वैभव की फिर छुट्टी, गेंदबाजों की कुटाई... बल्लेबाजों के दम पर ही बचाएंगे वर्ल्ड कप?

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न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज 3-2 से जीतकर भी टीम इंडिया के सामने कई ऐसे सवाल खड़े हो गए हैं, जिनसे नजरें चुराना आसान नहीं होगा. सीरीज के शुरुआती तीनों मुकाबले जीतकर भारत ने अपना दबदबा बनाया था, लेकिन इसके बाद लगातार दो हार ने टीम की कमजोरियों की पोल खोल दी. 

न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज 3-2 से जीतकर भी टीम इंडिया के सामने कई ऐसे सवाल खड़े हो गए हैं, जिनसे नजरें चुराना आसान नहीं होगा. सीरीज के शुरुआती तीनों मुकाबले जीतकर भारत ने अपना दबदबा बनाया था, लेकिन इसके बाद लगातार दो हार ने टीम की कमजोरियों की पोल खोल दी. 

हैमिल्टन में रविवार को खेले गए पांचवें टी20 मुकाबले में न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से रौंद दिया. भारतीय बल्लेबाजों ने 191 रन बनाए, लेकिन गेंदबाज इस स्कोर का बचाव नहीं कर सके. अब सवाल है कि क्या सिर्फ बल्लेबाजों के दम पर भारत वर्ल्ड चैम्पियन बना रहेगा? और जब टीम की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं तो वैभव सूर्यवंशी को लगातार बाहर रखने की वजह क्या है?

बल्लेबाजी में धमाका, लेकिन अभिषेक पर निर्भरता कितनी सही?

भारतीय टीम की बल्लेबाजी इस सीरीज में उसकी सबसे बड़ी ताकत रही. खासकर अभिषेक शर्मा की आक्रामक बल्लेबाजी ने विरोधी गेंदबाजों को दबाव में रखा. लेकिन आखिरी दो मुकाबलों में भारत की बल्लेबाजी का दूसरा पहलू भी सामने आया. अभिषेक का बल्ला नहीं चला तो टीम को मुश्किलों का सामना करना पड़ा.

हालांकि पांचवें मुकाबले में ईशान किशन और कप्तान श्रेयस अय्यर ने शानदार अर्धशतक लगाए. ईशान ने 32 गेंदों पर 61 रन बनाए, जबकि श्रेयस ने महज 23 गेंदों पर 50 रनों की पारी खेली. दोनों ने तीसरे विकेट के लिए सिर्फ 43 गेंदों में 93 रन जोड़कर भारत को 10.1 ओवरों में 112/2 के मजबूत स्कोर तक पहुंचा दिया था.

यहां से भारतीय टीम बड़े स्कोर की ओर बढ़ती दिख रही थी, लेकिन न्यूजीलैंड के गेंदबाजों ने वापसी कर ली. एडम मिल्ने ने 19 रन देकर चार विकेट झटके. नाथन स्मिथ और ब्लेयर टिकनर ने भी अहम मौकों पर विकेट निकाले. नतीजा यह हुआ कि भारतीय टीम 191/8 तक ही पहुंच सकी.

टीम इंडिया की सबसे बड़ी चिंता उसकी गेंदबाजी है. हैमिल्टन में भारतीय टीम ने 191 रन बनाए थे. टी20 क्रिकेट में यह एक चुनौतीपूर्ण स्कोर हो सकता है, लेकिन न्यूजीलैंड ने इसे महज 18 ओवरों में हासिल कर लिया. मेजबान टीम ने सात विकेट से मुकाबला जीत लिया और भारत के गेंदबाज विकेट के लिए तरसते नजर आए.

न्यूजीलैंड की जीत के सबसे बड़े नायक टिम सीफर्ट रहे. उन्होंने 50 गेंदों पर 93 रनों की विस्फोटक पारी खेली. ग्लेन फिलिप्स ने भी अर्धशतक जड़कर भारतीय गेंदबाजी की मुश्किलें बढ़ा दीं. दोनों ने मिलकर लक्ष्य को बेहद आसान बना दिया.

भारतीय टीम के लिए एक और चिंता की बात फील्डिंग रही. चौथे ओवर में नमन धीर ने सीफर्ट का आसान कैच टपका दिया था. उस समय वह 13 रन पर थे. अगर यह मौका लपक लिया जाता तो न्यूजीलैंड की पारी की तस्वीर कुछ और हो सकती थी. दिलचस्प बात यह है कि सीरीज में न्यूजीलैंड की फील्डिंग भी अच्छी नहीं रही थी और उसने कई कैच छोड़े थे, लेकिन निर्णायक मौकों पर भारत की गलती भारी पड़ गई.

सिर्फ बल्लेबाजी की दादागीरी से कब तक चलेगा काम?

टी20 क्रिकेट में बड़े स्कोर बनाने की क्षमता निश्चित तौर पर टीम इंडिया की ताकत है. लेकिन वर्ल्ड चैम्पियन बने रहने के लिए सिर्फ बल्लेबाजी के दम पर काम नहीं चलने वाला. भारत को ऐसे गेंदबाजों की जरूरत है जो बड़े स्कोर का बचाव कर सकें और मुश्किल समय में विकेट निकालने का दम रखते हों.

इस सीरीज में आखिरी दो मुकाबलों ने दिखाया कि जब विरोधी बल्लेबाज खुलकर हमला करते हैं तो भारतीय गेंदबाजी दबाव में आ जाती है. गेंदबाजों के पास रन रोकने के साथ-साथ विकेट निकालने की भी स्पष्ट योजना होनी चाहिए. इसके अलावा फील्डिंग में मिलने वाले मौकों को भुनाना भी जरूरी है.

न्यूजीलैंड के खिलाफ पांचवें मुकाबले में भारतीय टीम के पास गेंदबाजी के आदर्श संसाधन नहीं थे और रात में पिच भी बल्लेबाजी के लिए बेहतर होती चली गई. लेकिन इन परिस्थितियों के बावजूद जिस आसानी से न्यूजीलैंड ने लक्ष्य हासिल किया, उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

वैभव सूर्यवंशी को लगातार बाहर रखने की रणनीति क्या है?

टीम इंडिया की रणनीति पर सवाल उठने की एक वजह वैभव सूर्यवंशी को लगातार प्लेइंग इलेवन से बाहर रखना भी है. वैभव जैसे विस्फोटक युवा बल्लेबाज को टीम में शामिल करने के बावजूद मौका नहीं मिलना चर्चा का विषय बना हुआ है.

टीम मैनेजमेंट के सामने शीर्ष क्रम में कई विकल्प हैं. अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन और दूसरे बल्लेबाजों के बीच जगह बनाने का सवाल है. ऐसे में वैभव को मौका देने के लिए किसी दूसरे खिलाड़ी को बाहर बैठाना होगा. लेकिन लगातार प्रयोग और खिलाड़ियों को बाहर रखने की रणनीति पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है.

वैभव को हर हाल में खिलाना ही समाधान नहीं है, लेकिन अगर उन्हें भविष्य की योजना का हिस्सा माना जा रहा है तो उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने के मौके भी मिलने चाहिए. सिर्फ टीम के साथ रखने से किसी युवा खिलाड़ी की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयारी नहीं हो सकती. टीम मैनेजमेंट को यह स्पष्ट करना होगा कि वैभव के लिए उसकी योजना क्या है.

न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज खत्म हो चुकी है और अब दोनों टीमें वनडे मुकाबलों में आमने-सामने होंगी. ऐसे में भारतीय टीम मैनेजमेंट के सामने अपनी रणनीति और संयोजन पर दोबारा विचार करने का मौका है.

गौतम गंभीर और टीम प्रबंधन को बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी का संतुलन भी साधना होगा. बड़े स्कोर बनाने के साथ उन्हें बचाने की क्षमता विकसित करनी होगी. खिलाड़ियों का चयन भी टीम की जरूरत और मौजूदा फॉर्म के आधार पर करना होगा.

भारत ने सीरीज जरूर 3-2 से अपने नाम की, लेकिन लगातार दो हार ने एक अहम चेतावनी दे दी है. वर्ल्ड चैम्पियन का तमगा बरकरार रखना है तो बल्लेबाजों के साथ गेंदबाजों को भी मैच जिताने की जिम्मेदारी उठानी होगी. वरना हर मुकाबले में 200 से ज्यादा रन बनाने की उम्मीद करना ही टीम की सबसे बड़ी कमजोरी बन सकती है.

Original Source
https://www.aajtak.in/sports/cricket/story/india-vs-new-zealand-team-india-bowling-weakness-vaibhav-sooryavanshi-selection-gautam-gambhir-bmsp-dskc-2685851-2026-11-01?utm_source=rss
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