प्यार, पंचायत चुनाव और सोशल इंजीनियरिंग... Love मैरिज करके आई बहू ने हरा दिए 11 उम्मीदवार, बन गई गांव की सरपंच
राजस्थान के पंचायत चुनाव में आरक्षण ने एक गांव की सामाजिक तस्वीर ही बदल दी. जिस गांव में लंबे समय से गुर्जर समाज के सरपंच चुने जाते रहे, वहां इस बार सरपंच पद अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए आरक्षित हो गया. इसके बाद गांव में ऐसी चुनावी रणनीति बनी, जिसकी चर्चा अब करौली ही नहीं, बल्कि प्रदेशभर में हो रही है.
गुर्जर बाहुल्य गुडला गांव में गुर्जर समाज ने धानका समाज की नैना धानका को सरपंच पद का उम्मीदवार बनाया. चुनाव में गुर्जर और धानका समाज की संयुक्त भागीदारी का परिणाम यह रहा कि नैना ने 2107 वोट हासिल कर शानदार जीत दर्ज की.
इस चुनाव की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि मैदान में कुल 11 उम्मीदवार थे, लेकिन नैना धानका ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 1864 वोटों के बड़े अंतर से पीछे छोड़ दिया. जीत के बाद गांव में जुलूस निकालकर खुशी मनाई गई.
यह पूरा मामला करौली जिले की सादौली ग्राम पंचायत के गुडला गांव का है. पंचायत चुनाव में सरपंच पद ST वर्ग के लिए आरक्षित होने के बाद गांव के सामने अपने पसंदीदा उम्मीदवार को लेकर नई चुनौती खड़ी हो गई.
गांव में लंबे समय से गुर्जर समाज के सरपंच चुने जाते रहे हैं. ऐसे में आरक्षण की घोषणा के बाद ग्रामीणों ने बैठक आयोजित कर चुनावी रणनीति पर चर्चा की. बैठक में राहुल गुर्जर का नाम सामने आया. दरअसल, राहुल गुर्जर ने नैना धानका से इंटरकास्ट मैरिज की थी, जो अनुसूचित जनजाति समुदाय से आती हैं. इससे पहले समाज ने इस प्रेम विवाह का अंदरखाने में विरोध तक किया था, लेकिन इस जोड़े ने जैसे तैसे शादी रचा ली थी.
अब उन्हीं ग्रामीणों और समाज के लोगों ने गांव के चुनावी समीकरण को ध्यान में रखते हुए बहू नैना धानका को सरपंच पद का उम्मीदवार बनाने का निर्णय लिया. गुर्जर और धानका समाज के लोगों ने मिलकर चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी संभाली.
चुनाव परिणाम आया तो नैना धानका को 2107 वोट मिले, जबकि दूसरे स्थान पर रहे हरिओम मीणा को महज 243 वोट प्राप्त हुए. इस तरह नैना ने 1864 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की.
नैना धानका एक युवा और शिक्षित महिला हैं. उनके पति राहुल गुर्जर हैं. ग्रामीणों के अनुसार, नैना गांव के विकास के लिए काम करने की इच्छा रखती हैं.
गुडला गांव का यह चुनाव कई मायनों में चर्चा का विषय बन गया है. आरक्षण के बाद बदले चुनावी समीकरण आरक्षित एसटी वर्ग के लिए होने के बाद भी यह सीट पुनः गुर्जर समाज के पास ही रह गई जिससे यह पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है. हालांकि, चुनाव जीतने के बाद अब नैना धानका के सामने गांव के विकास, ग्रामीण समस्याओं के समाधान और पंचायत की जिम्मेदारियों को निभाने की चुनौती होगी.
फिलहाल गुडला गांव का यह चुनाव एक बार फिर चर्चा में है कि पंचायत चुनाव में आरक्षण, सामाजिक समीकरण और ग्रामीणों की सामूहिक रणनीति किस तरह चुनावी तस्वीर बदल सकती है.


