ज्ञानेश कुमार को हटाना इतना आसान नहीं! नोटिस से राष्ट्रपति के आदेश तक, ऐसा है CEC को हटाने का पूरा प्रोसेस

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर देश भर में उठ रहे सवालों के बीच अब विपक्षी पार्टियां उन्हें हटाने के लिए तीसरी बार महाभियोग लाने की तैयारी कर रही हैं. कई विपक्षी दल इसके लिए हाथ मिला चुके हैं. संसद के प्रस्तावित विशेष सत्र से पहले विपक्ष लोकसभा और राज्यसभा में नोटिस देने...

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर देश भर में उठ रहे सवालों के बीच अब विपक्षी पार्टियां उन्हें हटाने के लिए तीसरी बार महाभियोग लाने की तैयारी कर रही हैं. कई विपक्षी दल इसके लिए हाथ मिला चुके हैं. संसद के प्रस्तावित विशेष सत्र से पहले विपक्ष लोकसभा और राज्यसभा में नोटिस देने की तैयारी कर रहा है.

बता दें, हाल ही में, एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के आने के बाद से विपक्ष CEC ज्ञानेश कुमार पर हमलावर है और उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है. ऐसे में, अगर विपक्ष ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लोकसभा और राज्यसभा में नोटिस देता है, तो आगे की प्रक्रिया क्या होगी, यह कितनी लंबी और पेचीदा होगी. साथ ही, इसके लिए संवैधानिक प्रावधान क्या है, इसपर थोड़ा प्रकाश डालते हैं. 

संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत CEC को भी सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह हटाया जा सकता है. जबकि अन्य दोनों निर्वाचन आयुक्तों को CEC की सिफारिश पर ही राष्ट्रपति हटा सकते हैं. CEC को उनके पद से हटाने के लिए लोकसभा में स्पीकर या राज्यसभा में सभापति को सबसे पहले नोटिस दिया जाता है. उस प्रस्ताव पर लोकसभा में 100 और राज्यसभा में 50 सांसदों के दस्तखत जरूरी हैं. इसके बाद लोकसभा में अध्यक्ष और राज्यसभा में सभापति यह तय करते हैं कि उस नोटिस को स्वीकार करना है या नहीं. फैक्ट्स के आधार पर नोटिस स्वीकार होने के बाद आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यों की एक कमेटी बनाई जाती है.  

अगर लोकसभा और राज्यसभा में एक ही दिन नोटिस दिया गया हो, तो दोनों सदनों में इसके स्वीकार होने के बाद ही समिति बनाई जाती है. अन्यथा, जिस सदन में पहले प्रस्ताव आता है वहां कमेटी बनाई जाती है. लोकसभा के अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति मिलकर कमेटी बनाते हैं. इसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) या सुप्रीम कोर्ट के जज, किसी हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश और एक प्रतिष्ठित कानून विशेषज्ञ होते हैं. 

आरोपों को सही मानने पर कमेटी अपनी विस्तृत और तार्किक रिपोर्ट सदन में पेश करती है. इसके बाद उस प्रस्ताव पर चर्चा होती है.  चर्चा के दौरान जरूरत पड़ने पर आरोपी आयुक्त को सदन के दरवाजे पर बुलाकर भी सदस्य पूछताछ कर सकते हैं. इसके बाद बकायदा मतदान होता है. प्रस्ताव दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से पारित होने पर राष्ट्रपति इस पर अंतिम मंजूरी देते हैं. हालांकि भारत में अब तक किसी CEC को इस प्रक्रिया के जरिए उनके पद से हटाया नहीं गया है. 

बता दें, CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए मार्च 2026 में लोकसभा और राज्यसभा में 130 और 63 सांसदों के दस्तखत वाले नोटिस दिए गए थे. इस नोटिस को 6 अप्रैल को खारिज कर दिया गया था. इसके बाद राज्यसभा में 73 सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक और नोटिस दिया गया, जो लंबित है. अब विपक्ष तीसरे नोटिस की तैयारी चल रही है. गौरतलब है, INDIA ब्लॉक की 30 सितंबर को एक बैठक भी होने वाली है. बैठक में इस पर चर्चा हो सकती है. 

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https://www.aajtak.in/india/news/story/cec-gyanesh-kumar-impeachment-opposition-parliament-process-ntc-acwi-rptc-2654063-2026-09-26?utm_source=rss
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