ये क्या? न डेट‍िंग करते हैं, न कुत्ते-बिल्ली या कोई पालतू... चीन में यूथ कर रहे 'ब्र‍िक पैरेंट‍िंग'

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आज के इस दौर में जहां हर कोई अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी और करियर के तनाव से जूझ रहा है, वहीं चीन के युवाओं ने तनाव से निपटने का एक बेहद अनोखा और हैरान करने वाला तरीका ढूंढ निकाला है. द गार्जियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के युवा अब न तो डेटिंग कर रहे हैं, न ही बच्चे पैदा करना चाह...

आज के इस दौर में जहां हर कोई अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी और करियर के तनाव से जूझ रहा है, वहीं चीन के युवाओं ने तनाव से निपटने का एक बेहद अनोखा और हैरान करने वाला तरीका ढूंढ निकाला है. द गार्जियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के युवा अब न तो डेटिंग कर रहे हैं, न ही बच्चे पैदा करना चाहते हैं और न ही घर में कुत्ते-बिल्लियां पाल रहे हैं. इसके बजाय, वे आजकल 'ईंटें पाल' रहे हैं!

सोशल मीडिया पर एक 'ब्रिक पेरेंट' ने लिखा, 'न बिल्लियां, न डेटिंग, मैंने एक ईंट पालनी शुरू कर दी है.' आइए जानते हैं चीनी युवाओं के बीच तेजी से फैल रहे इस अजीबोगरीब और दिलचस्प ट्रेंड की पूरी कहानी. 

ईंट पालने का ट्रेंड क्यों हो रहा है वायरल?

इस अजीबोगरीब शौक के पीछे की वजह बहुत सीधी और सरल है. ईंटों की कीमत लगभग ना के बराबर होती है और इन्हें किसी खास देखभाल की जरूरत नहीं होती. चीन के एक मीडिया आर्टिकल में इन्हें प्रैक्टिकली इमॉर्टल (यानी कभी न मरने वाली चीज) बताया गया है. एक यूजर ने लिखा कि अगर आप इन्हें पानी देना भूल जाते हैं, तो काई सुसुप्ता अवस्था में चली जाती है (सिकुड़ जाती है). और जब आप दोबारा पानी देते हैं, तो हरियाली वापस लौट आती है. वीबो पर इस ट्रेंड से जुड़े एक हैशटैग को 5 मिलियन (50 लाख) से ज्यादा बार देखा जा चुका है.

शिओहोंगशू जिसे 'रेडनोट' भी कहा जाता है, के यूजर्स काई से ढकी अपनी ईंटों की तस्वीरें #healing और #stress relief जैसे हैशटैग के साथ पोस्ट कर रहे हैं.

युवाओं का कहना है कि ईंटों को पालने में कोई झंझट नहीं है. एक यूजर ने सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास और राहत दोनों जाहिर करते हुए लिखा कि ना कोई आउटपुट चाहिए, ना कोई टारगेट (KPIs) पूरे करने हैं, ना ही इससे फूल खिलाने की भीख मांगनी है और ना ही इसकी ग्रोथ की तुलना किसी और से करनी है. एक अन्य यूजर ने मजाक में कहा कि मेरे दोस्तों ने पूछा कि क्या तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है? मैंने कहा नहीं, मैं बस ईंट पालना शुरू कर रहा हूं. 

यह ट्रेंड ऐसे समय में सामने आया है जब चीन के कई युवा पारंपरिक रूप से काम, रिश्तों और बच्चों से जुड़ी सामाजिक उम्मीदों के खिलाफ खड़े हो रहे हैं. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, छात्रों को छोड़कर 16 से 24 वर्ष की आयु के लगभग हर 5 में से 1 युवा बेरोजगार है.

पिछले साल चीन की जन्म दर भी गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई थी. इन सबसे तंग आकर कई युवाओं ने 'लाइंग फ्लैट' यानी कम मेहनत और कम तनाव वाले जीवन जीने के तरीके को अपना लिया है. कुछ लोगों के लिए ईंट पालना इसी मानसिक स्थिति से मेल खाता है.

एक यूजर ने बहुत गहरी बात कही, 'एक ईंट मुझे एक ऐसा निश्चित अहसास देती है जो कई रिश्तों से ज्यादा जमीनी लगता है. मनोवैज्ञानिक इसे 'जीरो-एथिक्स इमोशनल कंपैनियनशिप' कहते हैं. यह बदले में प्यार मांगने की कोई (जिम्मेदारी) रखे बिना आपकी कंपनी की जरूरत को पूरा करती है.' 

लेकिन जनाब, ईंटों के साथ भी है एक चेतावनी!

भले ही यह ट्रेंड तनाव भगाने का जरिया लग रहा हो, लेकिन इसने हेल्थ एक्सपर्ट्स की चिंता बढ़ा दी है. घर के अंदर काई (Moss) उगाने से फफूंद (Mould) पैदा हो सकती है, जिसके चलते कई 'ब्रिक पेरेंट्स' ने आंखों में खुजली और नाक बहने जैसी समस्याओं की शिकायत भी की है. बीजिंग की कैपिटल नॉर्मल यूनिवर्सिटी के मॉस (काई) से जुड़े रिटायर्ड प्रोफेसर शुएदोंग ली ने लोगों को सलाह दी है कि वे अपनी ईंटों को एक बंद वातावरण में रखें.

चीनी मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि बीजाणुओं के सांस के जरिए अंदर जाने और त्वचा के संपर्क को कम करने के लिए ईंटों को संभालते समय डिस्पोजेबल दस्ताने और मास्क पहनना सबसे अच्छा है. चाहे यह ट्रेंड अजीब लगे, लेकिन यह इस बात का सबूत है कि आज की इस हाई-स्ट्रेस दुनिया में युवा मानसिक शांति पाने के लिए किन-किन अजीबोगरीब रास्तों को तलाशने के लिए मजबूर हो गए हैं!

Original Source
https://www.aajtak.in/education/career/story/china-youth-raise-moss-bricks-zero-energy-companionship-edmm-dskc-2686454-2026-11-02?utm_source=rss
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