जुगाड़ के 'पिलर' पर खड़ा बिहार का एजुकेशन सिस्टम, 5 जिलों में आजतक का रियलिटी चेक

Direct Source Verification: This story is aggregated from India Today (indiatoday.in). Full reporting rights and copyright belong to the primary publisher.
बिहार के सरकारी स्कूलों की गारंटी कौन देगा? यहां पढ़ाई तो दूसरी प्राथमिकता है, पहली चिंता है सुरक्षित क्लासरूम की. खगड़िया में 7 साल की बच्ची रितिका कुमारी के सिर पर स्कूल की सीढ़ी का मलबा गिरने से हुई मौत ने इस सवाल को और भी मुनासिब बना दिया है. आजतक ने जब बिहार के अलग-अलग जिलों...

बिहार के सरकारी स्कूलों की गारंटी कौन देगा? यहां पढ़ाई तो दूसरी प्राथमिकता है, पहली चिंता है सुरक्षित क्लासरूम की. खगड़िया में 7 साल की बच्ची रितिका कुमारी के सिर पर स्कूल की सीढ़ी का मलबा गिरने से हुई मौत ने इस सवाल को और भी मुनासिब बना दिया है. आजतक ने जब बिहार के अलग-अलग जिलों में सरकारी स्कूलों का रियलिटी चेक किया तो कई जगह तस्वीर ऐसी मिली, जहां जर्जर छतें, दरकी दीवारें और टूटे पिलर बच्चों की जिंदगी पर मंडराता खतरा हैं.

दरभंगा के कीरतपुर में पिलर जवाब दे चुका है और छत को बेंच-ईंटों के सहारे थामने की कोशिश हो रही है.  छपरा में सिर के ऊपर टूटती छत है, मुजफ्फरपुर में बारिश के बीच टपकती छत, भागलपुर में जगह की कमी और बेगूसराय में जर्जर कमरों से बाहर बरामदे में पढ़ते बच्चे. 

ऐसा नहीं है कि अधिकारियों, विधायकों और सांसदों को इस बात की जानकारी नहीं है. यहां सभी को सब कुछ पता है, लेकिन एक्शन लापता है.  

आइए चलते हैं दरभंगा. यहां के कीरतपुर से स्कूल की जो तस्वीर आई है वो ये बताने के लिए काफी है कि बिहार के एजुकेशन सिस्टम का खंभा कैसे ढहने को तैयार है. 

यहां सरकारी स्कूल का एक पिलर करीब चार-पांच महीने पहले जवाब दे चुका है. छत को बेंच और ईंटों के सहारे गिरने से रोकने की कोशिश की जा रही है. स्कूल में बच्चे रोजाना मौत के साए में पढ़ाई करने के लिए मजबूर है. जिंदगी सलामत रहे इसलिए बच्चों की क्लास स्कूल के बाहर ग्राउंड में लगी है. इस स्कूल में पहली से पांचवीं कक्षा तक के बच्चे पढ़ते हैं. भवन की दीवारों और छत का प्लास्टर कई जगहों से गिर चुका है.  कई जगह बड़ी-बड़ी दरारें हैं और अंदर लगे लोहे के सरिए भी जंग खा चुके हैं. 

स्कूल भवन की स्थिति को देखते हुए शिक्षक बच्चों को जर्जर हिस्से में नहीं पढ़ा रहे हैं. स्कूल परिसर में टीन शेड लगाकर बच्चों की कक्षाएं चलाई जा रही हैं. लेकिन बरसात के दौरान टीन का शेड कितना पानी रोक लेगा. दरभंगा का भविष्य फिलहाल इसी अस्थायी अरेंजमेंट में पढ़ने को मजबूर हैं.   स्कूल के प्रधानाध्यापक राजेंद्र कुमार के मुताबिक जर्जर भवन की जानकारी प्रखंड से लेकर जिला स्तर के अधिकारियों तक कई बार दी जा चुकी है. उनका कहना है कि करीब पांच-छह बार अधिकारियों को जानकारी दी गई. स्कूल की तरफ से पत्र भी भेजे गए और अधिकारियों ने स्कूल का निरीक्षण किया. इसके बावजूद अभी तक नया भवन या स्थायी मरम्मत की व्यवस्था नहीं हुई है. 

बिहार के शिक्षा विभाग की नींद कब टूटेगी? 'बेंच की जुगाड़' के भरोसे चलता स्कूल!#ATVideo #Khabardar #Bihar #Schools | @swetasinghat | @rohit_manas pic.twitter.com/lVXjl3t1p6

 खगड़िया में बच्ची की मौत के बाद बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा था कि स्कूल भवन जर्जर होने की जानकारी समय पर सरकार को देना प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी है. उन्होंने यह भी कहा था कि समय पर जानकारी नहीं देने पर कार्रवाई की जाएगी.    अब दरभंगा के कीरतपुर स्कूल में प्रधानाध्यापक का दावा है कि जर्जर भवन की जानकारी पहले ही कई बार अधिकारियों को दी जा चुकी है. ऐसे में सवाल उठता है कि जब स्कूल प्रशासन की ओर से जानकारी दिए जाने का दावा किया जा रहा है, तो इसके बाद भी भवन को सुरक्षित क्यों नहीं कराया गया?

सीएम की घोषणा को भी पढ़ लीजिए   इस पूरी पड़ताल के बीच बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के उस ऐलान का भी जिक्र जरूरी है जो उन्होंने हाल ही में आजतक के कार्यक्रम 'पंचायत आजतक बिहार' में किया था.    सीएम सम्राट चौधरी ने सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए 'सेवा संकल्प और कायाकल्प' अभियान चलाने की बात कही थी. उन्होंने कहा था कि गांवों के स्कूलों में बाथरूम, गेट, बाउंड्री और रंगाई-पुताई जैसी जरूरी चीजों को ठीक कराया जाएगा.

मुख्यमंत्री के मुताबिक सरकार अगले दो वर्षों में करीब 20 हजार करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य लेकर चल रही है. उन्होंने अधिकारियों को स्कूलों की स्थिति सुधारने के निर्देश दिए थे.

सम्राट चौधरी ने कहा था कि छोटे और तत्काल किए जाने वाले काम जैसे गेट लगाना, बाउंड्री ठीक करना और रंगाई-पुताई आदि के लिए 30 नवंबर तक का लक्ष्य रखा गया है. वहीं नए निर्माण से जुड़े कामों को 31 मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य बताया गया था.    लेकिन दरभंगा के कीरतपुर स्कूल में तस्वीर इससे कहीं ज्यादा गंभीर है. यहां मामला केवल बाथरूम, गेट या रंगाई-पुताई का नहीं है. स्कूल भवन का एक पिलर जवाब दे चुका है और बच्चों को जर्जर भवन से बाहर टीन शेड में पढ़ाया जा रहा है.

बिहार में स्कूलों का सबसे बड़ा रिएलिटी चेक! बिहार में जर्जर स्कूलों की तस्वीर!#ATVideo #Khabardar #Bihar #Schools | @swetasinghat pic.twitter.com/4F4nWK3ec8

  कीरतपुर के इस जर्जर सरकारी स्कूल का मामला बिहार विधानसभा में भी उठ चुका है. स्थानीय विधायक मैथिली ठाकुर ने बजट सत्र के दौरान स्कूल भवन की स्थिति का मुद्दा उठाया था. इसके बावजूद कई महीने बीत जाने के बाद भी स्कूल भवन की स्थिति में बड़ा बदलाव नहीं हुआ है.

छपरा के स्कूल की जर्जर छत   छपरा शहर के रामचंद्र प्रसाद महाशय आर्य शिशु विद्यालय में स्कूल की सीढ़ी की छत का प्लास्टर कई जगह से टूटकर गिर चुका है. छत का सरिया बाहर दिखाई दे रहा है. सीढ़ी के ऊपर प्लास्टर का हिस्सा भी टूट गया है.

स्कूल के जिन कमरों में बच्चों की पढ़ाई चल रही है, वहां की छत भी कई जगह से जर्जर है. प्लास्टर गिरने के बाद सरिया दिखाई दे रहा है. स्कूल के कई कमरों की हालत खराब होने के कारण वहां पढ़ाई बंद कर दी गई है.    विद्यालय के सीनियर टीचर उपेंद्र कुमार पाठक के मुताबिक स्कूल में पहली से आठवीं तक की पढ़ाई होती है और करीब 250 बच्चे पढ़ते हैं. भवन की स्थिति को लेकर शिक्षा विभाग को कई बार लिखित जानकारी दी गई है. कमरों की कमी के कारण नए बच्चों के एडमिशन में भी परेशानी हो रही है.  मुजफ्फरपुर में दरकती दीवारें और खस्ताहाल टीन की छत के नीचे पढ़ाई   मुजफ्फरपुर के वार्ड नंबर 39 स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय बहलखाना में भी स्कूल भवन की स्थिति खराब है. जब आजतक की टीम यहां पहुंची तो हमने पाया कि स्कूल की दीवारों में दरारें हैं और टीन की छत जर्जर है. बारिश के दौरान छत से पानी टपकता है.   स्कूल के प्रधान शिक्षक अभिषेक कुमार ने कहा कि जगह की कमी के कारण एक ही कमरे में एक से अधिक क्लास के बच्चे पढ़ते हैं. 

यही नहीं इसी परिसर में स्टोर रूम, रसोई और वॉशरूम भी है. प्रधान शिक्षक का कहना है कि स्कूल की स्थिति के बारे में विभाग को कई बार जानकारी दी गई है. लेकिन कुछ एक्शन नहीं हुआ.   भागलपुर में एक ही जगह दो क्लास   आजतक की टीम भागलपुर के सबौर प्रखंड में पहुंची. यहां के नवटोलिया प्राथमिक विद्यालय में कमरों की कमी के कारण एक ही जगह पर दो कक्षाएं चल रही हैं. एक ही जगह दो ब्लैकबोर्ड लगाए गए हैं. अब सोचिए दो टीचर एक साथ बोल रहे हैं, क्लास में छोटे-छोटे बच्चे हैं, उन्हें क्या समझ में आता होगा. 

यही नहीं स्कूल के अंदर के एक कमरे की छत भी जर्जर है.    स्कूल के शिक्षक विभाकर कुमार के मुताबिक पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाना पड़ता है. छात्रों और अभिभावकों ने भी स्कूल भवन की स्थिति को लेकर चिंता जताई है.   बेगूसराय के स्कूल के जर्जर कमरे, 9 साल से भेजी जा रही है चिट्ठी

बेगूसराय के उत्क्रमित मध्य विद्यालय बाघी में तीन कमरों को शिक्षा विभाग की ओर से जर्जर और खंडहर बताया जा चुका है. इस स्कूल में 413 विद्यार्थी और 15 शिक्षक हैं.    जर्जर भवन की वजह से कई कक्षाओं की पढ़ाई बरामदे में कराई जा रही है. कुछ बच्चे बेंच पर तो कुछ जमीन पर बैठकर पढ़ते हैं. स्कूल के प्रधानाध्यापक के मुताबिक भवन निर्माण के लिए 2017 से लगातार विभाग को चिट्ठी भेजी जा रही है, लेकिन अब तक नया भवन नहीं बन सका है.   स्कूल की शिक्षिका कामिनी कुमारी के मुताबिक जर्जर छत से प्लास्टर गिरने का डर बना रहता है, इसलिए कई क्लास को बरामदे में लगाया जाता है.     

Original Source
https://www.aajtak.in/bihar/story/bihar-government-school-reality-check-darbhanga-chhapra-muzaffarpur-bhagalpur-begusarai-report-ntcppl-rptc-2659624-2026-10-02?utm_source=rss
Visit India Today ↗
SHARE STORY:
𝕏 f in

Related Coverage in Education