बढ़ने जा रही भारत की हाइपरसोनिक मिसाइलों की रेंज, चीन-PAK के लिए जानिए कैसे बढ़ेगी मुश्किल
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO भारत की स्वदेशी लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल LR-ASHM की क्षमता को और बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है. यह मिसाइल पहले ही करीब 1500 KM की रेंज साबित कर चुकी है. अब DRDO इसे 3500 KM तक ले जाने के लिए एक्सटेंडेड रेंज करने जा रहा है. उत्पादन मंजूरी से पहले 2 से 3 टेस्टिंग की योजना बनाई गई है. सफल होने पर यह मिसाइल 2028-29 तक उत्पादन चरण में प्रवेश कर सकती है.
LR-ASHM एक बूस्ट-ग्लाइड हाइपरसोनिक मिसाइल है. यह शुरू में ठोस ईंधन वाले रॉकेट बूस्टर से तेज गति पकड़ती है और फिर ग्लाइड चरण में वायुमंडल में उड़ान भरती है. इसकी गति 12348 किलोमीटर प्रतिघंटा तक पहुंचने की रिपोर्ट है जबकि औसत गति 6174 किलोमीटर प्रतिघंटा के आसपास रहती है.
यह स्थिर और चलते हुए दोनों तरह के समुद्री लक्ष्यों को निशाना बना सकती है. इसकी फ्लाइट पाथ में कई मैन्युवर और स्किप शामिल हैं जिससे दुश्मन के रडार और मिसाइल रक्षा प्रणालियों के लिए इसे इंटरसेप्ट करना काफी मुश्किल हो जाता है. स्वदेशी सेंसर टर्मिनल चरण में चलते जहाजों को सटीक तरीके से ट्रैक करने में मदद करते हैं.
यह भी पढ़ें: ट्रंप ने एक मिस्टेक की और... इस वेपन कॉम्बो के दम पर अमेरिका को मारेगा ईरान
रेंज बढ़ाने के लिए बड़े हार्डवेयर बदलाव की जरूरत नहीं पड़ेगी. मुख्य रूप से सॉफ्टवेयर अपग्रेड और नई ट्रैजेक्टरी प्रोफाइल से काम चल सकता है. मिसाइल के बूस्टर चरण पनडुब्बी से लॉन्च होने वाली K-4 बैलिस्टिक मिसाइल से लिए गए हैं जो खुद 3500 किलोमीटर तक मार कर सकते हैं. इसलिए मौजूदा डिजाइन में छिपे हुए क्षमता का इस्तेमाल किया जा रहा है.
3500 किलोमीटर की रेंज मिलने पर भारत की समुद्री यानी मैरीटाइम डिनायल क्षमता हिंद महासागर क्षेत्र में काफी बढ़ जाएगी. तट से दूर दुश्मन के युद्धपोतों, एयरक्राफ्ट कैरियर ग्रुप और अन्य समुद्री ठिकानों को निशाना बनाया जा सकेगा. यह ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक मिसाइलों के साथ मिलकर बहुस्तरीय स्ट्राइक क्षमता प्रदान करेगी.
हाइपरसोनिक गति और मैन्युवरेबिलिटी के कारण आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम के लिए चुनौती बन जाएगी. DRDO ने इस सिस्टम को थल सेना और वायुसेना को भी प्रस्तावित किया है. ग्राउंड अटैक वेरिएंट विकसित होने पर यह जमीनी लक्ष्यों पर भी लंबी दूरी से हमला कर सकेगी. इससे तीनों सेनाओं के पास एक मजबूत पारंपरिक लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता उपलब्ध होगी.
मिसाइल के पहले परीक्षण 2023 और 2024 में हुए थे जिनमें 1500 किलोमीटर की रेंज पर समुद्री लक्ष्य को भेदने की क्षमता साबित हुई. मई 2026 में भी सफल परीक्षण हुआ. अब एक्सटेंडेड रेंज के लिए नए परीक्षणों की तैयारी है. सफल सत्यापन के बाद उत्पादन मंजूरी मिलेगी. यह स्वदेशी हाइपरसोनिक तकनीक में भारत की प्रगति दिखाता है.
यह विकास भारत की आत्मनिर्भरता और हिंद महासागर में रणनीतिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में बड़ा कदम है. सफल होने पर LR-ASHM भारत के पारंपरिक स्ट्राइक आर्सेनल का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण को प्रभावित कर सकती है.

