CJP का आज से 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' कैंपेन, अभिजीत दिपके ने सरकार को घेरा
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) आज से महाराष्ट्र के गढ़चिरौली से 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' कैंपेन शुरू करने वाली है. बुधवार को CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने यह ऐलान किया. उनका आरोप है कि पिछले 80 सालों से भारत में आदिवासी स्कूलों के साथ सरकार ने लापरवाही बरती है.
CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि इस कैंपेन का मकसद आदिवासी छात्रों की समस्याओं और उनके साथ होने वाले भेदभाव की ओर सरकार का ध्यान खींचना है. बता दें, एक महीने पहले CJP ने 'स्कूल ठीक करो' नाम से देशव्यापी अभियान भी शुरू किया था. इस अभियान का मकसद ग्रामीण और शहरी सरकारी स्कूलों की हालत सुधारना था.
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अभिजीत दिपके ने कहा, "पिछले 80 सालों में सभी सरकारों ने देश के आदिवासी इलाकों के स्कूलों को नजरअंदाज किया है. इसलिए हम गुरुवार से महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से आदिवासी स्कूल ठीक करो अभियान शुरू कर रहे हैं."
बता दें, गढ़चिरौली पूर्वी महाराष्ट्र के विदर्भ इलाके में एक आदिवासी-बहुल ज़िला है. दिपके ने बताया कि इस अभियान के तहत CJP के प्रतिनिधि आदिवासी स्कूलों का दौरा करने वाले हैं और वहां की बुनियादी सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर का जायजा करेंगे.
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दिपके ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सरकार से आदिवासी इलाकों के छात्रों पर ध्यान देने की अपील की. उन्होंने कहा कि सरकार को आदिवासी इलाकों के छात्रों पर भी ध्यान देना चाहिए, उनमें बहुत क्षमता है.
CJP संस्थापक ने कहा, "सरकार को आदिवासी समुदाय को प्राथमिकता देनी होगी. वे आबादी का एक बड़ा हिस्सा है. सिर्फ 7.8% GDP ग्रोथ रेट का दावा करना या 5 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनने की बात करना काफ़ी नहीं है."
उन्होंने सभी सरकारों से आदिवासी स्कूलों और देश के ग्रामीण इलाकों पर ध्यान देने की अपील की है. दिपके का दावा है कि महाराष्ट्र में पिछले दो सालों में 590 से ज़्यादा आदिवासी छात्रों की मौत हुई है.
दिपके का आरोप है कि कई आदिवासी छात्रों की मौत सांप के काटने के कारण होती है लेकिन सरकार की ओर से इन मौतों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आती. उनका कहना है कि अगर पुणे या मुंबई में ये मौतें होती तो देश में हंगामा मच जाता. दिपके का कहना है कि मध्य प्रदेश के आदिवासी इलाके बालाघाट में पिछले दो महीने में 30 से ज्यादा आदिवासी छात्रों की मौत हुई है. उनका दावा है कि छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और उत्तराखंड में भी आदिवासी छात्रों की मौतें हुईं.
उनके मुताबिक, मारे गए आदिवासी छात्रों के परिवारों को सही मुआवजा भी नहीं मिलता है. दिपके ने एकलव्य मॉडर्न रेजिडेंशियल स्कूलों पर भी चिंता जताई और आरोप लगाया कि इन 720 स्कूलों में से 477 स्कूल काम नहीं कर रहे हैं.
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CJP संस्थापक ने कहा, "उच्च शिक्षा में आदिवासी छात्रों का एनरोलमेंट रेट सिर्फ़ 22.8% है और अनुसूचित जनजाति (ST) के सिर्फ़ 130 आवेदकों को IIT में दाखिला मिला." दिपके ने सवाल उठाया है कि IIT में दाखिले और फैकल्टी की संख्या इतनी कम क्यों है. उनका कहना है कि यह आदिवासी छात्रों के साथ भेदभाव है.

