राज्यसभा चुनाव: सपा का तीसरा उम्मीदवार कल करेगा नामांकन, BJP से होगी कड़ी टक्कर
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर सियासी पारा चरम पर है. समाजवादी पार्टी ने एक बड़ा दांव चलते हुए मैदान में अपना तीसरा प्रत्याशी भी उतारने की पूरी तैयारी कर ली है.
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सपा का ये तीसरा उम्मीदवार मंगलवार को विधान भवन पहुंचकर अपना नॉमिनेशन दाखिल करेगा. बता दें कि 16 अक्टूबर 2026 को होने वाले इस अहम चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने का मंगलवार यानी कल आखिरी दिन है.
बीजेपी ने पहले ही अपने 8 उम्मीदवारों के नाम तय कर दिए हैं जिसके बाद, अब सपा के इस तीसरे प्रत्याशी के उतरने से मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है.
समाजवादी पार्टी का दावा है कि तीसरे उम्मीदवार के नामांकन के लिए जरूरी 10 विधायकों के हस्ताक्षर बतौर प्रस्तावक जुटाए जा चुके हैं. इसके साथ ही जल्द ही उम्मीदवार के नाम का ऐलान भी कर दिया जाएगा.
समाजवादी पार्टी इससे पहले ही अपने दो उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर चुकी है. इनमें पार्टी के वरिष्ठ राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव शामिल हैं, जो छठी बार उच्च सदन (राज्यसभा) जाने की तैयारी में हैं. उनके अलावा रिलायंस ग्रुप के वरिष्ठ अधिकारी धनराज परिमल नथवानी को भी मैदान में उतारा गया है.
इन दोनों नेताओं ने पिछले 30 सितंबर को सपा प्रमुख अखिलेश यादव की मौजूदगी में अपना-अपना नॉमिनेशन दाखिल कर दिया था.
उत्तर प्रदेश की इन 10 राज्यसभा सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल इसी साल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है. वर्तमान में उत्तर प्रदेश विधानसभा की प्रभावी संख्या 397 विधायक है. इस गणित के हिसाब से हर उम्मीदवार को जीत हासिल करने के लिए कम से कम 37 वोटों की जरूरत होगी.
संख्या बल की बात करें तो, बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के पास लगभग 285 से 290 से ज्यादा विधायक हैं. इस मजबूत स्थिति के दम पर एनडीए अपनी 7 सीटें तो बेहद आसानी से जीत लेगा, लेकिन आठवीं सीट जीतने के लिए उसे करीब 6 अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ेगी.
दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी के पास अपने करीब 100 से 101 विधायक हैं. इसमें चायल से विधायक पूजा पाल रिकॉर्ड में सपा के खाते में ही गिनी जा रही हैं, हालांकि उनकी नजदीकियां बीजेपी से जगजाहिर रही हैं. इसके अलावा सपा को कांग्रेस के 2 विधायकों का भी समर्थन हासिल है.
इस आंकड़े के बल पर सपा अपनी दो सीटें तो आराम से जीत जाएगी, लेकिन तीसरे उम्मीदवार की नैया पार लगाने के लिए उसे 10 से 12 या उससे ज्यादा अतिरिक्त वोटों यानी क्रॉस वोटिंग की सख्त जरूरत होगी. अब देखना ये दिलचस्प होगा कि क्या सपा का ये तीसरा दांव कामयाब होता है या बाजी एनडीए के हाथ लगती है.


