अमेरिकी दबाव के बाद G7 देशों में सहमति, इमरजेंसी रिजर्व से 10 करोड़ बैरल तेल-डीजल जारी होगा
G7 देशों ने एक बड़ा फैसला लिया है. इन देशों ने अपने आपातकालीन भंडार से 10 करोड़ बैरल डीजल और कच्चा तेल जारी करने पर सहमति जताई है. साथ ही सभी देशों ने वादा किया है कि वे ऊर्जा के निर्यात पर कोई रोक नहीं लगाएंगे. यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बाद लिया गया है. ट्रंप नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले ईंधन की बढ़ती कीमतों को कम करना चाहते हैं. यह भी साफ नहीं है कि नए समझौते का कितना तेल मार्च वाले समझौते के बचे हुए हिस्से से आएगा.
अमेरिका ने यूरोपीय संघ पर दबाव बनाने की मुहिम चलाई थी. उसकी मांग थी कि यूरोपीय संघ अपने आपातकालीन डीजल भंडार से तेल निकाले. ट्रंप प्रशासन ने चेतावनी दी थी कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो अमेरिका डीजल के निर्यात पर रोक लगा सकता है. ऐसी रोक का यूरोप पर बड़ा असर पड़ सकता है. वजह यह है कि यूरोप अब अमेरिकी डीजल पर पहले से ज्यादा निर्भर हो गया है. अगर सप्लाई घटी तो यूरोपीय संघ को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.
यह पहला मौका नहीं है जब तेल भंडार खोले गए हैं. ईरान युद्ध के बाद मार्च में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी यानी IEA की अगुवाई में 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने का समझौता हुआ था. यह अब तक की सबसे बड़ी आपातकालीन रिलीज थी.
यह भी पढ़ें: तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर, 10 हजार सैनिक मिडिल ईस्ट भेज रहे ट्रंप, क्या ईरान पर हमले का है प्लान?
G7 ने अपने साझा बयान में कहा कि जो वादे पहले ही पूरे हो चुके हैं, उन्हें ध्यान में रखते हुए IEA के जरिए 10 करोड़ बैरल तेल की समन्वित रिलीज की जाएगी. यानी सभी देश मिलकर साथ तालमेल से यह कदम उठाएंगे.
अभी एक बात साफ नहीं है. IEA के कार्यकारी निदेशक फतिह बिरोल ने इसी हफ्ते कहा था कि सदस्य देश 40 करोड़ बैरल वाले समझौते का करीब दो तिहाई हिस्सा जारी कर चुके हैं. इसका मतलब है कि मार्च के समझौते का करीब एक तिहाई तेल अभी जारी होना बाकी है.
G7 का यह कदम ईंधन की कीमतों को काबू में रखने की कोशिश से जुड़ा है. ट्रंप के लिए यह फैसला अहम है क्योंकि चुनाव करीब हैं.