AI की आंधी में कॉलेज की डिग्री का क्या होगा? IISc प्रोफेसर ने उठाया बड़ा सवाल

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेजी से ऐसे काम कर रहा है, जिनके लिए पहले पढ़े-लिखे लोगों को नौकरी पर रखा जाता था. ऐसे में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) बेंगलुरु के प्रोफेसर ने छात्रों के सामने एक बड़ा सवाल रखा है कि अगर कंपनियां आने वाले 5 से 10 साल में कैंपस से कम भर्ती करेंगी...

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेजी से ऐसे काम कर रहा है, जिनके लिए पहले पढ़े-लिखे लोगों को नौकरी पर रखा जाता था. ऐसे में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) बेंगलुरु के प्रोफेसर ने छात्रों के सामने एक बड़ा सवाल रखा है कि अगर कंपनियां आने वाले 5 से 10 साल में कैंपस से कम भर्ती करेंगी, तो यूनिवर्सिटी की पढ़ाई का असली मकसद क्या होगा?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI सिर्फ टेक्नोलॉजी की दुनिया नहीं बदल रहा है. इसका असर पढ़ाई और नौकरी पर भी पड़ने लगा है. आज एआई कोड लिख सकता है, डेटा का विश्लेषण कर सकता है, रिपोर्ट तैयार कर सकता है और रिसर्च में मदद कर सकता है. यानी ऐसे कई काम, जिन्हें करने के लिए पहले इंसानों की जरूरत होती थी, अब AI की मदद से कम समय में किए जा सकते हैं.

इसी बदलाव को देखते हुए IISc Bengaluru के प्रोफेसर डॉ. प्रथोष ने एक अहम सवाल उठाया है. उन्होंने अपने छात्रों से एक ऐसी स्थिति के बारे में सोचने को कहा, जहां आने वाले 5 से 10 साल में कंपनियां कॉलेज और यूनिवर्सिटी से पहले की तरह बड़ी संख्या में छात्रों को नौकरी देने के लिए न आएं.

भारत में कॉलेज की पढ़ाई और नौकरी का रिश्ता काफी सीधा रहा है. छात्र कई साल पढ़ाई करते हैं, डिग्री लेते हैं और फिर कैंपस प्लेसमेंट के जरिए नौकरी पाने की कोशिश करते हैं.

अगर किसी कंपनी में AI की मदद से 100 लोगों का काम 50 लोग कर पा रहे हैं, तो कंपनी को पहले जितने नए एम्पलाइज की जरूरत नहीं होगी. इसका असर सबसे पहले एंट्री लेवल की नौकरियों पर पड़ सकता है, जहां कंपनियां आमतौर पर फ्रेशर्स को मौका देती हैं.

यहीं से छात्रों के लिए सबसे बड़ा सवाल पैदा होता है. अगर कॉलेज से निकलने के बाद नौकरी ही कम मिलने लगी, तो सिर्फ डिग्री लेने के लिए इतनी लंबी पढ़ाई करने का फायदा क्या होगा?

यह मामला सिर्फ कैंपस प्लेसमेंट तक सीमित नहीं है. एआई ने यह भी बदल दिया है कि पढ़ाई के दौरान छात्रों को क्या सीखना चाहिए. पहले किसी जानकारी को ढूंढना और उसे समझना एक बड़ी स्किल मानी जाती थी. अब AI कुछ सेकंड में जानकारी जुटाकर उसे आसान भाषा में समझा सकता है.

इसलिए आने वाले समय में सिर्फ जानकारी याद रखना शायद उतना जरूरी नहीं होगा. ज्यादा जरूरी यह होगा कि छात्र सही सवाल पूछ सके, एआई के जवाब को जांच सके और किसी समस्या का सही सॉल्यूशन निकाल सके.

क्या डिग्री की वैल्यू खत्म हो जाएगी?

अभी ऐसा कहना सही नहीं होगा. AI तेजी से बदल रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यूनिवर्सिटी या डिग्री खत्म हो जाएगी. बल्कि संभव है कि यूनिवर्सिटी का काम करने का तरीका बदल जाए.

कॉलेज सिर्फ नौकरी पाने की जगह न रहकर रिसर्च, प्रयोग, नई टेक्नोलॉजी सीखने और असली समस्याओं पर काम करने की जगह बन सकते हैं. खासकर टॉप यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्रों को लैब, प्रोफेसर, रिसर्च प्रोजेक्ट और दूसरे छात्रों के साथ काम करने का मौका मिलता है. इन चीजों की वैल्यू एआई के दौर में भी बनी रह सकती है.

AI के आने के बाद शायद सवाल यह नहीं रहेगा कि “मेरे पास कौन सी डिग्री है?” सवाल यह होगा कि “मैं उस डिग्री के साथ ऐसा क्या कर सकता हूं, जो एआई अकेले नहीं कर सकता?”

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि 5 से 10 साल में कैंपस प्लेसमेंट खत्म हो जाएंगे. लेकिन AI जिस तेजी से पढ़ाई और नौकरियों को बदल रहा है, उससे इतना साफ है कि छात्रों और यूनिवर्सिटी दोनों को बदलते समय के साथ खुद को तैयार करना होगा.

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https://www.aajtak.in/technology/tech-news/story/ai-impact-on-college-degree-campus-placements-iisc-professor-prym-dskc-2642014-2026-09-13?utm_source=rss
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