किसान को बिजली कनेक्शन के लिए इतना तरसाया! 6 साल में दो बेटों फिर पिता ने दे दी जान

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महाराष्ट्र के यवतमाल में बिजली कनेक्शन के लिए एक किसान परिवार का इंतजार खत्म नहीं हुआ. परिवार का आरोप है कि विद्युत वितरण कंपनी की लापरवाही के चलते खेत में बोरवेल होने के बावजूद सिंचाई के लिए बिजली नहीं मिली. इसी बीच छह साल के भीतर परिवार के तीन लोगों- दो बेटों के बाद पिता ने आत्...

महाराष्ट्र के यवतमाल में बिजली कनेक्शन के लिए एक किसान परिवार का इंतजार खत्म नहीं हुआ. परिवार का आरोप है कि विद्युत वितरण कंपनी की लापरवाही के चलते खेत में बोरवेल होने के बावजूद सिंचाई के लिए बिजली नहीं मिली. इसी बीच छह साल के भीतर परिवार के तीन लोगों- दो बेटों के बाद पिता ने आत्महत्या कर ली. अब इस मामले ने बिजली कनेक्शन देने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

मामला रालेगांव तहसील के पिंपलापुर गांव का है. किसान ज्ञानेश्वर मालेकर ने अपने दोनों बेटों के साथ मेहनत करके पांच एकड़ जमीन खरीदी थी. खेती को पानी देने के लिए खेत में बोरवेल भी कराई गई. परिवार ने साल 2020 में बिजली कनेक्शन के लिए जरूरी रकम जमा कर दी. इसके बावजूद कनेक्शन नहीं मिला.

बिजली कनेक्शन का इंतजार चल ही रहा था कि साल 2021 में ज्ञानेश्वर मालेकर के बड़े बेटे निखिल ने आत्महत्या कर ली. परिवार के लिए यह बड़ा झटका था. इसके बाद छोटे बेटे ने खेती की जिम्मेदारी संभाली. उसने भी खेत के लिए बिजली कनेक्शन लेने की कोशिश की. संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया. परिवार को उम्मीद थी कि बिजली मिलने पर बोरवेल का इस्तेमाल हो सकेगा. मगर कनेक्शन नहीं मिला. साल 2024 में छोटे बेटे ने भी आत्महत्या कर ली.

दोनों बेटों की मौत के बाद ज्ञानेश्वर मालेकर ने खुद खेती संभाली. खेत में बोरवेल मौजूद थी, इसलिए बिजली कनेक्शन की जरूरत पहले जैसी ही बनी रही. परिवार के अनुसार, उन्होंने इसके लिए कई बार अधिकारियों से संपर्क किया. आसपास के खेतों में सिंचाई की सुविधा थी. अपने खेत के लिए भी बिजली कनेक्शन मिलने की उम्मीद बनी रही. दूसरी तरफ खेती का खर्च बढ़ता गया. परिवार का कहना है कि लगातार परेशानी के बीच ज्ञानेश्वर मालेकर ने भी आत्महत्या कर ली.

छह साल में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत से गांव में शोक है. अब परिवार में नीमा मालेकर बची हैं. पति के साथ दोनों बेटों को खोने के बाद उनके सामने जीवन चलाने की मुश्किल है.

नीमा मालेकर ने कहा कि इस साल करीब 50 दिनों तक बारिश नहीं हुई. इससे कपास और सोयाबीन की फसल सूख गई. परिवार के पास जो पैसा था, वह खेती में लगाया जा चुका था. खेत में बोरवेल होने के बावजूद बिजली कनेक्शन नहीं था. नीमा ने बिजली कनेक्शन नहीं मिलने की समस्या को परिवार की स्थिति से जोड़ते हुए विद्युत वितरण कंपनी को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है.

नीमा के भाई विष्णु चौधरी ने भी बिजली वितरण कंपनी की लापरवाही को परिवार की परेशानी की वजह बताया. फिलहाल नीमा अपने भाई के साथ कासोला गांव में रह रही हैं.

ग्राम पंचायत के सरपंच रवि चौधरी ने कहा कि यवतमाल के किसान पिछले कई वर्षों से प्राकृतिक संकट का सामना कर रहे हैं. कभी ज्यादा बारिश तो कभी सूखे की स्थिति बनती है. कपास और सोयाबीन जैसी फसलों को भी नुकसान हो रहा है. ऐसे में किसानों के लिए सिंचाई की सुविधा अहम हो जाती है. इस परिवार के मामले ने बिजली कनेक्शन जैसी बुनियादी जरूरत को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं.  

Original Source
https://www.aajtak.in/india/maharashtra/story/maharashtra-yavatmal-farmer-family-suicide-electricity-connection-issue-ntc-dhrj-rpti-2662114-2026-10-05?utm_source=rss
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