किस शहर में सबसे ज्यादा पैसा कमाते हैं लोग, जानें भारत का नंबर
किसी शहर की आर्थिक ताकत का अंदाजा केवल उसकी कुल अर्थव्यवस्था के आकार से नहीं लगाया जा सकता. अगर यह देखा जाए कि शहर में हर व्यक्ति के हिस्से में कितनी कमाई आती है, तो तस्वीर काफी अलग नजर आती है. इसी पैमाने पर अमेरिकी शहर दुनिया में सबसे आगे हैं.
ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के 2026 ग्लोबल सिटीज इंडेक्स के अनुसार, अमेरिका का सैन जोस प्रति व्यक्ति कमाई के मामले में दुनिया में सबसे आगे है. यहां हर व्यक्ति के हिस्से में औसतन 2,38,700 डॉलर की आर्थिक कमाई आती है. खास बात यह है कि दुनिया के शीर्ष 40 शहरों में 27 शहर अमेरिका के हैं.
इन आंकड़ों में 2025 की GDP और आबादी को आधार बनाया गया है और रकम अमेरिकी डॉलर में दी गई है.
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सैन जोस 2,38,700 डॉलर प्रति व्यक्ति GDP के साथ दुनिया में पहले स्थान पर है. सिलिकॉन वैली का यह शहर दुनिया की कई बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों का गढ़ है. यहां टेक्नोलॉजी समेत कई बड़े उद्योग तेजी से विकसित हुए हैं. इसके बाद सैन फ्रांसिस्को 1,81,889 डॉलर के साथ दूसरे, डबलिन 1,59,732 डॉलर के साथ तीसरे और बेसल 1,56,312 डॉलर के साथ चौथे स्थान पर है. सिएटल 1,52,030 डॉलर के साथ पांचवें स्थान पर है.
अमेरिका के अन्य प्रमुख शहरों में बोस्टन 1,35,264 डॉलर के साथ आठवें और न्यूयॉर्क 1,29,253 डॉलर के साथ 10वें स्थान पर है, शीर्ष 20 में शामिल अन्य अमेरिकी शहरों में सॉल्ट लेक सिटी, डरहम, वॉशिंगटन डीसी, ब्रिजपोर्ट, हार्टफोर्ड, डेनवर, डेस मोइनेस, लॉस एंजिल्स, ऑस्टिन और नैशविल शामिल हैं.
न्यूयॉर्क की रैंकिंग यह समझने का अच्छा उदाहरण है कि कुल GDP और प्रति व्यक्ति GDP में कितना अंतर होता है. न्यूयॉर्क की कुल अर्थव्यवस्था दुनिया के अधिकांश शहरों की तुलना में बहुत बड़ी है, लेकिन प्रति व्यक्ति GDP में शहर की कुल अर्थव्यवस्था के बजाय आबादी के मुकाबले आर्थिक उत्पादन को देखा जाता है.
इसी वजह से सॉल्ट लेक सिटी, डरहम, डेस मोइनेस और ओमाहा जैसे अपेक्षाकृत छोटे शहर भी शीर्ष 40 में जगह बना लेते हैं. यानी प्रति व्यक्ति अधिक कमाई के लिए शहर का बहुत बड़ा होना जरूरी नहीं है.
दुनिया के शीर्ष 40 शहरों में से 27 अमेरिका के हैं. यानी दो-तिहाई से ज्यादा शहर अमेरिकी हैं, इस लिस्ट में सिर्फ टेक्नोलॉजी हब ही नहीं, बल्कि वित्त, पेशेवर सेवाओं, ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा और आधुनिक उद्योगों के बड़े केंद्र भी शामिल हैं. अमेरिकी शहरों के इस मजबूत प्रदर्शन के पीछे देश की बड़ी अर्थव्यवस्था भी एक प्रमुख कारण है. 2025 में अमेरिका की नाममात्र GDP करीब 30.6 ट्रिलियन डॉलर रही, जिससे वह दुनिया की सबसे बड़ी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था बना रहा.
अमेरिकी राज्यों की आर्थिक ताकत भी इसी तस्वीर को मजबूत करती है. IMF के अनुमानों और अमेरिकी ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक एनालिसिस के आंकड़ों के मुताबिक, अगर अमेरिकी राज्यों की GDP की तुलना अलग-अलग देशों की GDP से की जाए, तो 19 अमेरिकी राज्य दुनिया की 50 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो सकते हैं.
अकेले कैलिफोर्निया की अर्थव्यवस्था 2025 में करीब 4.3 ट्रिलियन डॉलर रही, इसका आकार दुनिया की कई बड़ी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं के बराबर है.
अमेरिका के बाद यूरोप के कई शहरों ने भी इस सूची में मजबूत जगह बनाई है, डबलिन तीसरे, बेसल चौथे और लक्जमबर्ग सिटी छठे स्थान पर है, स्विट्जरलैंड के बेसल, जिनेवा, ज्यूरिख, बर्न और लॉज़ान भी दुनिया के शीर्ष 40 शहरों में शामिल हैं.
नमें से कई शहरों की आबादी अपेक्षाकृत कम है, लेकिन यहां फार्मा, वित्त, टेक्नोलॉजी और पेशेवर सेवाओं वाले उद्योगों की मजबूत मौजूदगी है। यही वजह है कि इन शहरों में प्रति व्यक्ति कमाई काफी ज्यादा है. उत्तरी अमेरिका और यूरोप के बाहर बहुत कम शहर इस सूची में जगह बना पाए हैं, सिंगापुर भी शीर्ष 40 शहरों में शामिल है. भारत का कोई शहर इस टॉप 40 सूची में शामिल नहीं है. हालांकि, IMF के 2026 के अनुमान के मुताबिक भारत की प्रति व्यक्ति GDP 2,813 डॉलर है और देश दुनिया में 168वें स्थान पर है.
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