PAK ने पेश किया 'FAKE' मो. आसिफ, इंडियन आर्मी ने कुछ ही घंटे पहले एनकाउंटर में किया था ढेर!
अगर प्रोपेगैंडा फैलाने और खुद का मज़ाक बनवाने के लिए कोई अवॉर्ड होता तो पाकिस्तान उसका एक बड़ा दावेदार होता. इंडियन आर्मी ने लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी और पूर्व स्पेशल सर्विस ग्रुप के कमांडो मोहम्मद आसिफ को मुठभेड़ में मार गिराया. सेना ने इसकी तस्वीरें भी जारी कीं. लेकिन इसके एक दिन बाद पाकिस्तान ने गुरुवार को भारत के दावे को चुनौती देने के लिए मीडिया के सामने उसके जैसे दिखने वाले एक व्यक्ति को पेश करने की कोशिश की.
पाकिस्तान ने इसे एसएसजी का पूर्व कमांडो बताया. बुधवार को सेना ने कहा था कि उसने जम्मू-कश्मीर के बडगाम ज़िले में एक मुठभेड़ के दौरान मोहम्मद आसिफ़ (उर्फ़ हाशिम मूसा) को मार गिराया है.
हालांकि पाकिस्तान ने जिस व्यक्ति को मोहम्मद आसिफ़ बताया था वह जल्द ही शक के घेरे में आ गया. स्वतंत्र OSINT अकाउंट्स ने उस व्यक्ति के चेहरे और शारीरिक बनावट में कथित अंतर बताकर पाकिस्तान के दावे को तुरंत गलत साबित कर दिया. और भारत के दावे को चुनौती देने के लिए पाकिस्तान की एक हमशक्ल को पेश करने की नापाक कोशिश का पर्दाफ़ाश हो गया.
गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में DG ISPR लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने उस व्यक्ति को पेश किया, जो अपने ड्रामेबाज़ी और भारत-विरोधी नफरत फैलाने के लिए जाने जाते हैं. मोहम्मद आसिफ के तौर पर अपनी पहचान बताते हुए उसने दावा किया कि वह 2023 में SSG से हवलदार के पद से रिटायर हुआ था.
उसने दावा किया कि वह 2000 में पाकिस्तानी सेना में शामिल हुआ था. उसने आगे कहा, "2005 में मैं SSG में शामिल हुआ 18 साल तक अपनी ड्यूटी निभाई और 2023 में रिटायर हो गया... मैं ज़िंदा हूं और आपके सामने मौजूद हूं."
भारत के किसी दावे का जवाब देने के लिए पाकिस्तान द्वारा किसी मौजूदा या रिटायर पाकिस्तानी सैनिक को कैमरे के सामने लाने का शायद ही कोई उदाहरण मिलता है.
हालांकि पाकिस्तान द्वारा पेश किए गए व्यक्ति की तुलना मूसा की पुरानी तस्वीरों से करने वाले विश्लेषकों ने उनके चेहरे की बनावट में कई अंतर बताए हैं, जिनमें कान और नाक का आकार और आंखों की सीध शामिल है. हालांकि आजत ने स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि नहीं की है.
रक्षा विशेषज्ञों और भारतीय सेना के पूर्व अधिकारियों ने पाकिस्तान के प्रोपेगैंडा से झूठ का पर्दा हटा दिया.
मेजर जनरल हर्षा काकर (रिटायर्ड) ने ट्वीट किया, "हमेशा की तरह, पाकिस्तान ने एक नकली व्यक्ति को पेश किया और उसका नाम हाशिम मूसा रखा, जबकि उसे पता है कि सच सामने आ चुका है. यह व्यक्ति फिर कभी दिखाई नहीं देगा. झूठ बोलने वाले पाकिस्तान की ओर से कुछ भी नया नहीं है."
ब्रिगेडियर बृजेश पांडे ने भी पोस्ट किया, "पाकिस्तान कई मूसा को पनाह दे सकता है. क्या यह मूसा वही पाकिस्तानी कोर कमांडर है जो उसके बगल में बैठा है? क्या FATF को और बड़े सबूत की ज़रूरत है?"
कौन था MD आसिफ, जिसे हाशिम मूसा के नाम से भी जाना जाता था?
मूसा जो पीर पंजाल इलाके और कश्मीर घाटी में आम नागरिकों और सुरक्षा बलों पर हुए कई जानलेवा हमलों के पीछे था और सुरक्षा बलों की पकड़ से लंबे समय से बच रहा था. लेकिन बुधवार को यूसमर्ग में एक मुठभेड़ में मारा गया.
वह LeT के उन चार आतंकवादियों में से एक था जिनकी तस्वीरें 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद वायरल हुई थीं, जिसमें 26 हिन्दू सैलानी मारे गए थे. अब वे चारों सुरक्षा बलों के साथ अलग-अलग मुठभेड़ों में मारे जा चुके हैं.
मूसा इस ग्रुप का आखिरी बचा हुआ सदस्य था. अच्छी तरह से ट्रेंड और लड़ाई में माहिर होने की वजह से वह पीर पंजाल इलाके के मुश्किल रास्तों पर आसानी से चल पाता था और सालों तक सुरक्षा बलों से बचता रहा.
पाकिस्तान में मूसा कई अहम मिशन का हिस्सा था. खबरों के मुताबिक 2006 और 2008 के बीच मूसा पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की सुरक्षा टीम का हिस्सा था. वह बलूचिस्तान में उग्रवाद-विरोधी अभियानों में भी शामिल था.
मूसा का मारा जाना भारत के आतंकवाद-विरोधी अभियानों के लिए एक बड़ी जीत थी और J&K में लश्कर के नेटवर्क के लिए एक बड़ा झटका था.


