करोड़ों का फ्लैट, समंदर का खूबसूरत नजारा और बीच में LED विज्ञापन! मुंबई में क्यों मचा बवाल?

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लेखक सलमान रुश्दी ने अपने उपन्यास 'The Ground Beneath Her Feet', में लिखा है, ''समुद्र को छूते ही इंसान दुनिया के दूसरे छोर से भी जुड़ जाता है. '' मुंबई के मशहूर जुहू बीच पर जाना भी कुछ ऐसा ही खूबसूरत अनुभव है. यहां लोग समुद्र की लहरों, ठंडी हवा और डूबते सूरज को देखने के लिए पहुं...

लेखक सलमान रुश्दी ने अपने उपन्यास 'The Ground Beneath Her Feet', में लिखा है, ''समुद्र को छूते ही इंसान दुनिया के दूसरे छोर से भी जुड़ जाता है. '' मुंबई के मशहूर जुहू बीच पर जाना भी कुछ ऐसा ही खूबसूरत अनुभव है. यहां लोग समुद्र की लहरों, ठंडी हवा और डूबते सूरज को देखने के लिए पहुंचते हैं, लेकिन अब समुद्र किनारे बैठकर सूर्यास्त देखने का यह अनुभव बदल सकता है. लोगों को समुद्र में तैरते हुए एलईडी स्क्रीन पर विज्ञापन दिखाई दे सकते हैं.

यह उन लोगों के लिए भी चिंता की बात है, जिन्होंने मुंबई के समुद्र किनारे करोड़ों रुपये खर्च करके घर खरीदे हैं. कई लोगों ने अपनी पूरी जमा-पूंजी लगाकर और लंबे समय तक ईएमआई चुकाने की जिम्मेदारी लेकर ऐसे घर खरीदे. इन घरों को खरीदने की एक बड़ी वजह समुद्र का खुला और खूबसूरत नजारा भी था, लेकिन अब इस नजारे के बीच तैरते हुए विज्ञापन दिखाई दे सकते हैं.

मुंबई के समुद्र तट शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से कुछ समय के लिए राहत देते हैं. यहां हर उम्र और हर वर्ग के लोग सुकून के पल बिताने आते हैं. समुद्र के किनारे किसी तरह का भेदभाव नहीं होता. हर किसी को यहां खुला नजारा, ठंडी हवा और समुद्र की लहरों का आनंद मिलता है. लेकिन अब समुद्र को भी विज्ञापन दिखाने की जगह बनाने की तैयारी है. 

इससे शहर में पहले से ही कम होते जा रहे प्राकृतिक नजारों पर विज्ञापनों का असर पड़ सकता है. महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड (MMB) ने मुंबई के प्रमुख समुद्र तटों और समुद्र किनारे के इलाकों में तैरते हुए विज्ञापन लगाने की अनुमति दी है. इस फैसले का विरोध हो रहा है. समुद्र किनारे रहने वाले लोग ही नहीं, बल्कि वहां घूमने और सुकून के कुछ पल बिताने आने वाले मुंबईकर भी इस फैसले से नाराज हैं.

महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड (MMB) ने मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में विज्ञापन लगाने के लिए टेंडर जारी किए हैं. इन विज्ञापनों के लिए जिन जगहों को चुना गया है, उनमें जुहू बीच, लोटस जेटी, वर्ली में बांद्रा-वर्ली सी लिंक जेटी, कार्टर रोड और मार्वे जेटी शामिल हैं.

मुंबई मिरर की 31 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, MMB ने सितंबर में कुल 19 टेंडर जारी किए थे, इनमें 10 टेंडर पानी में तैरने वाले विज्ञापन लगाने के लिए थे, जबकि नौ रोशनी वाले होर्डिंग लगाने के लिए जारी किए गए थे. रिपोर्ट के अनुसार, इन टेंडर में मुंबई, नवी मुंबई और आसपास के इलाकों में विज्ञापन लगाने की योजना है. इसके तहत पानी में तैरने वाले 15 विज्ञापन बार्ज और 14 दो तरफा होर्डिंग लगाने का प्रस्ताव है. एक विज्ञापन का आकार करीब 40×40 फीट होगा.

हालांकि, इस फैसले को लेकर लोगों के विरोध के बाद महाराष्ट्र के बंदरगाह मंत्री और MMB के अध्यक्ष नीतेश राणे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सफाई दी. उन्होंने कहा कि होर्डिंग के टेंडर को लेकर लोगों के बीच गलतफहमी है. प्रस्तावित चार तैरते होर्डिंग में से दो पहले से ही सी लिंक के पास मौजूद हैं और केवल दो नए होर्डिंग लगाने की योजना है.

लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि समुद्र किनारे कितने भी विज्ञापन लगाए जाएं, एक एलईडी होर्डिंग भी समुद्र के खूबसूरत नजारे को खराब करने के लिए काफी है. नागरिक संगठनों और पर्यावरण से जुड़े समूहों ने भी सवाल उठाए हैं कि इन विज्ञापनों से होने वाली कमाई क्या समुद्र और पर्यावरण को होने वाले नुकसान की भरपाई कर सकती है?

मुंबई में समुद्र किनारे बने छोटे-छोटे फ्लैट भी करोड़ों रुपये में बिकते हैं. कई फ्लैट तो सिर्फ 400 वर्ग फीट के होते हैं, लेकिन उनकी कीमत बहुत ज्यादा होती है. इसकी सबसे बड़ी वजह है वहां से दिखने वाला समुद्र का खुला नजारा. अरब सागर का दूर तक फैला पानी और हर शाम समुद्र में डूबता सूरज मुंबई के दूसरे इलाकों में आसानी से देखने को नहीं मिलता. यही वजह है कि लोग समुद्र के किनारे घर खरीदने के लिए बड़ी रकम खर्च करते हैं.

सूरज डूबने के बाद भी समुद्र का नजारा बेहद खास होता है. काले समुद्र के ऊपर धीरे-धीरे आगे बढ़ते बादल और दूर दिखाई देने वाली कुछ रोशनियां एक अलग ही अनुभव देती हैं. रात के समय समुद्र में ज्यादा कृत्रिम रोशनी नहीं होती. कभी-कभी तटरक्षक बल के जहाजों की रोशनी ही दूर से दिखाई देती है. मरीन ड्राइव, वर्ली, दादर, सांताक्रूज, जुहू और मुंबई के उत्तरी हिस्से के समुद्र तटों पर जाने वाले लोग इस सुकून को अच्छी तरह समझते हैं.

बारिश के मौसम में भी समुद्र का नजारा अलग होता है. दूर आसमान में बादल इकट्ठा होते हैं और धीरे-धीरे शहर की तरफ बढ़ते हैं, यह भी मुंबई के खूबसूरत नजारों में से एक है. वर्सोवा की बेव्यू बिल्डिंग में रहने वाले निकुंज खोसला ने इंडिया टुडे डिजिटल से कहा कि समुद्र में बन रहा वर्सोवा लिंक ब्रिज उन्हें परेशान नहीं करता, क्योंकि यह शहर की जरूरत से जुड़ा प्रोजेक्ट है. शहर बढ़ रहा है और लोगों को बेहतर सड़क संपर्क की जरूरत है. पीक आवर्स में वर्सोवा से बांद्रा पहुंचने में एक घंटे से ज्यादा समय लग जाता है. इसकी वजह जुहू तारा रोड और वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर लगने वाला जाम है.

हालांकि, उनका कहना है कि समुद्र में तैरते विज्ञापन देखने में बहुत खराब लगेंगे. खोसला ने बताया कि वर्सोवा में उनकी बिल्डिंग के पास एक ऐसे 3BHK फ्लैट की कीमत करीब 18 करोड़ रुपये तक हो सकती है, जहां से समुद्र का खुला नजारा दिखाई देता है, उन्होंने कहा, ''सोचिए, कोई व्यक्ति समुद्र का नजारा देखने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करके घर खरीदे और उसकी बालकनी से समुद्र की जगह विज्ञापन दिखाई दें, यह बहुत खराब होगा.''

बांद्रा के पाली हिल इलाके में रहने वाले एक व्यक्ति ने भी अपनी चिंता जाहिर की. उन्होंने बताया कि उनके घर से समुद्र और बैंडस्टैंड का खुला नजारा दिखाई देता है. समुद्र में नए सी लिंक के लिए बनाए जा रहे पिलर उन्हें परेशान नहीं करते, क्योंकि इससे शहर में आने-जाने की सुविधा बेहतर होगी. उनका मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी से उनके घर की कीमत भी बढ़ सकती है, लेकिन समुद्र के इतने करीब रहने के बावजूद अगर सामने एलईडी विज्ञापन लगा दिए गए तो परेशानी होगी.

उन्होंने कहा, ''अगर यहां एलईडी विज्ञापन लगाए गए तो रात में सोने के लिए भी मुझे पर्दे बंद करने पड़ेंगे. यह बहुत खराब नजारा होगा.'' खोसला ने बताया कि वह पहले जुहू के जेवीपीडी स्कीम इलाके में रहते थे. उन्होंने एक उदाहरण देकर समझाया कि मुंबई में घर खरीदने वालों के लिए खुला नजारा कितना मायने रखता है. उन्होंने कहा कि पहले उनका परिवार जुहू सर्कल के पास रुस्तमजी एलिमेंट्स नाम की एक लग्जरी हाउसिंग सोसायटी में घर खरीदने की योजना बना रहा था. उस समय बिल्डिंग के सामने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) की खाली जमीन थी. वहां से काफी खुला और हरा-भरा नजारा दिखाई देता था.

लेकिन बाद में लिंक रोड पर मेट्रो का काम शुरू हो गया, इससे बिल्डिंग के सामने का खुला नजारा काफी हद तक प्रभावित हुआ. खोसला के मुताबिक, जब वे घर देखने गए तो उन्हें पता चला कि चौथी मंजिल तक के कुछ फ्लैट अभी भी नहीं बिके थे. इसकी एक वजह मेट्रो प्रोजेक्ट के कारण सामने की खाली जमीन का नजारा बंद होना था.

इससे पता चलता है कि मुंबई में घर खरीदने वालों के लिए खिड़की या बालकनी से दिखने वाला खुला नजारा कितना महत्वपूर्ण है. शहर की ज्यादातर इमारतों में लोगों को खिड़की से सामने वाली दूसरी बिल्डिंग ही दिखाई देती है. आदित्य ठाकरे ने मुख्यमंत्री फडणवीस को पत्र लिखकर योजना रोकने की मांग की है.

शिवसेना (UBT) के नेता आदित्य ठाकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर समुद्र में तैरते विज्ञापन लगाने की योजना रोकने की मांग की है. X पर साझा किए गए पत्र में ठाकरे ने इस पूरी व्यवस्था को ठेकेदार के साथ किया गया खराब सौदा बताया, उन्होंने कहा कि यह फैसला गैर-जिम्मेदाराना है और इससे मुंबई की खूबसूरती खराब होगी.

उनका कहना है कि प्रदूषण की वजह से शहर के कई हिस्सों से समुद्र पहले ही ठीक से दिखाई नहीं देता. ऐसे में समुद्र में विज्ञापन लगाने से बचे हुए खुले नजारे भी खत्म हो जाएंगे. उन्होंने लिखा कि जमीन पर बढ़ते प्रदूषण से लोग पहले ही परेशान हैं. अब समुद्र में भी विज्ञापन लगाकर लोगों के सामने उन्हें दिखाने की तैयारी की जा रही है.

ठाकरे ने एलईडी होर्डिंग के लिए नियम बनाने की भी मांग की. उनका कहना है कि रात में इनकी रोशनी कितनी तेज होगी और कितने होर्डिंग लगाए जा सकेंगे, इसकी सीमा तय होनी चाहिए.

फिल्म निर्माता जोया अख्तर ने भी इस फैसले पर चिंता जताई है, उन्होंने मुंबई को पहले से ही ऐसा शहर बताया है, जहां हर तरफ शोर और भागदौड़ है. उनका कहना है कि शहर के लोगों को सुकून की जरूरत है, न कि सूर्यास्त के समय विज्ञापनों की. उन्होंने सुझाव दिया कि विज्ञापन केवल तय जगहों पर ही लगाए जाने चाहिए और ऐसे फैसलों से पहले आम लोगों की राय भी ली जानी चाहिए.

पर्यावरण के लिए काम करने वाली संस्था आवाज फाउंडेशन की सुमायरा अब्दुल अली ने भी समुद्र में तैरते विज्ञापनों से होने वाले नुकसान पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा, ''हमारा समुद्र कोई विज्ञापन दिखाने वाली स्क्रीन नहीं है. समुद्र में ऐसे होर्डिंग नहीं लगाए जाने चाहिए. रोशनी से होने वाला प्रदूषण भी ध्वनि प्रदूषण जितना खतरनाक हो सकता है. अब यह समस्या समुद्र तक पहुंच रही है.

उन्होंने आगे कहा कि इन एलईडी स्क्रीन की तेज रोशनी समुद्र में करीब 40 मीटर नीचे तक पहुंच सकती है. इससे समुद्री जीवों की जिंदगी प्रभावित हो सकती है. इसका असर समुद्र में रहने वाले दूसरे जीवों और पूरी खाद्य श्रृंखला पर भी पड़ सकता है. वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों का भी कहना है कि समुद्र में तेज रोशनी वाले विज्ञापन लगाने से समुद्री जीवों के प्राकृतिक वातावरण पर असर पड़ सकता है.

इसका असर शहर के खुले इलाकों पर भी पड़ा है, खाली जमीन पर इमारतें बन गईं, जंगलों और मैंग्रोव की जगह निर्माण कार्य होने लगे और सह्याद्रि की पहाड़ियों से पत्थर निकालकर इमारतें बनाने का काम किया गया. 2000 के दशक से मुंबई के समुद्र किनारे भी कई जगह नए पिलर और ढांचे बनाए गए हैं. कहीं लोगों के घूमने के लिए रास्ते बनाए गए तो कहीं समुद्री पुल तैयार किए गए.

Original Source
https://www.aajtak.in/business/real-estate/story/mumbai-floating-led-advertisements-sea-beaches-residents-protest-ntcpsc-rptc-2686272-2026-11-02?utm_source=rss
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