इंडिया ब्लॉक की बैठक में हरेंद्र मलिक और नदवी को भेजकर क्या संदेश दे रहे हैं अखिलेश?
कांग्रेस ने बुधवार को इंडिया ब्लॉक की अहम बैठक बुलाई है. इस बैठक से कई नेताओं ने दूरी बनाई है. सपा मुखिया अखिलेश यादव भी इस बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं और न ही किसी अपने किसी बड़े चेहरे को भेज रहे हैं. उनका ये कदम राजनीति गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है. अटकलें लगाई जा रही हैं कि अपने इस कदम से आखिर अखिलेश यादव किस तरह का संदेश दे रहे हैं.
माना जा रहा है कि अखिलेश यादव ने कांग्रेस से नाराजगी जताने का ये तरीका चुना है. गठबंधन और सीट शेयरिंग को लेकर इमरान मसूद और कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के बयानों से अखिलेश यादव नाराज हैं और इसे कांग्रेस का दबाव बनाने की रणनीति मान रहे हैं.
पार्टी सूत्रों के मुताबिक अखिलेश यादव ने जानबूझकर आज का दिन रामगोपाल यादव के नामांकन के लिए चुन लिया है ताकि उनके बाद रामगोपाल यादव भी इस मीटिंग में न जा सकें. रामगोपाल यादव ही नहीं धर्मेंद्र यादव या डिंपल यादव में से भी किसी को इस मीटिंग में नहीं भेजा जा रहा जबकि दोनों में से कोई राम गोपाल यादव कोई प्रस्ताव नहीं है. साफ है अखिलेश यादव ने अपनी नुमाइंदगी से खुद को अलग कर लिया है.
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बुधवार को सुबह 11:00 बजे रामगोपाल यादव अपना नामांकन करेंगे, अखिलेश तीन सीटों में से सिर्फ अकेले रामगोपाल यादव का ही नामांकन कराएंगे. अखिलेश यादव चाहते तो अपने तीनों उम्मीदवारों का एक साथ नामांकन करा सकते थे और इस मीटिंग में हिस्सा ले सकते थे या रामगोपाल यादव को भेज सकते थे लेकिन इंडिया ब्लॉक की इस अहम बैठक के दिन उन्होंने सिर्फ एक नामांकन तय किया उधर इसी बहाने पार्टी की तरफ से मुजफ्फरनगर सांसद हरेंद्र मलिक और रामपुर सांसद मोहिबुल्लाह नदवी को बैठक में प्रतिनिधि के तौर पर भेजा है.
ऊपर से कांग्रेस पार्टी इस मामले को बहुत तवज्जो नहीं देना चाहती लेकिन अंदर ही अंदर दोनों पार्टियों के बीच घमासान मचा हुआ है.गठबंधन और सीट शेयरिंग को लेकर जिस तरीके का दबाव अखिलेश यादव पर बनाया जा रहा है अखिलेश उससे बखूबी वाकिफ हैं और कांग्रेस नेताओं के बयानबाजी से नाराज हैं, यही वजह है कि अखिलेश यादव ने बुधवार का दिन रामगोपाल यादव के नामांकन के लिए चुना है ताकि india bloc की मीटिंग से बचा जा सके.

