Choti Diwali 2026: एक पर्व, दो नाम! आखिर क्यों छोटी दिवाली को कहते हैं नरक चतुर्दशी? जानें इससे जुड़ी रोचक कथा
Choti Diwali 2026: दिवाली से एक दिन पहले छोटी दिवाली का पर्व मनाया जाता है. इसे नरक चतुर्दशी और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है. साल 2026 में छोटी दीवाली आज यानी 7 नवंबर, शनिवार को मनाई जा रही है. हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व है. मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राक्षस नरकासुर का अंत करके हजारों कन्याओं को उसकी कैद से आजाद कराया था. इसी खुशी में छोटी दिवाली मनाने की परंपरा शुरू हुई. इस दिन सुबह स्नान करने और शाम को दीपक जलाने का विशेष महत्व बताया गया है. आइए जानते हैं इस पर्व से जुड़ी पौराणिक कथा और पूजा के शुभ समय के बारे में.
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में नरकासुर नाम का एक शक्तिशाली असुर था. उसे भौमासुर के नाम से भी जाना जाता था. उसके अत्याचारों से धरती और स्वर्ग के लोग परेशान थे. उसने कई राजाओं और देवताओं को भी संकट में डाल दिया था. इतना ही नहीं, उसने करीब 16 हजार कन्याओं को बंदी बना लिया था. कहा जाता है कि नरकासुर को वरदान मिला था कि उसकी मृत्यु किसी स्त्री के हाथों ही होगी. उसके बढ़ते अत्याचारों से परेशान होकर देवराज इंद्र भगवान श्रीकृष्ण के पास पहुंचे और उनसे मदद मांगी. इंद्र की बात सुनकर श्रीकृष्ण ने नरकासुर का अंत करने का फैसला किया.
नरकासुर का वध करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ युद्ध के लिए निकले. इस युद्ध में सत्यभामा ने भी उनका पूरा साथ दिया. मान्यता है कि सत्यभामा के हाथों ही नरकासुर का अंत हुआ. इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने उसकी कैद में मौजूद 16 हजार से अधिक कन्याओं को मुक्त कराया. कहा जाता है कि नरकासुर का वध कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को हुआ था. इसी घटना की याद में हर साल इस दिन नरक चतुर्दशी मनाई जाती है. इसे छोटी दिवाली भी कहते हैं. यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है.
मान्यता है कि छोटी दिवाली पर सुबह स्नान और शाम को दीपक जलाना शुभ होता है. इस दिन लोग घर के बाहर दीये जलाते हैं और परिवार की सुख-शांति व खुशहाली की कामना करते हैं.


