सोशल मीडिया पर करोड़ों फॉलोअर्स, फिर भी पत्नी को नहीं जिता पाए पवन साहू, 277 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहीं कोमल
सोशल मीडिया पर करोड़ों लोग पवन साहू को देखते हैं. रील्स पर लाखों व्यूज आते हैं. यूट्यूब पर 2.77 करोड़ से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं और इंस्टाग्राम पर भी करीब 70 लाख लोग फॉलो करते हैं. लेकिन जब बात गांव के चुनाव की आई, तो सोशल मीडिया की यह लोकप्रियता वोटों में बदल नहीं पाई. ये कहानी राजस्थान के भीलवाड़ा जिले की है. यहां सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर पवन साहू अपनी पत्नी कोमल साहू को सरपंच का चुनाव नहीं जिता पाए.
कोमल को महज 277 वोट मिले और वह तीसरे नंबर पर रहीं. वहीं, भगवती लाल सोनी ने 1203 वोट हासिल कर सरपंच पद पर जीत दर्ज की. पूर्व सरपंच कालूराम 797 वोट के साथ दूसरे नंबर पर रहे. यह मामला भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा उपखंड की फुलियाखुर्द ग्राम पंचायत का है.
यहां सरपंच पद के चुनाव में पवन साहू ने अपनी पत्नी कोमल साहू को उम्मीदवार बनाया था. पवन साहू सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हैं. उनके यूट्यूब चैनल पर करीब 2 करोड़ 77 लाख फॉलोअर्स हैं, जबकि इंस्टाग्राम पर उन्हें करीब 70 लाख लोग फॉलो करते हैं.
पंचायत चुनाव के दौरान पवन साहू की सोशल मीडिया लोकप्रियता की खूब चर्चा हुई. उन्होंने पत्नी कोमल को चुनाव मैदान में उतारते हुए 'मेरा गांव, मेरी पहचान' का नारा दिया था. इस चुनाव को उन्होंने 'MISSION 2026' नाम दिया था.
गांव की तरक्की के लिए क्या वादे किए थे?
चुनाव प्रचार के दौरान पवन साहू ने गांव के विकास को अपना मुख्य एजेंडा बताया था. सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी कर उन्होंने स्वच्छता, बेहतर सड़कें, साफ पेयजल, शिक्षा और युवाओं के बेहतर भविष्य जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात कही थी.
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उन्होंने कहा था कि सरपंच का पद सिर्फ कुर्सी हासिल करने का जरिया नहीं, बल्कि गांव की समस्याओं को समझने और ग्रामीणों की आवाज उठाने की जिम्मेदारी है. पवन साहू ने ग्रामीणों से गांव की जरूरतों और समस्याओं को लेकर सुझाव भी मांगे थे. उनका कहना था कि सामूहिक सोच और जनहित के कामों से फुलियाखुर्द को आगे बढ़ाना उनका मकसद है.
चुनाव के नतीजे आए तो सोशल मीडिया पर चर्चा में रहे पवन साहू की पत्नी कोमल साहू तीसरे नंबर पर रहीं. उन्हें सिर्फ 277 वोट मिले. वहीं, भगवती लाल सोनी को 1203 वोट मिले और वह सरपंच चुन लिए गए. पूर्व सरपंच कालूराम 797 वोट हासिल कर दूसरे स्थान पर रहे. इस तरह कोमल साहू जीत हासिल करने से काफी पीछे रह गईं. करोड़ों फॉलोअर्स वाले पवन साहू की सोशल मीडिया लोकप्रियता उनकी पत्नी के लिए चुनावी जीत में नहीं बदल सकी.
सोशल मीडिया के फॉलोअर्स और गांव के वोटर, दोनों अलग हैं?
इस चुनाव का नतीजा एक दिलचस्प सवाल भी खड़ा करता है. सोशल मीडिया पर करोड़ों लोगों तक पहुंच रखने वाला कोई व्यक्ति क्या उस लोकप्रियता को सीधे चुनावी समर्थन में बदल सकता है? फॉलोअर्स का बड़ा आंकड़ा किसी व्यक्ति की डिजिटल पहुंच तो दिखाता है, लेकिन इससे यह तय नहीं होता कि उसके गांव के लोग उसे या उसके उम्मीदवार को वोट भी देंगे.
स्थानीय चुनाव में उम्मीदवार की पहचान, गांव के लोगों से जुड़ाव, स्थानीय मुद्दे और मतदाताओं के अपने फैसले भी अहम होते हैं. पवन साहू ने अपनी पत्नी कोमल के जरिए गांव की राजनीति में कदम रखने की कोशिश की थी. लेकिन फुलियाखुर्द के मतदाताओं ने नतीजों में अलग फैसला दिया. कोमल साहू 277 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहीं और भगवती लाल सोनी नए सरपंच चुने गए.


