जिनपिंग को ट्रंप का गजब ऑफर, बोले- ताइवान को बेचते हैं हथियार... चीन भी खरीदेगा क्या?
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग हाल ही में तीन दिन के अमेरिका दौरे पर गए थे. इस दौरान उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अहम बैठक की. अब चीन में अमेरिकी राजदूत डेविड परड्यू ने खुलासा किया है कि इस दौरान ट्रंप ने जिनपिंग को अमेरिका से हथियार खरीदने का ऑफर दिया.
'फॉक्स न्यूज संडे' पर शैनेन ब्रिम के साथ बातचीत करते हुए राजदूत डेविड परड्यू ने बताया कि ट्रंप ने चीन के सामने ये अनोखा प्रस्ताव रखा. इस दौरान उन्होंने मजाकिया अंदाज में जिनपिंग से पूछा कि क्या वो खुद अमेरिकी हथियार खरीदना चाहेंगे?
परड्यू ने बताया कि व्हाइट हाउस में हुई हाई लेवल मीटिंग में ट्रंप ने ताइवान को हथियारों की बिक्री को दुनिया भर में होने वाली आम रक्षा डीलों जैसा बताया.
चीन को खुश करने की कोशिश कर रहा अमेरिका?
इंटरव्यू के दौरान जब एंकर ने रिपब्लिकन और डेमोक्रेट सांसदों के उन सवालों का जिक्र किया जिसमें उन्होंने ताइवान को हथियारों की डिलीवरी में देरी पर सवाल उठाए गए थे. इस दौरान ये भी पूछा गया था कि क्या अमेरिका चीन को खुश करने के लिए ऐसा कर रहा है, तो परड्यू ने इन आरोपों को खारिज कर दिया.
उन्होंने कहा कि ट्रंप ताइवान के मुद्दे पर बेहद मजबूत रुख रखते हैं और उन्होंने ताइवान को पहले भी पर्याप्त हथियार बेचे हैं.
कानून के हिसाब से अमेरिका ताइवान को अपनी रक्षा करने के साधन मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध है. ताइवान को औपचारिक देश न मानते हुए भी अमेरिका उसका सबसे बड़ा अनौपचारिक समर्थक और हथियार प्रदाता रहा है. हालांकि, चीन लगातार अमेरिका से इन हथियारों की बिक्री रोकने की मांग करता रहा है.
पिछले साल मई में चीन में हुई ट्रंप और जिनपिंग की मुलाकात के बाद अमेरिका ने 14 अरब डॉलर के रिकॉर्ड हथियार पैकेज को रोक दिया था. ट्रंप ने इन्हें चीन के साथ एक बेहतरीन 'मोलभाव का जरिया' बताया था.
चीनी मीडिया के मुताबिक, पिछले हफ्ते व्हाइट हाउस में हुई बातचीत के दौरान शी जिनपिंग ने एक बार फिर ट्रंप से ताइवान की स्वतंत्रता का विरोध करने की अपील की थी. अब ट्रंप न जिनपिंग को ही हथियार खरीदने का प्रस्ताव दे डाला है.
यह भी पढ़ें: 'हम जंग बेचने नहीं आए...', ट्रंप ने धमकाया लेकिन अराघची ने बताया ईरान का मकसद हालांकि, अगर सच में ऐसी कोई डील होती है, तो ये दशकों पुरानी अमेरिकी नीति को पूरी तरह उलट सकती है. इससे अमेरिकी सैन्य तकनीक संभावित दुश्मन के हाथ लगने का रिस्क भी पैदा हो सकता है.
