अब्दुल रचेगा इतिहास! ट्रंप ने जिसे बताया 'जिहादी' क्या वो बनेगा अमेरिका का पहला मुस्लिम सीनेटर?

Direct Source Verification: This story is aggregated from India Today (indiatoday.in). Full reporting rights and copyright belong to the primary publisher.
अमेरिका में मध्यावधि चुनावों के लिए मतदान के बाद अब नतीजों का ऐलान किया जा रहा है. इस बार दुनिया भर की जिन सीटों पर खासतौर से नजर लगी हैं, उनमें मिशिगन सीनेट का चुनाव भी है. इसकी वजह यहां मिस्र मूल के अब्दुल अल-सैयद का डेमोक्रेट उम्मीदवार बनना और उनके खिलाफ रिपब्लिकन पार्टी का आक...

अमेरिका में मध्यावधि चुनावों के लिए मतदान के बाद अब नतीजों का ऐलान किया जा रहा है. इस बार दुनिया भर की जिन सीटों पर खासतौर से नजर लगी हैं, उनमें मिशिगन सीनेट का चुनाव भी है. इसकी वजह यहां मिस्र मूल के अब्दुल अल-सैयद का डेमोक्रेट उम्मीदवार बनना और उनके खिलाफ रिपब्लिकन पार्टी का आक्रामक चुनाव प्रचार रहा है. अब्दुल अल सैयद अमेरिकी राजनीति में एक नया इतिहास रचने की दहलीज पर खड़े हैं.

मिशिगन से डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे अल-सैयद अगर इस मुकाबले में जीत दर्ज करते हैं, तो वे अमेरिकी इतिहास के पहले मुस्लिम सीनेटर बन जाएंगे. मिशिगन में रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स के खिलाफ चल रही वोटों की गिनती के शुरुआती रुझानों में अल-सैयद बढ़त बनाए हुए हैं.

अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी 'हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स' में तो मुस्लिम प्रतिनिधि चुने जा चुके हैं, लेकिन ऊपरी सदन 'सीनेट' में आज तक कोई भी मुस्लिम नेता नहीं पहुंचा है. इस बार के चुनाव में जिस तरह से अब्दुल अल-सैयद बढ़त बनाए हुए हैं, उससे उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है.

मिशिगन सीनेट के चुनाव में मिस्र मूल के अब्दुल अल-सैयद का डेमोक्रेट उम्मीदवार बनना और उनके खिलाफ रिपब्लिकन पार्टी के माइक रोजर्स चुनाव लड़ रहे हैं. दोनों के बीच सीधा मुकाबला है. खबर लिखे जाने तक के रुझानों में सैयद ने माइक पर बढ़त बनाई हुई है.

न्यूयॉर्क टाइम्स के आंकड़ों के मुताबिक, अब्दुल अल-सैयद को 50.7 फीसदी वोट मिले हैं. भारतीय समय के मुताबिक, साढ़े 11 बजे के रुझानों में वो 15 लाख से ज्यादा वोट हासिल कर चुके हैं. वहीं उनके खिलाफ चुनाव लड़ रहे रिपब्लिकन पार्टी के माइक रोजर्स रुझानों में 14 लाख वोटों तक सिमटते नजर आ रहे हैं. उन्हें अभी 47.4 फीसदी वोट मिले हैं. इस तरह से अब्दुल अल सैयद ने माइक पर लगातार बढ़त बनाई हुई है.

42 वर्षीय अल-सैयद एक पब्लिक हेल्थ एडवोकेट हैं, जो लगातार डोनाल्ड ट्रंप के निशाने पर रहे हैं. अब्दुल अल सैयद पूर्व में दक्षिण-पूर्वी मिशिगन के डेट्रॉइट और वेन काउंटी में स्वास्थ्य विभाग का नेतृत्व कर चुके हैं. वो अगर इस बार चुनाव जीतते हैं, तो वे अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बन जाएंगे. ऐसे में इस चुनाव पर सबकी नजर है कि क्या अमेरिका को पहला मुस्लिम सीनेटर इस चुनाव से मिलने जा रहा है.

रोजर्स और सैयद की पूर्व में हार अब्दुल अल सैयद ने 2018 में गवर्नर पद के लिए डेमोक्रेटिक प्राइमरी में हिस्सा लिया था, जिसमें उन्हें ग्रेचेन व्हिटमर से हार मिली थी. ग्रेचेन गवर्नर चुनी गई थीं. इस बार प्राइमरी जीतने के बाद वो चुनाव में उतरे और प्रगतिशील नीतियों को अपनाया. इसमें 'मेडिकेयर फॉर ऑल' प्रमुख है. यह एक ऐसी योजना है जिसके तहत अमेरिका में हर व्यक्ति को सरकारी फंड से चलने वाली स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराई जाती है.

सैयद के सामने चुनाव लड़ रहे 63 वर्षीय रोजर्स अमेरिकी कांग्रेस के पूर्व सदस्य और राज्य विधानसभा के सदस्य रह चुके हैं. उन्होंने 2024 में भी सीनेट का चुनाव लड़ा था, लेकिन वे डेमोक्रेटिक सीनेटर एलिसा स्लॉटकिन से हार गए थे. रोजर्स को ट्रंप के करीबी सहयोगियों में गिना जाता है. उन्होंने ट्रंप के ईरान के खिलाफ युद्ध, टैक्स में कटौती और घरेलू ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने जैसे फैसलों का समर्थन किया था.

अगस्त 2026 में हुए डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनाव में अब्दुल अल सैयद ने अमेरिकी इतिहास का सबसे महंगा सीनेट प्राइमरी चुनाव जीतकर सबको चौंका दिया था. उन्होंने प्रतिनिधि हैली स्टीवंस को हराकर डेमोक्रेटिक टिकट हासिल किया था. अल-सैयद कॉर्पोरेट चंदे के खिलाफ रहे हैं और उन्होंने छोटे व्यक्तिगत चंदों के दम पर अपना पूरा चुनावी अभियान चलाया है. अब्दुल अल सैयद 'मेडिकेयर फॉर ऑल' (सभी के लिए मुफ्त/सस्ती स्वास्थ्य सेवा) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर सख्त सरकारी नियंत्रण के बड़े समर्थक हैं.

डोनाल्ड ट्रंप ने मिशिगन से डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेट उम्मीदवार डॉ. अब्दुल अल-सैयद के खिलाफ अपनी रैलियों में जिहादी और मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े होने का बयान दिया था. ट्रंप ने मिशिगन के पोर्ट ह्यूरॉन और आयोवा में अपनी चुनावी रैलियों के दौरान अब्दुल अल-सैयद पर निशाना साधते हुए उनका नाम लेकर तंज कसा और कहा था कि कोई कहता है उसका नाम अब्दुल है, मेरे लिए वो मोहम्मद है और वो एक कट्टर जिहादी है.

ट्रंप ने अब्दुल अल-सैयद पर आरोप लगाया था कि वह और उनका परिवार मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े हैं और अमेरिका में शरिया कानून लागू करना चाहते हैं. ट्रंप ने 11 सितंबर 2001 के आतंकवादी हमलों का जिक्र किया. ट्रंप ने कहा कि अगर अल-सैयद नवंबर में होने वाले मिडटर्म इलेक्शन जीत जाते हैं, तो उन्हें अमेरिकी सीनेट में एंट्री से पहले मेटल डिटेक्टर से सिक्योरिटी की जांच करानी चाहिए.

डोनाल्ड ट्रंप ने अब्दुल को लेकर डेमोक्रेट्स पर भी तीखा हमला बोला और कहा कि अगर ऐसे उम्मीदवार चुनाव जीतते हैं, तो इससे अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है. हालांकि, अब्दुल अल-सैयद ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि उनके खिलाफ ऐसा कोई आधिकारिक सबूत सामने पेश नहीं किया जा रहा है, सिर्फ बयानबाजी की जा रही है.

अब्दुल अल-सैयद ने ट्रंप के बयानों का जवाब देते हुए कहा कि उनकी पहचान या धर्म अमेरिका में बढ़ती महंगाई, गैस के दामों, स्वास्थ्य सेवाओं या आम लोगों की समस्याओं के लिए जिम्मेदार नहीं हैं. अब्दुल अल-सैयद ने ट्रंप के हमलों का जवाब देते हुए कहा कि ट्रंप और उनके विरोधी मतदाताओं का ध्यान महंगाई, पेट्रोल की बढ़ती कीमतों, मकान के किराए और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे वास्तविक आर्थिक मुद्दों से हटाने के लिए उनके नाम और धर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं.

रॉयल ओक में अपनी अंतिम चुनावी रैली के दौरान अल-सैयद ने ट्रंप पर तंज कसते हुए कहा था कि मुझे नहीं पता कि डोनाल्ड ट्रंप को वास्तव में मेरा नाम पता है या नहीं, यह अब्दुल है या मोहम्मद... हकीकत यह है कि मुझे उनके मेरा नाम जानने की जरूरत नहीं है, वह चुनाव के बाद मुझे सीधे 'सेनेटर' कहकर बुला सकते हैं. ट्रंप द्वारा यह कहे जाने पर कि सीनेट में जाने से पहले अल-सैयद को मेटल डिटेक्टर से गुजरना चाहिए, अल-सैयद ने पलटवार करते हुए कहा कि इसके लिए पहले ट्रंप को झूठ पकड़ने वाली मशीन (लाई डिटेक्टर) से गुजरना होगा और वह खुद मेटल डिटेक्टर से गुजरने के लिए तैयार हैं.

अल-सैयद ने मुस्लिम ब्रदरहुड या किसी भी चरमपंथी संगठन से अपने परिवार के किसी भी तरह के संबंध होने के ट्रंप के सभी दावों और आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है. यह बयान ऐसे समय आया जब अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने वाले हैं और मिशिगन की सीनेट सीट को लेकर डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन पार्टी (माइक रोजर्स) के बीच कड़ा मुकाबला चल रहा है.

डेमोक्रेट उम्मीदवार अब्दुल अल सैयद का जन्म31 अक्टूबर 1984 को मिशिगन में हुआ है. वो पेशे से प्रोफेसर हैं.  यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन से स्नातक करने के बाद ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पब्लिक हेल्थ में डॉक्टरेट (DPhil) की उपाधि हासिल की. इसके बाद कोलंबिया यूनिवर्सिटी से मेडिकल डिग्री (MD) ली. अल-सैयद महज 30 साल की उम्र में डेट्रॉइट शहर के सबसे युवा स्वास्थ्य निदेशक बने थे.अब्दुल अल सैयाद डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रोग्रेसिव गुट से आते हैं और दिग्गज नेता बर्नी सैंडर्स के करीबी माने जाते हैं.

Original Source
https://www.aajtak.in/world/story/abdul-el-sayed-first-muslim-us-senator-michigan-election-trump-jihadist-controversy-ntcpkb-dskc-2687827-2026-11-04?utm_source=rss
Visit India Today ↗
SHARE STORY:
𝕏 f in

Related Coverage in Technology