छोटे कद का प्रदर्शनकारी... गोद में ही उठा ले गए दारोगा जी, बस में मौजूद दूसरे पुलिसकर्मी ने कर लिया 'कैच'
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया. कार्यकर्ताओं ने हाथों में पोस्टर लेकर उनके इस्तीफे की मांग की. इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया और बस से ईको गार्डन भेज दिया.
प्रदर्शन के दौरान एक छोटे कद के अधेड़ सपा कार्यकर्ता भी नजर आए. वह भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे. जब पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों को बस में बैठाने पहुंचे तो एक दारोगा साहब इस कार्यकर्ता को गोद में उठाकर बस तक ले गए. इसका वीडियो चर्चा में है.
प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं ने पोस्टर पर लिखा था- 'गुस्से में है सारा देश, इस्तीफा दे दो ज्ञानेश!' वे इसी नारे के साथ मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ विरोध जता रहे थे.
मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया. इसके बाद उन्हें बस में बैठाकर ईको गार्डन भेज दिया गया. इसी दौरान छोटे कद के कार्यकर्ता को पुलिसकर्मी गोद में उठाकर बस तक ले जाते दिखाई दिए. देखें VIDEO:-
उधर, दिल्ली में इंडिया ब्लॉक के प्रदर्शन पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, इंडिया गठबंधन ने राहुल गांधी को लॉन्च करने के लिए अनेक बार प्रयोग किया और अनेक बार विफल रहा.
इंडिया गठबंधन का आज का यह कार्यक्रम लोकतंत्र का भद्दा मजाक है, संविधान का मजाक है. देश की जनता ने जिसको जनादेश देकर नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाया और देश की सरकार बनाई, सत्ता-वियोग में व्यथित राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के लोगों को यह बर्दाश्त नहीं हुआ. यह भारत है. यहां तख्तापलट के सपने मुंगेरीलाल के सपने हैं. ये लोग देश की राजधानी का व्यापार चौपट करने की कोशिश कर रहे हैं. जो भी दल इस कार्यक्रम का समर्थन कर रहे हैं, उन सबको इसका जवाब-हिसाब देना पड़ेगा.
2027 के विधानसभा चुनाव जिन राज्यों में होने हैं, वहां उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी. कांग्रेस सबसे बड़ी वोट-चोर है. इन लोगों ने सरदार पटेल को प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया. उस समय कांग्रेस के सभी प्रदेश अध्यक्षों ने सरदार पटेल को प्रधानमंत्री बनाने का समर्थन किया था और वोट भी दिया था, लेकिन कांग्रेस के लोगों ने वोट-चोरी कर पंडित जवाहरलाल नेहरू को प्रधानमंत्री बनाने की साजिश रची.
कल प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी का बलिदान दिवस था. इन लोगों ने उन्हीं की पुण्यतिथि का दिन चुना, जिन्होंने चुनाव हारने के बाद आपातकाल लगाया और लोकतंत्र की हत्या की.
वहीं, आजम खान को लेकर केशव मौर्य बोले कि मुसलमान होने की कोई उन्हें सजा नहीं मिल रही है, न ही विश्वविद्यालय बनाने की. उन्हें भ्रष्टाचार की सजा मिल रही है. मैं तो यह भी मांग करता हूं कि चूंकि मोहम्मद आजम खान अखिलेश यादव की सरकार में कैबिनेट मंत्री थे और उनकी सरकार के नेतृत्व में अगर यह गड़बड़ी हुई है, तो जांच के दायरे में अखिलेश यादव को भी शामिल किया जाना चाहिए.


