'रातों-रात 90% कर्मचारियों को निकाला' इनोडाटा कंपनी में बड़ी छंटनी, जानें क्यों हुआ ऐसा?

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आईटी और आउटसोर्सिंग की दुनिया से एक बहुत बड़ी और दिल दहला देने वाली खबर सामने आ रही है. आउटसोर्सिंग फर्म 'इनोडाटा इंडिया' ने कथित तौर पर अपने 90 फीसदी कर्मचारियों को रातों-रात नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है.

आईटी और आउटसोर्सिंग की दुनिया से एक बहुत बड़ी और दिल दहला देने वाली खबर सामने आ रही है. आउटसोर्सिंग फर्म 'इनोडाटा इंडिया' ने कथित तौर पर अपने 90 फीसदी कर्मचारियों को रातों-रात नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है.

छंटनी का शिकार हुए एम्प्लॉइज का दावा है कि कंपनी का एक बहुत बड़ा काम सोशल मीडिया जाइंट मेटा से जुड़ा हुआ था. मेटा द्वारा अपना काम अचानक वापस खींचे जाने के बाद कंपनी के पास कर्मचारियों के लिए पर्याप्त असाइनमेंट नहीं बचे, जिसके बाद सामूहिक छंटनी का यह बड़ा कदम उठाया गया. आइए जानते हैं इनोडाटा में हुई इस अचानक छंटनी और कर्मचारियों के दर्द की पूरी दास्तान. 

1000 से 1200 में से 90% स्टाफ बाहर?

कंपनी से निकाले गए एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इनोडाटा इंडिया में लगभग 1,000 से 1,200 लोग काम कर रहे थे. दावा किया जा रहा है कि इनमें से लगभग 90% कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है. प्रभावित कर्मचारियों को सेपरेशन पैकेज के तौर पर 4 महीने की सैलरी दिए जाने की बात कही जा रही है. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस रकम में नोटिस पे, सेवरेंस पैकेज या अन्य बकाया राशि शामिल है या नहीं.

(नोट: इंडिया टुडे इन दावों, मेटा के कनेक्शन या छंटनी के सटीक आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है. कंपनी से प्रतिक्रिया मांगी गई है.)

छंटनी की प्रक्रिया इतनी अचानक और क्रूर थी कि कर्मचारियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला. रेडिट पर एक प्रोसेस एनालिस्ट ने बताया कि एम्प्लॉइज को अचानक एक इमरजेंसी एचआर मीटिंग में बुलाया गया. मीटिंग में बताया गया कि मुख्य क्लाइंट (मेटा) ने काम कम कर दिया है, इसलिए उनकी भूमिकाएं खत्म हो गई हैं.

रेडिट यूजर का दावा है कि मीटिंग के दौरान कर्मचारियों को म्यूट कर दिया गया ताकि वे कोई सवाल न पूछ सकें. मीटिंग खत्म होने के एक घंटे के भीतर उनके माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस और वर्क सिस्टम्स का एक्सेस बंद कर दिया गया. एक अन्य कर्मचारी ने बताया कि जब ऑफिस के सिस्टम बंद हो गए, तो हम कर्मचारियों को आपस में जुड़ने के लिए व्हाट्सएप का सहारा लेना पड़ा. किसी ने ग्रुप का लिंक बनाकर शेयर किया और देखते ही देखते सैकड़ों घबराए, हताश और बेबस कर्मचारी उस ग्रुप से जुड़ने लगे.

कंपनी में एआई एनालिस्ट के रूप में काम करने वाले एक अन्य यूजर के मुताबिक, इनोडाटा का यह प्रोजेक्ट सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका और फिलीपींस में भी चल रहा था और तीनों देशों में बड़े पैमाने पर छंटनी की गई है. फिलीपींस टीम को जूम कॉल के जरिए निकाले जाने की अफवाहें जैसे ही भारत में फैलीं, कर्मचारियों के होश उड़ गए.

कुछ एम्प्लॉइज ने पाया कि उनकी पे-स्लिप पर आखिरी कार्य दिवस (लास्ट वर्किंग डे) 26 अक्टूबर दर्ज कर दिया गया था और बाद में उनके पर्सनल ईमेल पर टर्मिनेशन लेटर भेज दिए गए.

सेटलमेंट के सिलसिले में ऑफिस पहुंचे एक कर्मचारी का कहना है कि उसने सहकर्मियों के बीच बातचीत में सुना है कि आने वाले हफ्तों में छंटनी का अगला दौर (Further Layoffs) भी आ सकता है. हालांकि, यह पूरी तरह से ऑफिस में सुनी गई बातों पर आधारित अटकलें हैं.

इंडिया टुडे ने मेटा द्वारा काम वापस लेने, छंटनी के पैमाने और सेवरेंस पैकेज को लेकर इनोडाटा और मेटा दोनों से आधिकारिक रुख जानने के लिए संपर्क किया है. कंपनियों का जवाब आते ही खबर को अपडेट किया जाएगा.

Original Source
https://www.aajtak.in/education/career/story/innodata-india-layoffs-meta-project-cancellation-employees-terminated-edmm-dskc-2684344-2026-10-30?utm_source=rss
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