हूतियों से बातचीत के बाद अमेरिका का यू-टर्न, सऊदी की मदद से बनाई दूरी?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओमान में अमेरिकी अधिकारियों और ईरान समर्थित हूती नेताओं के बीच कथित बातचीत के बाद अमेरिका ने यमन में सीधे सैन्य हस्तक्षेप न करने का फैसला किया है. मस्कट में हुई इस बैठक में हूतियों ने वाशिंगटन को भरोसा दिलाया कि वे अमेरिका के साथ हुए युद्धविराम को कायम रखेंगे और लाल सागर में अमेरिकी जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे.
रॉयटर्स के मुताबिक, तीन सूत्रों ने बताया कि बैठक मस्कट में अमेरिकी दूतावास में हुई थी, जबकि दो अन्य सूत्रों ने कहा कि ओमान ने बातचीत में मदद की थी.
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब हूतियों ने यमन के लाल सागर के तट के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया है. उन्होंने सऊदी-समर्थित सेनाओं को पीछे धकेलते हुए बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास रणनीतिक इलाकों पर नियंत्रण कर लिया है. इस समूह ने सऊदी क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल हमले भी तेज किए हैं, जिनमें मक्का की ओर किए गए हमले भी शामिल हैं. रियाद का कहना है कि मक्का की ओर आया एक ड्रोन पवित्र शहर के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में घुसने से पहले ही रोक दिया गया था.
रिपोर्ट के अनुसार, हूतियों ने अमेरिकी अधिकारियों से कहा कि 2025 का युद्धविराम अभी भी लागू है. और उनका लाल सागर में अमेरिकी जहाजों पर हमला करने का कोई इरादा नहीं है. रॉयटर्स के एक सूत्र ने बताया कि समूह ने संकेत दिया है कि वह इज़राइली या कमर्शियल जहाजों को निशाना नहीं बनाएगा, और सऊदी-संबद्ध जहाजों के मामले में अलग तरह से व्यवहार किया जाएगा.
ट्रंप की ओर से चेतावनी दी गई है कि हूती विद्रोहियों का आगे बढ़ना अहम शिपिंग रूट के लिए खतरा बन सकता है. हालांकि उन्होंने सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए अमेरिकी सेना भेजने का कोई वादा नहीं किया है.
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोमवार को पुष्टि की कि वाशिंगटन हुतियों के सीधे संपर्क में है, लेकिन उन्होंने बातचीत की कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी है. यमन में अमेरिका के पूर्व डिप्टी एंबेसडर नबील खौरी ने इस स्थिति को वाशिंगटन और हुतियों के बीच "एक तरह की अनकही सहमति" करार दिया है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के पूर्व डिप्टी एंबेसडर नबील खौरी का कहना है कि हुती अमेरिकी प्रशासन को यह भरोसा दिला रहे हैं कि लाल सागर में अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय नौवहन (नेविगेशन) पर कई प्रभाव नहीं पड़ेगा. बल्कि सिर्फ सऊदी जहाजों या सऊदी तेल ले जाने वाले जहाजों को ही खतरा है.
वॉशिंगटन के दूर रहने के फैसले से सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों को रोकने का दबाव बढ़ गया है. फिर चाहे वे इसके लिए बातचीत का सहारा लें, या क्षेत्रीय गठबंधन का. सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने पिछले हफ़्ते अमेरिकी सैन्य मदद के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से संपर्क किया था. हालांकि, वॉशिंगटन ने संकेत दिया कि वह सीधे तौर पर इसमें शामिल नहीं होगा.
हुतियों ने एक दशक से भी ज़्यादा समय से सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन के खिलाफ लड़ाई लड़ी है. हाल के वर्षों में संघर्ष विराम के कारण तनाव कुछ कम हुआ था, लेकिन जुलाई में इस समूह द्वारा सऊदी जहाजों की आवाजाही रोकने (नाकेबंदी) के बाद एक बार फिर से संघर्ष भड़क उठा.
अमेरिका ने मार्च 2025 में हुतियों को "विदेशी आतंकवादी संगठन" घोषित किया था. बाद में वॉशिंगटन ने समूह के साथ सीधे बातचीत की और अमेरिका के दो महीने के बमबारी अभियान के बाद मई 2025 में संघर्ष विराम को लेकर सहमति बनी.
सऊदी लड़ाकू विमानों के यमन पर बमबारी करने और ईरान-समर्थित हूती लड़ाकों द्वारा सऊदी अरब की ओर ड्रोन और मिसाइलें दागने के बाद से यह तनाव और बढ़ गया है. हूती विद्रोहियों ने यानबू पर भी नए हमले करने का दावा किया है.
इस ग्रुप ने कहा कि उसने मारिब के पास सऊदी F-15 लड़ाकू विमान को मार गिराया और यानबू में अरामको की एक सुविधा को निशाना बनाया, जो लाल सागर का एक प्रमुख बंदरगाह है.
इस बढ़ते तनाव का असर क्षेत्रीय ऊर्जा बाज़ारों पर भी पड़ रहा है. बमबारी की घटना के बाद सऊदी की मुख्य ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन बंद रहने के कारण तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहीं.
