5 पारंपरिक आर्ट फॉर्म, जिन्हें Gen Z फिर से दे रही है पहचान

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आज के दौर में जहां जेन जी के बीच डिजिटल आर्ट, ग्राफिक डिजाइन और मॉडर्न क्रिएटिविटी का क्रेज बढ़ रहा है, वहीं कई जेन जी भारत की पारंपरिक कला को भी अपनाने में पीछे नहीं हैं. कोई मधुबनी पेंटिंग को मॉडर्न होम डोकोर का हिस्सा बना रहा है, तो कोई वारली आर्ट को कपड़ों और एक्सेसरीज पर इस्...

आज के दौर में जहां जेन जी के बीच डिजिटल आर्ट, ग्राफिक डिजाइन और मॉडर्न क्रिएटिविटी का क्रेज बढ़ रहा है, वहीं कई जेन जी भारत की पारंपरिक कला को भी अपनाने में पीछे नहीं हैं. कोई मधुबनी पेंटिंग को मॉडर्न होम डोकोर का हिस्सा बना रहा है, तो कोई वारली आर्ट को कपड़ों और एक्सेसरीज पर इस्तेमाल कर रहा है. सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की मदद से ये पुरानी कलाएं नई पीढ़ी तक पहुंच रही हैं. आइए जानते है ऐसे 5 पारंपरिक आर्ट फॉर्म के बारे में, जिन्हें जेन जी नए अंदाज में आग बढ़ा रही है. 

बिहार के मिथिला क्षेत्र से जुड़ी मधुबनी पेंटिंग अपनी बारीक डिजाइन, चमकीले रंगों और प्राकृतिक आकृतियों के लिए जानी जाती है. पहले ये कला दीवारों और कागज पर बनाई जाती थी, लेकिन अब युवा कलाकार इसे कैनवास, बुकमार्क, फोन कवर, कपड़ों और होम डेकोर पर भी बना रहे हैं. जेन जी के कई क्रिएटर्स पारंपरिक डिजाइन में नए रंग और आधुनिक थीम जोड़कर इसे आज के फैशन और लाइफस्टाइल से जोड़ रहे हैं.

महाराष्ट्र की आदिवासी कला वारली अपनी सफेद ज्यामितीय आकृतियों और लाल-भूरे बैकग्राउंड के लिए मशहूर है. इसमें खेती, डांस, शादी, त्योहार और रोजमर्रा की जिंदगी को चित्रों के जरिए दिखाया जाता है. आज युवा कलाकार वारली डिजाइन को टी-शर्ट, बैग, दीवारों, ज्वेलरी और दूसरे क्रिएटिव प्रोडक्ट्स पर इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे इस पारंपरिक कला को नए दर्शक मिल रहे हैं.

मध्य प्रदेश से जुड़ी गोंड आर्ट अपनी रंग बिरंगी आकृतियों, बारीक पैटर्न और प्रकृति से जुड़े चित्रों के लिए जानी जाती है. इसमें पेड़-पौधों, जानवरों, पक्षियों और लोककथाओं को खास अंदाज में दिखाया जाता है. आज युवा कलाकार इस कला को कैनवास और दीवारों के अलावा डिजिटल इलस्ट्रेशन, पोस्टर और होम डेकोर में भी इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे गोंड आर्ट को मॉडर्न डिजाइन की दुनिया में भी जगह मिल रही है.

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से जुड़ी कलमकारी कला में कपड़े पर कलम की हेल्प से हाथ से डिजाइन बनाए जाते हैं. इसमें फूलों, पत्तियों, धार्मिक कहानियों और पौराणिक किरदारों को दिखाया जाता है. आज कई युवा डिजाइनर कलमकारी प्रिंट को कुर्ते, साड़ियों, दुपट्टों, बैग और दूसरे फैशन प्रोडक्ट्स में शामिल कर रहे हैं. इस तरह पारंपरिक भारतीय कला को नए फैशन ट्रेंड्स के साथ जोड़ा जा रहा है.

ओडिशा की पट्टचित्र कला अपनी बारीक चित्रकारी और पौराणिक कहानियों के लिए मशहूर है. इसमें भगवान जगन्नाथ, कृष्ण की लीलाओं और दूसरी धार्मिक कहानियों को रंगों और खूबसूरत डिजाइन के जरिए दिखाया जाता है. आज युवा कलाकार इस कला को छोटे कैनवास, बुकमार्क, वॉल हैंगिंग, ग्रीटिंग कार्ड और सजावटी चीजों पर उतार रहे हैं. सोशल मीडिया के जरिए भी कलाकार अपने काम को देश-दुनिया तक पहुंचा रहे हैं.

जेन जी का पारंपरिक कलाओं की ओर बढ़ता रुझान दिखाता है कि मॉडर्न बनने के लिए अपनी संस्कृति को पीछे छोड़ना जरूरी नहीं है. युवा कलाकार पुराने आर्ट फॉर्म को नए डिजाइन, फैशन और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ रहे हैं. इससे न सिर्फ इन कलाओं को नई पहचान मिल रही है, बल्कि पारंपरिक कलाकारों और उनकी कला को आगे बढ़ाने का मौका भी मिल रहा है.

Original Source
https://www.aajtak.in/art-and-culture/story/gen-z-5-traditional-indian-art-forms-that-gen-z-is-keeping-alive-srss-dskc-2687501-2026-11-05?utm_source=rss
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