पुतिन से जिनपिंग तक, 3 दिन में 15 द्विपक्षीय बैठकें... BRICS समिट में पीएम मोदी की मैराथन डिप्लोमेसी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित BRICS समिट के दौरान तीन दिनों में अलग-अलग देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ 15 औपचारिक द्विपक्षीय बैठकें कीं. इसके अलावा उन्होंने कई ग्लोबल लीडर्स और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के प्रमुखों के साथ अनऑफिशियल बातचीत भी की. विदेश मंत्रालय...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित BRICS समिट के दौरान तीन दिनों में अलग-अलग देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ 15 औपचारिक द्विपक्षीय बैठकें कीं. इसके अलावा उन्होंने कई ग्लोबल लीडर्स और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के प्रमुखों के साथ अनऑफिशियल बातचीत भी की. विदेश मंत्रालय (MEA) ने रविवार को इसकी जानकारी दी.

भारत ने 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की. इस बार सम्मेलन की थीम 'Building Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability' रखी गई थी. सम्मेलन में 13 वैश्विक नेताओं के साथ कुल 17 प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली पहुंचे.

पीएम मोदी के कूटनीतिक कार्यक्रम की शुरुआत रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत से हुई. एक महीने से भी कम समय में दोनों नेताओं की यह दूसरी मुलाकात थी. इससे पहले 31 अगस्त को बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेता मिले थे.

मोदी-पुतिन की बैठक में रक्षा, ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग की समीक्षा की गई. दोनों नेताओं ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर भी चर्चा की.

रक्षा क्षेत्र की बातचीत में S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की पांचवीं रेजिमेंट की डिलीवरी, ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम के अपग्रेड और RVV-BD लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की संभावित आपूर्ति जैसे मुद्दे शामिल रहे. दोनों पक्षों ने व्यापार असंतुलन कम करने, भारतीय कुशल कामगारों की रूस में आवाजाही बढ़ाने और उर्वरक, स्टील तथा रेलवे सप्लाई चेन में सहयोग बढ़ाने पर भी बातचीत की.

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प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से भी मुलाकात की. राष्ट्रपति बनने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा था. दोनों नेताओं की मुलाकात ऐसे समय हुई, जब ईरान से जुड़े संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं.

पीएम मोदी ने एक बार फिर भारत की ओर से बातचीत और कूटनीति के जरिए विवादों के समाधान की बात दोहराई. दोनों नेताओं ने चाबहार बंदरगाह, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और संघर्ष के व्यापार एवं ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी चर्चा की.

प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से भी बातचीत की. इस दौरान दुनिया में जारी संघर्षों, बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार और विकासशील देशों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई.

शनिवार को पीएम मोदी की द्विपक्षीय बैठकों का सबसे व्यस्त दौर देखने को मिला. उन्होंने इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद और वियतनाम के प्रधानमंत्री फाम मिन्ह चिन्ह से मुलाकात की.

इसके बाद शाम को प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच अहम बैठक हुई. जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत पहुंचे थे. इससे पहले वह अक्टूबर 2019 में पीएम मोदी के साथ मामल्लपुरम में अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के लिए भारत आए थे. विदेश मंत्रालय के मुताबिक मोदी और जिनपिंग ने भारत-चीन संबंधों में धीरे-धीरे हो रहे सुधार का स्वागत किया. दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत और चीन को प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझेदार के रूप में आगे बढ़ना चाहिए.

हालांकि पीएम मोदी ने साफ किया कि द्विपक्षीय संबंधों को लगातार आगे बढ़ाने के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता जरूरी है. दोनों नेताओं के बीच व्यापार, बाजार तक पहुंच, सप्लाई चेन और दोनों देशों के नागरिकों की आवाजाही बढ़ाने पर भी चर्चा हुई.

रविवार को भी प्रधानमंत्री का बैठकों का सिलसिला जारी रहा. उन्होंने कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव से मुलाकात की. कजाकिस्तान इस समय यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन की अध्यक्षता भी कर रहा है. पीएम मोदी ने फिलीपींस, मिस्र, दक्षिण अफ्रीका, बुरुंडी, नाइजीरिया और युगांडा के नेताओं और प्रतिनिधियों के साथ भी बातचीत की. मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा के साथ बातचीत में द्विपक्षीय सहयोग के साथ ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं पर विशेष जोर रहा.

ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डि सिल्वा और सऊदी अरब के शीर्ष नेतृत्व ने समिट में हिस्सा नहीं लिया. दोनों देशों का प्रतिनिधित्व उनके विदेश मंत्रियों ने किया.

औपचारिक द्विपक्षीय बैठकों के अलावा पीएम मोदी ने कई नेताओं और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ छोटी अनौपचारिक बातचीत भी की. उन्होंने न्यू डेवलपमेंट बैंक के अधिकारियों और BRICS Business Forum के प्रतिभागियों से भी संवाद किया. भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता का इस्तेमाल अलग-अलग देशों के साथ द्विपक्षीय हितों को आगे बढ़ाने के साथ ग्लोबल साउथ से जुड़े बड़े मुद्दों को उठाने के लिए किया.

नई दिल्ली ने मजबूत और लचीली सप्लाई चेन, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के ज्यादा इस्तेमाल और वैश्विक संस्थानों में सुधार की वकालत की, ताकि विकासशील देशों को ज्यादा प्रतिनिधित्व मिल सके.

इन बैठकों के जरिए प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों पर भी भारत का रुख सामने रखा. भारत ने तनाव कम करने और बातचीत तथा कूटनीति के रास्ते पर लौटने की अपनी नीति दोहराई.

ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान तीन दिनों में 15 औपचारिक द्विपक्षीय बैठकों और कई अनौपचारिक मुलाकातों ने यह भी दिखाया कि भारत ने इस वैश्विक मंच का इस्तेमाल ब्रिक्स के सामूहिक एजेंडे के साथ ठोस द्विपक्षीय नतीजों के लिए भी किया.

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https://www.aajtak.in/india/news/story/prime-minister-modi-bilateral-meetings-brics-summit-global-cooperation-ntcpvp-rptc-2642249-2026-09-13?utm_source=rss
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