इस्तेमाल भी पहले जितना है... फिर क्यों ज्यादा आया बिजली का बिल? ये है कारण

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गर्मी हो या सर्दी, घर में बिजली का इस्तेमाल कम-ज्यादा होता रहता है. लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि आपको लगता है कि इस बार बिजली का इस्तेमाल बिल्कुल पहले जितना ही हुआ है, फिर भी बिल देखकर हैरानी होती है. पिछले महीने जहां 2 हजार रुपये का बिल आया था, वहीं इस बार 3 हजार या उससे ज्याद...

गर्मी हो या सर्दी, घर में बिजली का इस्तेमाल कम-ज्यादा होता रहता है. लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि आपको लगता है कि इस बार बिजली का इस्तेमाल बिल्कुल पहले जितना ही हुआ है, फिर भी बिल देखकर हैरानी होती है. पिछले महीने जहां 2 हजार रुपये का बिल आया था, वहीं इस बार 3 हजार या उससे ज्यादा का बिल पहुंच जाता है. ऐसे में सवाल उठता है कि जब बिजली का इस्तेमाल बढ़ा ही नहीं, तो बिल इतना ज्यादा कैसे आ गया?

दरअसल, बिजली का बिल सिर्फ घर में कितने अप्लायंसेज चल रहे हैं, इस बात पर निर्भर नहीं करता. बिल बढ़ने के पीछे मीटर रीडिंग, बिजली की दर, बिलिंग साइकिल और कुछ दूसरे कारण भी हो सकते हैं. तो चलिए जानते हैं ऐसा क्यों होता है.

मीटर रीडिंग में हो सकता है फर्क बिजली का बिल तैयार करते समय मीटर की रीडिंग दर्ज की जाती है. अगर किसी महीने मीटर रीडिंग समय पर नहीं ली गई और अनुमान के आधार पर बिल बनाया गया, तो अगले बिल में रीडिंग का अंतर जुड़ सकता है. इससे अचानक बिल ज्यादा दिखाई दे सकता है. इसलिए बिल आने के बाद एक बार अपनी पुरानी और नई मीटर रीडिंग जरूर देख लें. बिल पर दर्ज रीडिंग और मीटर में दिखाई दे रही रीडिंग में बड़ा अंतर है या नहीं, इसे भी चेक कर सकते हैं.

इस बार बिलिंग के दिन ज्यादा हो सकते हैं हर महीने बिजली का बिल बिल्कुल 30 दिनों का हो, यह जरूरी नहीं है. कई बार मीटर रीडिंग की तारीख आगे-पीछे होने की वजह से बिलिंग पीरियड बढ़ जाता है. उदाहरण के लिए, अगर पिछले महीने 28 दिनों की रीडिंग ली गई थी और इस बार 35 दिनों की, तो इस्तेमाल लगभग समान होने के बावजूद बिल ज्यादा आ सकता है. इसलिए सिर्फ रुपये देखकर तुलना करने के बजाय यह भी देखें कि बिल कितने दिनों का है.

बिजली की दर में बदलाव भी असर डाल सकता है बिजली का बिल केवल यूनिट की संख्या से तय नहीं होता. अलग-अलग जगहों पर बिजली की दर और बिल की दूसरी मदें अलग हो सकती हैं. अगर किसी अवधि में टैरिफ या शुल्क में बदलाव हुआ है, तो समान यूनिट खर्च होने पर भी कुल बिल अलग आ सकता है. इसलिए बिल में सिर्फ कुल रकम देखने के बजाय यूनिट की कीमत और दूसरे चार्ज भी देखना जरूरी है.

कई बार बिजली का इस्तेमाल सामान्य होता है, लेकिन बिल में पिछला बकाया, फिक्स्ड चार्ज, सरचार्ज या कोई दूसरा शुल्क जुड़ जाता है. ऐसे में कुल रकम अचानक ज्यादा नजर आ सकती है. अगर आपको लगता है कि बिल बिना वजह बढ़ा है, तो बिल में 'एरियर', 'फिक्स्ड चार्जेज', 'सरचार्ज' या दूसरे शुल्क जरूर चेक करें.

कोई अप्लायंसेज ज्यादा बिजली तो नहीं खा रहा? कभी-कभी हमें लगता है कि घर में अप्लायंसेज पहले जितने ही चल रहे हैं, लेकिन कोई पुराना या खराब अप्लायंसेज पहले से ज्यादा बिजली खींच रहा होता है. खासकर फ्रिज, एसी, गीजर, पानी की मोटर और पुराने कूलर जैसे उपकरणों की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए. उदाहरण के लिए, अगर फ्रिज का कंप्रेसर बार-बार चल रहा है या एसी सामान्य से ज्यादा देर तक चल रहा है, तो बिजली की खपत बढ़ सकती है. ऐसे में इस्तेमाल का समय पहले जितना होने के बावजूद यूनिट बढ़ सकती हैं.

मीटर में गड़बड़ी की आशंका भी हो सकती है अगर आपने बिल की रीडिंग, बिलिंग अवधि और सभी चार्ज जांच लिए हैं और फिर भी कोई वजह समझ नहीं आ रही, तो बिजली विभाग से शिकायत की जा सकती है. जरूरत पड़ने पर मीटर की जांच भी कराई जा सकती है. अगली बार बिजली का बिल सामान्य से ज्यादा आए तो घबराने के बजाय इन चीजों को जांचें. सबसे पहले वर्तमान और पिछली मीटर रीडिंग देखें. इसके बाद बिलिंग पीरियड यानी कितने दिनों का बिल बना है, यह चेक करें. फिर यूनिट की संख्या, बिजली की दर और पुराने बकाया या दूसरे चार्ज देखें.

अगर इन सबके बाद भी बिल समझ से बाहर है, तो बिजली विभाग से संपर्क करना बेहतर है. कई बार ज्यादा बिल का कारण ज्यादा बिजली इस्तेमाल करना नहीं, बल्कि बिलिंग से जुड़ी कोई दूसरी वजह भी हो सकती है.

Original Source
https://www.aajtak.in/information/story/electricity-bill-more-than-usual-reasons-check-meter-reading-rttw-dskc-2662338-2026-10-06?utm_source=rss
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