क्रिकेट से लेकर हॉकी तक... एशियन गेम्स में हुई मेडल की बरसात, देखें भारत के पदकवीरों की पूरी लिस्ट
आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 में भारत ने 85 पदकों के साथ अपने अभियान का शानदार अंत किया. भारत ने 21 गोल्ड, 27 सिल्वर और 37 ब्रॉन्ज मेडल जीते और पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया. भारत से आगे सिर्फ चीन, मेजबान जापान और साउथ कोरिया रहे. यह भारत का एशियन गेम्स इतिहास में दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा. इससे पहले हांगझोउ एशियन गेम्स 2022 में भारत ने रिकॉर्ड 106 पदक जीते थे.
करीब 500 खिलाड़ियों के दल के साथ जापान पहुंचा भारत इस बार भी एशिया की प्रमुख खेल शक्तियों में शामिल रहा. खास बात यह रही कि पदकों की संख्या से ज्यादा चर्चा उन ऐतिहासिक उपलब्धियों की हुई, जो भारतीय खिलाड़ियों ने अलग-अलग खेलों में हासिल कीं.
हॉकी में डबल धमाल भारत के लिए सबसे यादगार पलों में एक मेन्स हॉकी टीम का प्रदर्शन रहा. हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी वाली टीम ने फाइनल में मलेशिया को 5-1 से हराकर लगातार दूसरी बार एशियन गेम्स का गोल्ड जीत लिया. इस जीत के साथ भारत ने लॉस एंजेलिस ओलंपिक (LA 2028) का टिकट भी हासिल कर लिया. फाइनल में हरमनप्रीत ने दो गोल किए, जबकि जुगराज सिंह, हार्दिक सिंह और शिलानंद लाकड़ा ने एक-एक गोल दागे. पूरे टूर्नामेंट में 12 गोल के साथ हरमनप्रीत शीर्ष स्कोरर रहे.यह भी पढ़ें: टीम इंडिया का गोल्डन पंच, फाइनल में मलेशिया को रौंदा, लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 का टिकट भी मिला
महिला हॉकी टीम ने भी लंबे इंतजार को खत्म किया. चीन को 1-0 से हराकर भारतीय महिलाओं ने 44 साल बाद एशियन गेम्स का गोल्ड जीता. इस तरह पहली बार एक ही संस्करण में भारत की पुरुष और महिला हॉकी टीमों ने स्वर्ण पदक अपने नाम किए. महिला हॉकी टीम भी अगले ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने में सफल रही.
क्रिकेट-कबड्डी में भी गोल्ड मेडल डिफेंड भारत ने क्रिकेट के मैदान पर भी अपना दबदबा कायम रखा. मेन्स टीम ने फाइनल में पाकिस्तान को 19 रनों से हराकर लगातार दूसरी बार गोल्ड जीता. फाइनल में अभिषेक शर्मा ने 28 गेंदों पर 61 रन और तिलक वर्मा ने 22 गेंदों पर नाबाद 51 रन बनाकर भारत को 211/6 तक पहुंचाया. पाकिस्तान की ओर से हसन नवाज ने 51 गेंदों पर 96 रनों की शानदार पारी खेली, लेकिन उनकी कोशिश टीम को जीत नहीं दिला सकी. महिला क्रिकेट टीम ने भी श्रीलंका को फाइनल में हराकर अपना खिताब बरकरार रखा.यह भी पढ़ें: गोल्ड जीतने के बाद वैभव सूर्यवंशी ने छुए ICC चेयरमैन जय शाह के पैर, दिल छू लेगा VIDEO
कबड्डी के मैट पर भारत का प्रदर्शन शानदार रहा. इस बार भी भारत की मेन्स और विमेंस कबड्डी टीम्स ने फैन्स को निराश नहीं किया और गोल्ड मेडल डिफेंड किए दोनों ही टीमों की टक्कर फाइनल में ईरान से हुई, जहां वे गोल्ड मेडल जीतने में सफल रहीं.
आर्चरी में आए पांच गोल्ड तीरंदाजी भारत के लिए सबसे सफल खेलों में रहा और पांच गोल्ड उसके खाते में आए.17 साल की कुमकुम अनिल मोहोड ने विमेंस इंडिविजुअल रिकर्व स्पर्धा में स्वर्ण जीतकर इतिहास रचा. वह इस स्पर्धा में एशियन गेम्स गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं. कुमकुम ने अंकिता भकत और कीर्ति शर्मा के साथ विमेंस रिकर्व टीम का गोल्ड भी जीता. व्यक्तिगत जीत के साथ उन्होंने भारत के लिए लॉस एंजेलिस ओलंपिक का कोटा भी हासिल किया.
गोल्फ में प्रणवी शरथ उर्स ने भी इतिहास बनाया. उन्होंने 15-अंडर 265 के स्कोर के साथ गोल्ड मेडल जीता. प्रणवी एशियन गेम्स में यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला गोल्फर बनीं. महिला टीम स्पर्धा में प्रणवी, अदिति अशोक और दीक्षा डागर ने सिल्वर मेडल जीता.
निशानेबाजी में भारत को 15 पदक मिले. नीरू ढांडा ने विमेंस ट्रैप स्पर्धा में गोल्ड जीतकर देश के लिए पहला व्यक्तिगत स्वर्ण हासिल किया, जबकि कमलजीत और सुरुचि सिंह ने मिक्स्ड टीम 10 मीटर एयर पिस्टल में एशियन रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए गोल्ड जीता.
एथलेटिक्स में सबसे ज्यादा मेडल एथलेटिक्स ने भारत को सबसे ज्यादा 24 पदक दिलाए. इस अभियान में कई खिलाड़ियों ने पुराने इंतजार और रिकॉर्ड को खत्म किया. विथ्या रामराज ने विमेंस 400 मीटर हर्डल्स में ब्रॉन्ज जीतने के साथ-साथ 42 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा. मेन्स जैवलिन थ्रो में यशवीर सिंह ने सिल्वर और रोहित यादव ने ब्रॉन्ज जीते. नीरज चोपड़ा चोट के कारण प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सके.यह भी पढ़ें: भारत की जीत के असली हीरो तो शोर्ड मारिन हैं! बिखरी महिला हॉकी टीम को बना दिया चैम्पियन
सावन बरवाल ने 1982 के बाद एशियन गेम्स मैराथन में भारत को पहला पदक दिलाया और राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बनाया. सर्वेश कुशारे ने मेन्स हाई जंप में 56 साल का इंतजार खत्म किया, जबकि बरानिका एलंगोवन एशियन गेम्स में पोल वॉल्ट पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनीं. विमेंस 10,000 मीटर रेस में सीमा कुमारी ने भी 16 साल बाद भारत को पदक दिलाया.
कुश्ती में अमन सहरावत ने पुरुषों के 57 किग्रा वर्ग में गोल्ड जीता. उन्होंने फाइनल में उत्तर कोरिया के विश्व चैम्पियन चोंग सोंग हान को 10-7 से हराया. सुजीत कलकल ने भी स्वर्ण पदक हासिल किया, जबकि अंतिम पंघल ने सिल्वर और दीपक पूनिया ने ब्रॉन्ज जीता. भारत ने कुश्ती में कुल छह पदक हासिल किए.
बॉक्सिंग में लवलीना बोरगोहेन ने गोल्ड जीतकर खास उपलब्धि दर्ज की. वह मैरी कॉम के बाद एशियन गेम्स में बॉक्सिंग गोल्ड जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला बनीं. परवीन हुड्डा और अंकुश पंघल ने भी मुक्केबाजी में गोल्ड मेडल जीत देश का मान बढ़ाया.
इस ऐतिहासिक प्रदर्शन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि कुछ पदक उन खेलों में भी आए, जहां भारत की उतनी पहचान नहीं है. सुचिका तरियाल ने मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में भारत को पहला एशियन गेम्स पदक दिलाया. सॉफ्ट टेनिस में जय मीणा ने सेमीफाइनल में पहुंचकर देश के लिए इस खेल का पहला पदक सुनिश्चित किया. मीराबाई चानू ने महिलाओं के 49 किग्रा वर्ग में सिल्वर जीता. यह एशियन गेम्स में उनका पहला पदक था और 1998 के बाद भारत का वेटलिफ्टिंग में पहला पदक भी रहा.
स्क्वैश में अनाहत सिंह ने महिला सिंगल्स में सिल्वर जीतकर नया इतिहास बनाया. वह इस स्पर्धा में एशियन गेम्स सिल्वर जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं. अभय सिंह भी पुरुष सिंगल्स के फाइनल तक पहुंचे. वुशू में रोशिबिना देवी ने लगातार तीसरे एशियन गेम्स में पदक जीतकर अपनी निरंतरता बरकरार रखी.
एशियन गेम्स 2026 भारत के लिए लॉस एंजेलिस ओलंपिक की तैयारी के लिहाज से भी अहम रहा. तीरंदाजी, हॉकी, सेलिंग, स्क्वैश, सर्फिंग, टेनिस और ट्रायथलॉन में ओलंपिक क्वालिफिकेशन दांव पर था. भारत ने मेन्स-विमेंस हॉकी के अलावा आर्चरी में कंपाउंड मिक्स्ड टीम और विमेंस इंडिविजुअल रिकर्व का कोटा हासिल किया. भारत का सबसे शानदार दिन शुक्रवार (2 अक्टूबर) रहा, जब दल ने 12 पदक जीते, जिनमें छह गोल्ड शामिल थे. इसके बाद शनिवार (3 अक्टूबर) को भी नौ पदक आए.


