाके में शाम साढ़े छह बजे के आसपास हुई थी. दसवीं कक्षा की एक लड़की और एक लड़का, दोनों दोस्त और एक ही कोचिंग के छात्र, मरवा पहाड़ की तरफ से कोचिंग खत्म कर स्कूटी पर लौट रहे थे. आरोप है कि रास्ते में कुछ युवकों ने उन्हें रोक लिया. लड़के को अलग किया गया और लड़की को घेर लिया गया. जो वीडियो बाद में वायरल हुए, उनमें लड़की से नाम पता पूछा जा रहा है, उसके साथ अभद्रता की जा रही है, और एक हिस्से में उसे सड़क पर घसीटा भी जा रहा है.
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अब सवाल यह उठता है कि जमुई लखीसराय जैसे व्यस्त मार्ग पर, जहां कोचिंग जाने वाले सैकड़ों छात्र छात्राएं रोज गुजरते हैं, वहां शाम के वक्त गश्त क्यों नहीं थी? एडीजी लॉ एंड ऑर्डर केएस अनुपम ने खुद माना कि अब पेट्रोलिंग व्यवस्था की जांच की जाएगी. यानी जांच अब हो रही है, जब घटना हो चुकी है, जब वीडियो वायरल हो चुका है, और जब पूरे बिहार में किरकिरी हो चुकी है. सवाल है कि यह जांच पहले क्यों नहीं हुई? क्या किसी बेटी की सुरक्षा तय करने के लिए हमेशा किसी हादसे का इंतजार किया जाएगा?
जमुई एसपी विश्वजीत दयाल ने खुद स्वीकार किया कि रविवार तक पीड़ित पक्ष की तरफ से कोई शिकायत नहीं आई थी. वीडियो वायरल होने के बाद गाड़ी के नंबर से पीड़ितों की पहचान की गई. यहां सवाल पीड़ित परिवार पर नहीं है, सवाल पुलिस की उस कार्यशैली पर है जो शिकायत के इंतजार में बैठी रहती है, भले ही मामला नाबालिग लड़की की गरिमा और सुरक्षा से जुड़ा क्यों न हो. एक गंभीर अपराध, वह भी सार्वजनिक सड़क पर, दो दिन तक बिना किसी कार्रवाई के दबा रहा. यह पुलिस की सक्रियता नहीं, बल्कि लापरवाही की मिसाल है.
वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने जरूर तेजी दिखाई. पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में केस दर्ज हुआ, एसडीपीओ दीप्ति मोनाली की अगुवाई में एसआईटी बनी, सात आठ युवकों की पहचान हुई और तीन नाबालिगों को हिरासत में लिया गया. लेकिन सवाल है कि यह तेजी घटना के तुरंत बाद क्यों नहीं दिखी? क्या पुलिस की सक्रियता अब सिर्फ सोशल मीडिया के दबाव पर निर्भर हो गई है?
इस बीच सरकार का रवैया भी सवालों के घेरे में है. विपक्ष ने आरोप लगाया कि बिहार में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और राज्य जंगल राज की तरफ बढ़ रहा है. इस पर मंत्री श्रवण कुमार का बयान आया कि राज्य में छिटपुट घटनाएं हो रही हैं, इससे इनकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने इसे दुखद बताया और कहा कि सरकार मर्माहत है. लेकिन सवाल है कि क्या एक मंत्री का दुख जताना ही समाधान है? क्या इक्का दुक्का घटना कहकर एक नाबालिग के साथ हुई बदसलूकी को हल्का करके देखा जा सकता है? जब सड़क पर एक लड़की को भीड़ घेर ले और कोई पुलिस मौके पर न पहुंचे, तो यह छिटपुट घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी है.
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मामले का एक और परेशान करने वाला पहलू यह है कि वीडियो वायरल होने के बाद पीड़िता की पहचान और चेहरा भी सार्वजनिक हो गया. पुलिस को अब इसके लिए अलग से कार्रवाई करनी पड़ रही है. साइबर थाने में करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल के खिलाफ केस दर्ज हुआ है और दर्जनों फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स अकाउंट पर टेकडाउन कार्रवाई हुई है. यानी पीड़िता को पहले सड़क पर बदसलूकी झेलनी पड़ी, और उसके बाद उसकी पहचान उजागर होने का खतरा झेलना पड़ा. एसपी ने लोगों से वीडियो न फैलाने की अपील तो कर दी, लेकिन जब तक वीडियो हजारों लोगों तक पहुंच चुका था, तब तक यह अपील बेमानी हो चुकी थी.
आखिर में सवाल यही बचता है कि क्या जमुई पुलिस और बिहार सरकार सिर्फ गिरफ्तारियों की गिनती दिखाकर इस मामले को बंद मान लेंगे, या घटना से पहले सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में भी कोई ठोस कदम उठाया जाएगा? कानून व्यवस्था की असली परीक्षा गिरफ्तारियों की संख्या में नहीं, बल्कि इसमें होती है कि अपराध होने से पहले कितनी सतर्कता बरती गई. जमुई की यह घटना बिहार के सुरक्षा तंत्र पर कई असहज और जरूरी सवाल छोड़ गई है, जिनके जवाब सिर्फ बयानों से नहीं मिलेंगे.
