गंगा का पानी, जापान का प्रोजेक्ट और आर्थिक संकट... बांग्लादेश में क्यों बढ़ रहे भारत विरोधी सुर?

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बांग्लादेश में फरवरी में हुए चुनाव के बाद भारत विरोधी बयानबाजी कुछ समय के लिए कम हो गई थी. लेकिन अब ढाका में राजनीतिक भाषणों और प्रदर्शनों में एक बार फिर भारत का नाम सुनाई दे रहा है. गंगा जल बंटवारे की संधि, जापान के साथ कनेक्टिविटी प्लान और देश में जारी आर्थिक संकट के बीच भारत क...

बांग्लादेश में फरवरी में हुए चुनाव के बाद भारत विरोधी बयानबाजी कुछ समय के लिए कम हो गई थी. लेकिन अब ढाका में राजनीतिक भाषणों और प्रदर्शनों में एक बार फिर भारत का नाम सुनाई दे रहा है. गंगा जल बंटवारे की संधि, जापान के साथ कनेक्टिविटी प्लान और देश में जारी आर्थिक संकट के बीच भारत को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं.

इसका नजारा 30 अक्टूबर को ढाका में नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) की रैली में दिखा. यहां प्रदर्शनकारियों ने 'दिल्ली नहीं, ढाका' के नारे लगाए. इस रैली में NCP के नेता नाहिद इस्लाम और जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान भी मौजूद थे.

भारत और बांग्लादेश के बीच 1996 में हुई गंगा जल बंटवारे की संधि 12 दिसंबर 2026 को खत्म हो रही है. यह समझौता 30 साल के लिए हुआ था. इसके तहत सूखे के मौसम में फरक्का बैराज पर गंगा के पानी का बंटवारा तय किया गया था. बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार अब इस समझौते में अपने लिए ज्यादा पानी की मांग कर रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, ढाका 1977 के समझौते में शामिल न्यूनतम जल गारंटी की व्यवस्था फिर से लागू करना चाहता है.

इस मुद्दे पर NCP नेता नाहिद इस्लाम ने 30 अक्टूबर की रैली में कहा कि बांग्लादेश गंगा के पानी में अपने हिस्से से समझौता नहीं करेगा. 1 नवंबर को उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, 'पानी नहीं तो ट्रांजिट नहीं'. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर भारत ने बांग्लादेश को उसका हिस्सा नहीं दिया तो भारतीय सामान को बांग्लादेश के रास्ते गुजरने की इजाजत नहीं दी जाएगी. नाहिद ने 1976 के फरक्का लॉन्ग मार्च का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो बांग्लादेश एक बार फिर फरक्का तक मार्च करेगा.

भारत को लेकर दूसरा विवाद जापान और बांग्लादेश के बीच औद्योगिक और परिवहन सहयोग से जुड़ा है. दरअसल, प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने 26 अक्टूबर को जापान का दौरा किया था. इस दौरान दोनों देशों ने बे ऑफ बंगाल इंडस्ट्रियल ग्रोथ बेल्ट (BIG-B) को आगे बढ़ाकर 'BIG-B फॉर शेयर्ड प्रॉस्पेरिटी' नाम का नया ढांचा बनाने पर सहमति जताई.

No water, no transit. If India denies our rivers their rightful flow, Indian goods will not flow through Bangladesh. There will be no corridors and no transit facilities. We carry the legacy of Maulana Bhashani’s historic Farakka Long March. Our sovereignty and water rights are non-negotiable. If necessary, we will march to Farakka once again.

इस योजना में मातरबाड़ी डीप सी पोर्ट को अहम केंद्र माना गया है. इसके साथ ही जापान की एक अलग योजना भी चर्चा में है. 2023 में सामने आई इस योजना का मकसद बांग्लादेश के रास्ते भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को बंगाल की खाड़ी से जोड़ना है.

NCP नेता नाहिद इस्लाम ने आरोप लगाया कि तारिक रहमान ने जापान दौरे के दौरान भारत को एक अवैध कॉरिडोर देने की कोशिश की. वहीं, जमात प्रमुख शफीकुर रहमान ने सरकार से जापान दौरे और मातरबाड़ी बंदरगाह को लेकर हुए समझौतों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की. हालांकि, बांग्लादेश ने नए BIG-B ढांचे में किसी तीसरे देश की भागीदारी पर चर्चा से इनकार किया है. 

बांग्लादेश में भारत विरोधी बयानबाजी के बीच आर्थिक संकट और कपड़ा मजदूरों के प्रदर्शन भी जारी हैं. देश के रेडीमेड गारमेंट उद्योग में मजदूर ज्यादा वेतन की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि न्यूनतम वेतन 2023 से नहीं बढ़ाया गया है. 3 नवंबर तक ये प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन जारी है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम 690 कपड़ा फैक्ट्रियों में उत्पादन रोकना पड़ा था. ढाका और आसपास के औद्योगिक इलाकों में मजदूरों और पुलिस के बीच झड़पें भी हुईं.

विश्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 में बांग्लादेश की आर्थिक विकास दर 3.4 फीसदी रहने का अनुमान जताया है. यह कोविड महामारी के बाद सबसे कम विकास दर होगी. बैंक का कहना है कि, कमजोर निवेश, घटते निर्यात और महंगाई के कारण रोजगार पर दबाव बढ़ा है. पिछले एक साल में 21 लाख और लोग गरीबी में पहुंचे हैं.

इस बीच बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने आरोप लगाया कि सीमा पार से कुछ लोग मजदूरों को भड़का रहे हैं. पुलिस अधिकारियों ने भी हिंसा के पीछे तीसरे पक्ष और विदेशी साजिश की आशंका जताई है. जमात प्रमुख शफीकुर रहमान ने भी सोशल मीडिया पर प्रदर्शन के पीछे साजिशकर्ताओं और मौकापरस्त लोगों का हाथ होने का आरोप लगाया.

वहीं बांग्लादेश में भारत विरोधी बयानबाजी के बीच पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की दिसंबर में संभावित वापसी भी राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गई है. हसीना अगस्त 2024 में सत्ता से हटने के बाद भारत में रह रही हैं. इस दौरान बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में मौत की सजा सुनाई है. ढाका सरकार कई बार भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग भी कर चुकी है.

हसीना ने अगस्त में नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था कि वह दिसंबर में किसी भी हाल में बांग्लादेश लौटेंगी. 30 अक्टूबर की रैली में NCP नेता नाहिद इस्लाम ने उनकी वापसी का जिक्र करते हुए जुलाई आंदोलन में शामिल युवाओं से फिर एकजुट होने की अपील की. उन्होंने कहा कि तारिक रहमान की सरकार हसीना की वापसी का मुकाबला नहीं कर पाएगी. 

इस तरह गंगा जल समझौते, कनेक्टिविटी योजना, आर्थिक संकट और हसीना की संभावित वापसी जैसे मुद्दे बांग्लादेश की राजनीति में तनाव बढ़ा रहे हैं. इसका असर भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी पड़ सकता है.

Original Source
https://www.aajtak.in/world/story/bangladesh-anti-india-slogans-ganga-water-treaty-japan-connectivity-plan-ntc-aktw-rptc-2687233-2026-11-03?utm_source=rss
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