आखिर मैं इतनी मेहनत क्यों करूं? टीम इंडिया में बार-बार नजरअंदाज होने पर छलका सरफराज खान का दर्द
टीम इंडिया में वापसी की राह देख रहे मुंबई के बल्लेबाज सरफराज खान का दर्द अब सामने आया है. घरेलू क्रिकेट में लगातार रन बनाने के बावजूद भारतीय टीम में मौका नहीं मिलने से वह निराश हैं. सरफराज ने स्वीकार किया कि कई बार उनके मन में सवाल उठता है कि आखिर वह इतनी मेहनत क्यों करें? हालांकि, पिता नौशाद को अपने लिए लगातार संघर्ष करते देखकर उन्हें दोबारा प्रेरणा मिलती है.
29 साल के सरफराज ने सोमवार को मुंबई में रणजी ट्रॉफी मुकाबले के पहले दिन रेलवे के खिलाफ 55 रन बनाए. इसके बाद उन्होंने अपने संघर्ष और टीम इंडिया में वापसी की कोशिशों पर खुलकर बात की. उन्होंने भारत के लिए आखिरी मुकाबला नवंबर 2024 में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला था.
सरफराज ने कहा- हर सुबह उठकर मेरे मन में एक ही सवाल आता है कि आखिर मैं इतनी मेहनत क्यों करूं और बार-बार उसी चीज से क्यों गुजरूं? मैं भारत के लिए खेल चुका हूं. सुबह 5 बजे उठकर प्रैक्टिस करने जाता हूं. अगर चाहता तो मुंबई के लिए खेल सकता था और अब भी खेल रहा हूं. लेकिन कई बार यह सवाल मन में आता है.
उन्होंने आगे कहा- जब मैं अपने पिता को मेरे लिए इतनी मेहनत करते देखता हूं तो अब उनके लिए रन बनाने का मन करता है. यही एक चीज है जो मुझे प्रेरित करती है.
पिता के संघर्ष से मिलती है ताकत सरफराज और उनके छोटे भाई मुशीर खान आज भी अपने पिता नौशाद के मार्गदर्शन में क्रिकेट की ट्रेनिंग करते हैं. नौशाद ने दोनों भाइयों के क्रिकेट करियर को संवारने में अहम भूमिका निभाई है.
सरफराज ने अपनी दिनचर्या का जिक्र करते हुए कहा कि उनसे मिलने के लिए घर जाने की जरूरत नहीं है. सुबह 6 बजे आजाद मैदान या क्रॉस मैदान पहुंचने पर वह मिल जाएंगे. यह उनकी क्रिकेट के प्रति प्रतिबद्धता को भी दिखाता है.
6 टेस्ट में 371 रन, फिर टीम से बाहर सरफराज ने फरवरी 2024 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया था. घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली. उन्होंने अब तक 6 टेस्ट खेले हैं, जिनमें 37.10 की औसत से 371 रन बनाए. उनके नाम एक शतक और तीन अर्धशतक हैं. न्यूजीलैंड के खिलाफ बेंगलुरु में अक्टूबर 2024 में बनाया गया 150 रन उनका सर्वोच्च स्कोर है.
नवंबर 2024 में मुंबई में न्यूजीलैंड के खिलाफ ही उन्होंने अपना आखिरी इंटरनेशनल मैच खेला था. इसके बाद वह ऑस्ट्रेलिया दौरे पर बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के लिए भारतीय टीम का हिस्सा थे, लेकिन किसी टेस्ट में खेलने का मौका नहीं मिला.
अगस्त 2026 में श्रीलंका के खिलाफ भारत के दो टेस्ट मैचों के दौरे पर उन्हें साई सुदर्शन के विकल्प के तौर पर टीम में शामिल किया गया था. हालांकि, दोनों मुकाबलों में वह प्लेइंग-11 में जगह नहीं बना सके.
'मैंने विदेश में भी बनाए हैं रन' सरफराज ने सेलेक्टर्स से मिली जानकारी का भी जिक्र किया. उनके मुताबिक, उन्हें बताया गया था कि घरेलू परिस्थितियों में उन्हें ज्यादा मौके मिल सकते हैं. हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि विदेशी परिस्थितियों में इंडिया A के लिए रन बनाने के बावजूद उन्हें पर्याप्त मौके क्यों नहीं मिले.
उन्होंने कहा- जब मैं भारतीय टीम में गया था तो मैंने सुना था कि मुझे भारतीय परिस्थितियों में ज्यादा मौके दिए जाएंगे. लेकिन मेरा एक सवाल है. जब मैं अफ्रीका गया था तो भारतीय टीम के खिलाफ 60 गेंदों में 100 रन बनाए थे. जब इंग्लैंड गया तो वहां भी 60 गेंदों में 100 रन बनाए.
सरफराज ने आगे कहा- जब आप भारत लौटते हैं तो आपको इतनी बड़ी टर्निंग पिचों पर खेलना पड़ता है. भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए इतनी मेहनत करते हैं और फिर अचानक आपसे ऐसी मुश्किल पिचों पर प्रदर्शन की उम्मीद की जाती है. ऐसा नहीं है कि मैंने विदेश में रन नहीं बनाए. वहां भी रन बनाए हैं. यह चयनकर्ताओं का नजरिया है, लेकिन मेरा काम क्रिकेट खेलना है और मैं खेलता रहूंगा.
दरअसल, सरफराज ने दिसंबर 2023 में साउथ अफ्रीका के प्रिटोरिया में सीनियर भारतीय टीम के खिलाफ इंडिया A के इंट्रा-स्क्वॉड मैच में 61 गेंदों पर शतक लगाया था. इसके बाद जून 2025 में इंग्लैंड दौरे की तैयारी के दौरान बेकनहैम में 76 गेंदों पर 101 रन बनाए थे. हालांकि, इन दोनों विदेशी दौरों के लिए उन्हें सीनियर भारतीय टीम में जगह नहीं मिली थी.
न्यूजीलैंड के खिलाफ लगातार चार पारियों में नहीं चला बल्ला सरफराज ने भारतीय पिचों पर स्पिन के खिलाफ मिलने वाली चुनौती को भी स्वीकार किया. न्यूजीलैंड के खिलाफ 2024 में पुणे और मुंबई टेस्ट की उनकी आखिरी चार पारियों में 11, 9, 0 और 1 रन आए थे. भारत को दोनों टेस्ट में हार मिली थी और न्यूजीलैंड ने पहली बार भारतीय जमीन पर टेस्ट सीरीज 3-0 से जीती थी.
वहीं, रेलवे के खिलाफ रणजी मुकाबले के पहले दिन सरफराज ने 100 गेंदों पर 55 रन बनाए. मुंबई ने दिन का खेल खत्म होने तक 6 विकेट पर 247 रन बना लिए थे. अंगकृष रघुवंशी 78 रन के साथ टीम के टॉप स्कोरर रहे, जबकि सिद्धेश लाड ने 47 रनों का योगदान दिया.

