नौवीं क्लास की हाफ ईयरली एग्जाम में अच्छे नंबर लाया बेटा, पिता ने गिफ्ट कर दी 2.30 करोड़ की BMW, कभी मुंबई में थे लाइटमैन
पश्चिम बंगाल के एक गांव में 15 साल के लड़के को उसके पिता ने ऐसा गिफ्ट दिया है, जो चर्चा में आ गया. नौवीं क्लास में पढ़ने वाले मोहम्मद तलहा के हॉफ ईयरली एग्जाम में अच्छे नंबर आए तो पिता शम्सुद्दीन मिद्या ने उसे करीब 2.30 करोड़ रुपये की BMW गिफ्ट कर दी.
कभी मुंबई में लाइटमैन का काम करने वाले शम्सुद्दीन आज चावल के बड़े कारोबारी हैं. जिस बेटे को उन्होंने इतनी महंगी कार दी है, वह 15 साल की उम्र के चलते अभी उसे खुद चला भी नहीं सकता.
शम्सुद्दीन मिद्या पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्दवान जिले के गलसी इलाके के पराज गांव में रहते हैं. उनका बेटा मोहम्मद तलहा स्थानीय स्कूल में नौवीं क्लास में पढ़ता है. पिता के मुताबिक, तलहा काफी समय से BMW M4 कॉम्पिटिशन चाहता था.
शम्सुद्दीन ने बताया कि बेटे ने उनसे बहुत पहले कहा था, 'अब्बा, मुझे एक BMW चाहिए.' अब जब हॉफ ईयरली एग्जाम में उसके अच्छे नतीजे आए तो उन्होंने उसकी यह इच्छा पूरी करने का फैसला किया.
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इसके बाद वह मुंबई गए और अंधेरी के एक शोरूम से नई BMW M4 कॉम्पिटिशन खरीद ली. शुक्रवार को इस कार को एक खास कंटेनर में रखकर पराज गांव पहुंचाया गया. पिता के मुताबिक, इसकी कीमत करीब 2.30 करोड़ रुपये है.
शम्सुद्दीन की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है. आज वह चावल के बड़े कारोबारी हैं, लेकिन एक समय ऐसा था जब वह मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में लाइटमैन के तौर पर काम करते थे.
वह साल 2003 में काम की तलाश में मुंबई गए थे. करीब सात साल वहां रहने के बाद 2010 में अपने गांव लौट आए. इसके बाद उन्होंने चावल का कारोबार शुरू किया और धीरे-धीरे इसे आगे बढ़ाया.
आज गलसी इलाके में उनकी तीन चावल मिल हैं. उनका कारोबार सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं है. वह वियतनाम, मलेशिया, सिंगापुर और दुबई जैसे देशों में भी चावल एक्सपोर्ट करते हैं.
शम्सुद्दीन को महंगी गाड़ियों का शौक है. उनके पास पहले से रेंज रोवर, वोल्वो, महिंद्रा थार और हुंडई अल्काजार जैसी गाड़ियां हैं. अब BMW M4 कॉम्पिटिशन भी उनके कार कलेक्शन में शामिल हो गई है.
उनकी गाड़ियों के नंबर प्लेट की भी एक खास बात है. कई गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन नंबर के आखिरी तीन अंक 555 हैं. यह वही नंबर है, जो बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान की गाड़ियों के साथ भी जोड़ा जाता है.
शम्सुद्दीन अपनी इस कामयाबी का श्रेय ऊपरवाले को देते हैं. उनका कहना है कि यह सब उसी की मेहरबानी से मुमकिन हुआ है.
तलहा के लिए यह तोहफा किसी सपने के सच होने जैसा है. हालांकि, अभी वह इस कार को खुद नहीं चला सकता. उसकी उम्र सिर्फ 15 साल है और उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं है.
तलहा का कहना है कि फिलहाल वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहता है. उसने हफ्ते में एक दिन इस कार में बैठने का प्लान बनाया है. उस दिन पिता गाड़ी चलाएंगे और वह बगल वाली सीट पर बैठकर सफर का मजा लेगा.
शम्सुद्दीन के मुताबिक, वह जरूरतमंद लोगों की मदद भी करते हैं. कई बार वह बिना किसी को बताए चुपचाप लोगों की हेल्प करते हैं. फिलहाल उनके बेटे को मिला यह महंगा तोहफा पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है.


