ऑनलाइन शॉपिंग में नहीं चलेगा फर्जी डिस्काउंट का खेल, सरकार ला रही नया नियम
बहुत से लोगों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बड़े-बड़े डिस्काउंट का वादा किया जाता है, जिसमें 80 परसेंट तक का ऑफ तक दिया जाता है. आखिर में जाकर पता चलता है कि वह डील उतनी सस्ती नहीं है, जितना उसको प्रमोट किया. अब सरकार नए नियम लागू करने जा रही है, जिसके बाद ईकॉमर्स कंपनियों के भ्रामक ऑफर पर लगाम लगेगी.
नए नियमों के तहत सरकार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कीमतों, डिस्काउंट, सर्च रिजल्ट, रिपोर्ट/कंप्लेंट और प्रोडक्ट की जानकारी को लेकर कंपनियों की जवाबदेही बढ़ाने जा रही है.
पीटीआई की रिपोर्ट में बताया है कि सरकार ने कंज्यूमर प्रोटेक्शन (ई-कॉमर्स) रूल्स, 2020 में संसोधन किए हैं. ये नियम 'कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019' के तहत बनाए गए थे.
रिपोर्ट के मुताबिक, संशोधित नियमों का उद्देश्य ई-कॉमर्स कारोबार में ट्रांस्पेरेंसी लाना है. साथ ही कस्टमर के हितों को मजबूत करना है.
नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे. इसके बाद ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म को अट्रैक्टिव डील्स दिखाने के साथ कुछ जरूरी डिटेल्स को भी मेंशन करना पड़ेगा.
ऑनलाइन शॉपिंग में सबसे बड़ा बदलाव कीमत और डिस्काउंट को लेकर किया जाता है. किसी भी सामान पर प्राइस कट या डिस्काउंट दिखाते समय ई-कॉमर्स कंपनी को घटी हुई कीमत के साथ उसकी प्रायर प्राइस भी बतानी होगी.
प्रायर प्राइस, असल में वह कीमत होती है, जिसको किसी प्रोडक्ट को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर 30 दिनों के दौरान सेल किया गया है. ऐसे में किसी भी प्रोडक्ट की पुरानी कीमत बढ़ाकर उस पर बड़ी छूट दिखाने की कोशिश नाकाम साबित होगी और कस्टमर आसानी से समझ पाएंगे कि उनको कितनी सेविंग होगी.
सरकार ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के सर्च सिस्टम को लेकर भी नियम सख्त किए हैं. कंपनियां ऐसे तरीके से सर्च रिजल्ट में बदलाव नहीं कर सकेंगी, जिससे ग्राहक गुमराह हो या किसी सर्च क्वेरी के नतीजों से प्रभावित हो.
साथ ही स्पॉन्सर्ड लिस्टिंग की पहचान भी साफ होगी और प्रमुख तरीके से करनी होगी. ग्राहक को यह समझ आना चाहिए कि कौन-सा प्रोडक्ट सामान्य सर्च रिजल्ट है और कौन-सा पेड प्रमोशन के जरिए ऊपर दिखाया जा रहा है.
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कस्टमर को किसी खास विकल्प की तरफ धकेलने या उसकी पसंद को प्रभावित करने वाले डार्क पैटर्न पर भी सख्ती की जा रही है.
ई-कॉमर्स कंपनियों को 'डार्क पैटर्न्स, 2023' से जुड़ी गाइडलाइंस का पालन करना पड़ेगा. इतना ही नहीं, कंपनियों को हर साल अपना सेल्फ ऑडिट करना होगा. इसके बाद उन्हें एक कम्प्लायंस सर्टिफिकेट भी दिखाना होगा, जिससे यह पता चल सके कि प्लेटफॉर्म तय नियमों का पालन कर रहा है.
सरकार ने कंज्यूमर शिकायतों के सिस्टम को भी मजबूत करने की तैयारी की है. हर ई-कॉमर्स यूनिट को 'नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन' की कन्वर्जेंस प्रोसेस का पार्टनर बनना होगा.
सरकार के मुताबिक, 2025 में नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन को कुल 17,71,622 शिकायतें मिलीं. इनमें 5,11,196 शिकायतें, यानी करीब 29 फीसदी, ई-कॉमर्स सेक्टर से जुड़ी थीं.
अब अगर कोई ग्राहक शिकायत करता है तो उसे उसकी शिकायत की वही कॉपी देनी होगी, जिसे ग्रीवेंस ऑफिसर ने रिकॉर्ड किया है. इससे ग्राहक के पास अपनी शिकायत का आधिकारिक रिकॉर्ड रहेगा.
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ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सामान बेचने वाली कंपनियों को भी ग्राहक के सामने ज्यादा जानकारी रखनी होगी. प्रोडक्ट के मामले में Best Before या Use Before जैसी जानकारी आदि को देना होगा. साथ ही रिटर्न, रिफंड, वारंटी, डिलीवरी और पेमेंट से जुड़ी कंडिशन के बारे में साफ-साफ बताना होगा. अगर सामान इंपोर्टेड है तो उसके इंपोर्टर की जानकारी और Country of Origin भी बताना जरूरी होगा


