Kartik Amawasya 2026: जब भगवान को बांधने के लिए छोटी पड़ी रस्सी, कहानी कार्तिक अमावस्या की

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Kartik Amawasya 2026: त्रेता युग में दीपावली का संबंध भगवान श्रीराम के चौदह वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटने से जुड़ा है.  वहीं द्वापर युग में इसी पर्व से भगवान श्रीकृष्ण की यशोदा-दामोदर लीला का विशेष संबंध है.  यह वह प्रसंग है, जिसमें संपूर्ण ब्रह्मांड को अपने भीतर समाहित करन...

Kartik Amawasya 2026: त्रेता युग में दीपावली का संबंध भगवान श्रीराम के चौदह वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटने से जुड़ा है.  वहीं द्वापर युग में इसी पर्व से भगवान श्रीकृष्ण की यशोदा-दामोदर लीला का विशेष संबंध है.  यह वह प्रसंग है, जिसमें संपूर्ण ब्रह्मांड को अपने भीतर समाहित करने वाले भगवान श्रीकृष्ण माता यशोदा के प्रेम और वात्सल्य के वश में होकर ओखल से बंध गए थे.  भगवान को बांधने वाली रस्सी छोटी पड़ गई, लेकिन माता के प्रेम और समर्पण के आगे उनकी लीला ने एक नया अर्थ प्रकट किया.  इसी दिव्य प्रसंग के स्मरण में कार्तिक मास में प्रतिदिन यशोदा-दामोदर के दर्शन और दीपदान की परंपरा निभाई जाती है. 

कार्तिक मास भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति, राधारानी के प्रेम और दामोदर लीला के स्मरण का विशेष समय है.  इस महीने मंदिरों में भगवान के दामोदर स्वरूप का पूजन किया जाता है.  भक्त दीप प्रज्ज्वलित कर भगवान के सामने अपनी श्रद्धा निवेदित करते हैं.  इस अवधि में श्रद्धापूर्वक किया गया दीपदान और हरिनाम संकीर्तन भक्त को भगवान के प्रति प्रेम, समर्पण और आत्मीयता का भाव सिखाता है. 

रस्सियों से नहीं, माता के प्रेम से बंधे थे भगवान श्रीमद्भागवत महापुराण में वर्णित दामोदर लीला के अनुसार, बालकृष्ण की शरारतों से परेशान होकर माता यशोदा ने उन्हें बांधने का प्रयास किया.  वह जितनी भी रस्सियां जोड़तीं, हर बार दो अंगुल छोटी पड़ जातीं.  अंततः माता की थकान, स्नेह और निष्कपट प्रयास देखकर भगवान स्वयं बंधने के लिए तैयार हो गए.  इसी प्रसंग में भगवान का नाम दामोदर पड़ा.  'दाम' का अर्थ रस्सी और 'उदर' का अर्थ पेट है.  इस लीला का संदेश है कि भगवान को केवल शक्ति या साधना से नहीं, बल्कि निष्कपट प्रेम और भक्ति से भी प्राप्त किया जा सकता है. 

कार्तिक मास में कृष्ण की लीलाओं का विशेष स्मरण कार्तिक मास में भगवान श्रीकृष्ण की अनेक लीलाओं का स्मरण किया जाता है.  गोपाष्टमी पर गौचारण लीला से जुड़ी परंपराओं के अंतर्गत गौमाता का पूजन किया जाता है.  गोवर्धन पूजा में गिरिराज धरण की लीला का स्मरण होता है, जिसमें भगवान ने ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत धारण किया था.  इसी प्रकार इंद्र के अभिमान का दमन, कालिया नाग का मर्दन और ब्रज की महारास लीला भी कृष्णभक्ति की परंपरा में विशेष स्थान रखती हैं. 

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास में मनाया जाता है, जबकि उनके नामकरण कार्तिक माह में हुआ और बाल लीलाओं का कार्तिक माह में विशेष महत्व है. 

Original Source
https://www.aajtak.in/religion/news/story/kartik-amavasya-2026-damodar-leela-deepdaan-krishna-tvisz-dskc-2684330-2026-10-30?utm_source=rss
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