भारत ने ट्रॉफी ठुकराई, नकवी बने सबसे बड़े विनर! महिला एशिया कप विवाद का खेल समझिए
महिला एशिया कप के फाइनल में भारत ने श्रीलंका को 72 रनों से हराकर खिताब अपने नाम कर लिया. लेकिन मैच खत्म होते ही कहानी क्रिकेट से निकलकर भारत-पाकिस्तान के रिश्तों और राजनीति तक पहुंच गई. ट्रॉफी प्रेजेंटेशन के लिए मंच पर मौजूद एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) अध्यक्ष मोहसिन नकवी से भारतीय टीम ने ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया.
दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान फाइनल में था ही नहीं. फिर भी उसका एक सबसे ताकतवर चेहरा पूरे घटनाक्रम के केंद्र में आ गया.
मोहसिन नकवी इस समय एसीसी अध्यक्ष, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के चेयरमैन और पाकिस्तान के गृह मंत्री हैं. यानी जिस शख्स के हाथों भारतीय टीम ने ट्रॉफी लेने से इनकार किया, वह सिर्फ क्रिकेट प्रशासक नहीं, बल्कि पाकिस्तान सरकार का भी बेहद अहम चेहरा है.
पाकिस्तान में कितनी चलती है नकवी की?
मोहसिन नकवी पाकिस्तान में ताकतवर माने जाते हैं. उन्हें सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के करीबी लोगों में गिना जाता है. यानी पाकिस्तान की सत्ता के शीर्ष गलियारों में उनकी पहुंच और प्रभाव दोनों मजबूत माने जाते हैं. लेकिन सत्ता के करीब होना और जनता के बीच लोकप्रिय होना दो अलग बातें हैं.
पाकिस्तान क्रिकेट में नकवी के कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठे हैं. टीम के प्रदर्शन से लेकर चयन और खिलाड़ियों से जुड़े विवादों तक पीसीबी लगातार चर्चा में रहा है. हालिया इंग्लैंड दौरे में सात खिलाड़ियों को बाहर किए जाने और कोचिंग स्टाफ में बदलाव ने भी पाकिस्तान क्रिकेट की अंदरूनी उथल-पुथल को सामने रखा.
यानी जिस क्रिकेट बोर्ड की कमान नकवी के हाथ में है, वहां सवाल लगातार बने हुए हैं. टीम के प्रदर्शन से लेकर चयन और फैसलों तक उठ रही उंगलियों का सियासी और प्रशासनिक दबाव आखिरकार पीसीबी चेयरमैन के तौर पर नकवी पर भी आता है.
नकवी की मुश्किलें सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं हैं. पाकिस्तान की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर उनके हालिया बयानों ने भी राजनीतिक बहस छेड़ दी है. उन्होंने मौजूदा सिस्टम में बदलाव और नए प्रशासनिक यूनिट बनाने की जरूरत पर जोर दिया. इस पर पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी समेत कई राजनीतिक हलकों में विरोध के सुर उठे और सवाल भी खड़े हुए.
नकवी ने बाद में साफ किया कि नए प्रशासनिक यूनिट लोगों की इच्छा और राजनीतिक सहमति से ही बनाए जाने चाहिए.
यानी एक तरफ क्रिकेट का संकट, दूसरी तरफ राजनीतिक विवाद. ऐसे माहौल में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट से जुड़ा कोई भी विवाद नकवी के लिए सिर्फ क्रिकेट का मामला नहीं रह जाता. और यहीं से महिला एशिया कप की ट्रॉफी कंट्रोवर्सी दिलचस्प हो जाती है.
When Mohsin Naqvi's presence was confirmed, we knew trophy fiasco was going to happen again. The humiliation of Mohsin Naqvi & Pakistan is completely justified. Forget protocol and designation. Anywhere and everywhere, Pakistan and any entity SHOULD be humiliated consistently pic.twitter.com/vZv3FA7tZv
यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ. 2025 पुरुष एशिया कप के फाइनल के बाद भी भारतीय टीम ने नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार किया था. यानी इस बार संभावित टकराव का उदाहरण पहले से मौजूद था.
और इस बार बीसीसीआई ने टूर्नामेंट से पहले ही एसीसी को अपना रुख बता दिया था कि अगर नकवी ट्रॉफी देने के लिए मौजूद रहे, तो भारतीय टीम उनसे ट्रॉफी स्वीकार नहीं करेगी. बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने बाद में इसे सोच-समझकर लिया गया फैसला बताया.
फिर भी नकवी ACC अध्यक्ष की हैसियत से प्रेजेंटेशन में मौजूद रहे. नतीजा सामने था- भारतीय टीम मंच पर ट्रॉफी लेने नहीं आई.
यहां सवाल यह नहीं कि नकवी को भारतीय टीम का रुख पता था या नहीं. सवाल यह है कि जब 2025 में ऐसा हो चुका था और इस बार भी बीसीसीआई ने पहले ही अपना स्टैंड साफ कर दिया था, तब इस टकराव का राजनीतिक असर क्या हो सकता था?
भारत ने अपना संदेश साफ कर दिया- नकवी के हाथों ट्रॉफी स्वीकार नहीं करनी है. लेकिन राजनीति में किसी घटना का असर सिर्फ इस बात से तय नहीं होता कि घटना हुई क्या. यह भी मायने रखता है कि उसे किस तरह पेश किया जाता है.
भारत में यह तस्वीर नकवी की किरकिरी के तौर पर देखी जा सकती है. लेकिन पाकिस्तान में उनके समर्थकों के लिए यही घटना अलग कहानी बन सकती है- 'भारत ने विरोध किया, लेकिन नकवी अपनी जगह डटे रहे.'
यही वह बिंदु है जहां क्रिकेट का विवाद राजनीतिक नैरेटिव में बदल जाता है. और यह सिर्फ कल्पना नहीं है कि पाकिस्तान में इस घटना की अलग व्याख्या हो सकती है.
🚨 NO TROPHY FROM MOHSIN NAQVI! 🇮🇳 India Women chose not to collect the Asia Cup trophy from Pakistan’s Mohsin Naqvi. Smriti Mandhana simply turned around and headed back to the dugout! 🔥 WELL DONE GIRLS! 🙌 pic.twitter.com/XwnW5eW8nW
नकवी के सामने इस समय पाकिस्तान क्रिकेट को लेकर सवाल हैं. ऐसे में भारत-पाकिस्तान का कोई भी टकराव बहस की दिशा बदल सकता है. चर्चा अचानक यह नहीं रह जाती कि पाकिस्तान क्रिकेट की हालत कैसी है, चयन में क्या हो रहा है या टीम का प्रदर्शन कैसा है.
चर्चा बन जाती है- भारत ने नकवी के हाथों ट्रॉफी क्यों नहीं ली? नकवी ने क्या किया? यही राजनीति का खेल है. भारत में जो घटनाक्रम नकवी के खिलाफ इस्तेमाल हो सकता है, वही पाकिस्तान में उनके समर्थकों के लिए 'भारत के सामने नहीं झुकने' का नैरेटिव बन सकता है.
हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि नकवी ने जानबूझकर इसी राजनीतिक फायदे के लिए यह पूरा घटनाक्रम रचा. इसका कोई ठोस सार्वजनिक प्रमाण नहीं है. लेकिन इतना जरूर है कि विवाद ने उन्हें वह मंच दे दिया, जिस पर वह भारत-पाकिस्तान टकराव के एक प्रमुख चेहरे के तौर पर फिर नजर आए.
भारत ने फाइनल जीता. श्रीलंका को हराकर खिताब अपने नाम किया. लेकिन ट्रॉफी प्रेजेंटेशन विवाद में बदल गया और भारतीय टीम ने नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया. यानी भारत के लिए उपलब्धि थी- एशिया कप का खिताब.
नकवी के लिए इस घटनाक्रम से निकली सबसे बड़ी चीज थी- चर्चा. और राजनीति में चर्चा अपने आप में ताकत होती है.
भारत ने ट्रॉफी ठुकराई, नकवी ट्रॉफी नहीं दे पाए... लेकिन विवाद ने उन्हें वह चीज जरूर दे दी जिसकी राजनीति में सबसे ज्यादा कीमत होती है- चर्चा और अपना नैरेटिव गढ़ने का मौका.
मैदान पर जवाब बिल्कुल साफ है- भारत. लेकिन ट्रॉफी प्रेजेंटेशन की तस्वीर में कहानी थोड़ी अलग है. भारत ने नकवी के हाथों ट्रॉफी लेने से इनकार कर अपना स्टैंड साफ कर दिया. नकवी ट्रॉफी नहीं दे पाए. लेकिन वह इस पूरे विवाद के केंद्र में जरूर आ गए.
एक ही तस्वीर के दो मतलब निकल सकते हैं. भारत के लिए- नकवी के हाथों ट्रॉफी लेने से इनकार. नकवी के समर्थकों के लिए- भारत ने विरोध किया, लेकिन नकवी अपनी जगह डटे रहे. यही इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा ट्विस्ट है.
भारत फाइनल जीत गया, लेकिन ट्रॉफी प्रेजेंटेशन विवाद में बदल गया. नकवी ट्रॉफी नहीं दे पाए, लेकिन अपने साथ एक 'विनिंग नैरेटिव' जरूर ले गए. इसलिए महिला एशिया कप की इस कंट्रोवर्सी में सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि ट्रॉफी किसने उठाई.
सवाल यह है- भारत ने ट्रॉफी ठुकराई, लेकिन इस विवाद का सबसे बड़ा फायदा किसने उठा लिया? फिलहाल, राजनीतिक नजरिए से देखें तो जवाब मोहसिन नकवी के पक्ष में जाता दिखता है.


