36 की उम्र में लगा था अब सब खत्म... फिर सुचिका ने रचा इतिहास, बोलीं- अब खुशी से मर सकती हूं

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जिंदगी की आखिरी लड़ाई समझकर उतरी थीं... लेकिन जापान में इतिहास लिख दिया. 36 साल की सुचिका तरियाल ने एशियन गेम्स में भारत को मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) का पहला पदक दिलाया तो उनकी आंखों में जीत की चमक से ज्यादा उन वर्षों की कहानी थी, जिन्हें उन्होंने खेल के नाम कर दिया था.

जिंदगी की आखिरी लड़ाई समझकर उतरी थीं... लेकिन जापान में इतिहास लिख दिया. 36 साल की सुचिका तरियाल ने एशियन गेम्स में भारत को मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) का पहला पदक दिलाया तो उनकी आंखों में जीत की चमक से ज्यादा उन वर्षों की कहानी थी, जिन्हें उन्होंने खेल के नाम कर दिया था.

हरियाणा के रोहतक जिले के किलोई गांव की सुचिका ने महिलाओं की ट्रेडिशनल 60 किग्रा MMA स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीता. सेमीफाइनल में सिंगापुर की हुई हून तेओ के खिलाफ मुकाबला बेहद कांटे का रहा और दोनों का स्कोर बराबर रहा. फैसला कम वजन वाली खिलाड़ी के पक्ष में गया और सुचिका को फाइनल में पहुंचने का मौका नहीं मिला. लेकिन उनके लिए यह ब्रॉन्ज किसी गोल्ड से कम नहीं था.

मेडल जीतने के बाद सुचिका ने पीटीआई से कहा, 'यह मेरी जिंदगी से भी बढ़कर है. मैं कभी नहीं भूलूंगी कि जापान आई और अपने देश के लिए मेडल जीता. अब मैं खुशी से मर सकती हूं.'

VIDEO | Nagoya, Japan: Asian Games bronze medallist Suchika Tariyal revealed that legendary boxer Mary Kom has been her inspiration since childhood. “My inspiration is Mary Kom. I have liked her since my childhood. When we used to camp together, she used to look good. Mary Kom… pic.twitter.com/VmWc5SUN6J

यह सिर्फ भावुकता में कही गई लाइन नहीं थी. सुचिका के करियर में यह मेडल लंबे इंतजार के बाद आया है.

सुचिका बोलीं- दोनों राउंड जीती थी, वजन को क्यों बनाया आधार?

एशियन गेम्स 2026 में महिला ट्रेडिशनल MMA के 60 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीतने वाली भारत की सुचिका तारियाल ने सेमीफाइनल के फैसले पर सवाल उठाए हैं. सिंगापुर की हुई हून तेओ के खिलाफ मुकाबला हारने के बाद सुचिका ने कहा कि उन्होंने पदक का रंग बदलने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी, लेकिन फैसला उनके पक्ष में नहीं रहा.

सुचिका के मुताबिक, मुकाबले में वह लगातार बेहतर नजर आ रही थीं और टेकडाउन भी उन्हीं ने किए. उन्होंने कहा, 'मैंने पदक का रंग बदलने की पूरी कोशिश की, लेकिन कुछ परिस्थितियों की वजह से ऐसा नहीं कर पाई. शायद कहीं मैं थोड़ी कम पड़ गई या फिर फैसला मेरे पक्ष में नहीं था. मैं उस फैसले से सहमत भी नहीं हूं.'

उन्होंने कहा कि मुकाबला देखने वाले कई लोगों ने भी उन्हें बताया कि उनका प्रदर्शन बेहतर था. सुचिका ने वजन से जुड़े नियम का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें नियमों की जानकारी है और ज्यादा वजन होने की स्थिति में हार का नियम लागू होता है, लेकिन सिर्फ वजन के आधार पर पूरे मुकाबले का आकलन नहीं होना चाहिए.

सुचिका ने अपने प्रदर्शन का हवाला देते हुए कहा, 'अगर आप मुकाबला देखें तो मैं ही जीत रही थी. टेकडाउन मैं कर रही थी. उसने मुझे एक बार भी टेकडाउन नहीं किया. वह सिर्फ हवा में पंच कर रही थी.'

उनका कहना था कि मुकाबला केवल वजन के अंतर तक सीमित नहीं होना चाहिए था. सुचिका ने आरोप लगाया कि मुकाबले का फैसला प्रदर्शन की बजाय वजन के आधार पर कर दिया गया.

उन्होंने कहा, 'यह वजन तक नहीं जाना चाहिए था, लेकिन उन्होंने इसे वजन का मामला बना दिया. सिर्फ इसलिए उसे विजेता घोषित कर दिया गया क्योंकि उसका वजन कम था, जबकि मैंने दोनों राउंड जीते थे.'

फैसले को लेकर सुचिका ने अपनी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा, 'हमारी अंतरराष्ट्रीय फेडरेशन सिंगापुर की है और वह खिलाड़ी भी सिंगापुर की थी'. उनका इशारा सेमीफाइनल के उस फैसले की ओर था, जिसमें कड़े मुकाबले के ड्रॉ रहने के बाद कम वजन के आधार पर सिंगापुर की हुई हून तेओ को विजेता घोषित किया गया.

VIDEO | Nagoya, Japan: Suchika Tariyal was left heartbroken after a closely fought bout ended in a controversial weight-based ruling, but the Indian fighter still created history by winning the country’s maiden Asian Games medal in mixed martial arts at the 20th edition of the… pic.twitter.com/J7mZgRncAC

सुचिका ने 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में भारत का प्रतिनिधित्व किया था. वहां वह ब्रॉन्ज मेडल के मुकाबले में पहुंचीं, लेकिन पदक से चूक गईं. इसके बाद एशियन गेम्स में कुराश में भी उतरीं, लेकिन वहां भी मेडल हाथ नहीं आया. फिर MMA ने उन्हें एक और मौका दिया. और इस बार उन्होंने मौका हाथ से नहीं जाने दिया.

सुचिका ने बताया, 'मैं चाहती थी कि अपने देश के लिए मेडल जीतूं, ताकि लोग मुझे जानें. मैं जिउ-जित्सु में वर्ल्ड चैम्पियन भी हूं. कुराश में एशियन गेम्स खेल चुकी हूं, लेकिन वहां मेडल नहीं मिला. फिर मुझे यहां खुद को साबित करने का दूसरा मौका मिला. मैंने इसके लिए बहुत मेहनत की.'

सुचिका की कहानी सिर्फ खेल उपलब्धियों की नहीं, बल्कि उस संघर्ष की भी है जिसमें एक खिलाड़ी को अपने सपने के लिए आर्थिक मुश्किलों से लड़ना पड़ा.

उनके पिता सरकारी नौकरी से रिटायर हैं और मां गृहिणी हैं. करियर के शुरुआती दौर में आर्थिक परेशानियां इतनी थीं कि ट्रेनिंग के लिए उन्हें अपने विभाग से बिना वेतन छुट्टी तक लेनी पड़ी.

ऐसे वक्त में पति ने आर्थिक रूप से उनका साथ दिया.

सुचिका ने कहा, 'आर्थिक रूप से मुझे बहुत समस्याएं थीं. मैंने ट्रेनिंग के लिए अपने विभाग से बिना वेतन छुट्टी ली. मेरे पति ने आर्थिक रूप से मेरा समर्थन किया और मुझे यहां तक पहुंचाया. इसलिए मैं यह मेडल अपने माता-पिता और पति को समर्पित करना चाहती हूं.'

सुचिका की प्रेरणा भी उसी जिद की कहानी कहती है. उनकी आदर्श हैं छह बार की वर्ल्ड चैम्पियन और ओलंपिक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट बॉ़क्सर मैरी कॉम. सुचिका ने उन्हें पहली बार राष्ट्रीय जूडो कैंप के दौरान भोपाल में देखा था.

उन्होंने कहा,  'मैं बचपन से मैरी कॉम दीदी को पसंद करती हूं. शायद 2009-10 में भोपाल में जूडो के राष्ट्रीय कैंप में थीं. वह अपने कपड़ों और जिस तरह खुद को संभालती थीं, बहुत शानदार लगती थीं. वह मेरी आइडल हैं. मैंने उनसे कभी व्यक्तिगत रूप से बात नहीं की. अगर मौका मिला तो उनसे बात करना चाहूंगी.'

जिस खिलाड़ी को उन्होंने कभी दूर से देखकर अपना आदर्श बनाया, उसी तरह सुचिका अब उन खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं जो मानते हैं कि खेल में उम्र किसी सपने की आखिरी तारीख नहीं होती.

इस मेडल की सबसे दिलचस्प बात शायद यही है कि सुचिका एशियन गेम्स को अपने MMA करियर का आखिरी पड़ाव मानकर जापान आई थीं.

उन्हें लगा था कि 36 की उम्र में अब खेल को अलविदा कह देना चाहिए. लकिन सेमीफाइनल तक पहुंचने के सफर ने उनकी सोच बदल दी.

उन्होंने कहा, 'मैंने सोचा था कि एशियन गेम्स के बाद MMA छोड़ दूंगी. मैं अब उम्रदराज हो गई हूं और खेलना बंद करना चाहती थी. लेकिन अब मुझे लगता है कि मैं कर सकती हूं. आज के प्रदर्शन को देखकर लगता है कि मैं अभी और कर सकती हूं.'

Suchika distraught pic.twitter.com/cBpo4ij5s4

सुचिका प्रोफेशनल फाइटिंग भी करती हैं और Brave में अगली फाइट की तैयारी कर सकती हैं. यानी जिस दिन वह भारत के लिए MMA का पहला एशियन गेम्स मेडल लेकर खड़ी थीं, उसी दिन उनके करियर का अंत नहीं, एक नया अध्याय शुरू हो गया.

36 साल की उम्र में सुचिका ने सिर्फ ब्रॉन्ज नहीं जीता. उन्होंने उस सोच को भी मात दी कि खिलाड़ी के सपनों की कोई एक्सपायरी डेट होती है.

Original Source
https://www.aajtak.in/sports/asian-games/story/suchika-tariyal-india-first-asian-games-mma-medal-bronze-36-age-story-bmsp-dskc-2649172-2026-09-21?utm_source=rss
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