'SIR पर सर्वसम्मति से हुआ था फैसला', असहमति के आरोपों के बीच चुनाव आयोग का पहला बयान

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CEC ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों में असहमति की खबरों के बीच शनिवार को चुनाव आयोग की एक अहम बैठक हुई. इस बैठक में CEC ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्त इसमें मौजूद रहे. बैठक के बाद चुनाव आयोग ने प्रेस रिलीज जारी करते हुए यह साफ किया है कि पश्चिम बंगाल, बिहार समेत अन्य र...

CEC ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों में असहमति की खबरों के बीच शनिवार को चुनाव आयोग की एक अहम बैठक हुई. इस बैठक में CEC ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्त इसमें मौजूद रहे. बैठक के बाद चुनाव आयोग ने प्रेस रिलीज जारी करते हुए यह साफ किया है कि पश्चिम बंगाल, बिहार समेत अन्य राज्यों में SIR को लेकर सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे. 

दरअसल, हाल ही में एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि बिहार समेत कई राज्यों में SIR समेत कई फैसलों को लेकर दोनों चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर असहमति जताई थी. इसके बाद से विपक्ष लगातार मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना साध रहा है.

अब चुनाव आयोग ने अपनी प्रेस रिलीज में कहा कि हाल के महीनों में आयोग ने देश भर में SIR समेत कई फैसले लिए हैं. आयोग के मुताबिक, SIR को लेकर पहला आदेश 24 जून 2025 को जारी किया गया था. इसकी शुरुआत बिहार से हुई. इसके बाद पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए भी आदेश जारी किए गए. आयोग ने कहा कि ये सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे. सुप्रीम कोर्ट ने भी 27 मई 2026 को अपने आदेश में SIR को सही ठहराया था. 

आयोग ने बताया कि सर्वसम्मति से 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए SIR का शेड्यूल 27 अक्टूबर 2025 को जारी किया गया था. इसके बाद 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 14 मई 2026 को शेड्यूल जारी हुआ. आयोग ने कहा कि मतदाताओं की अंतिम संख्या का पता तीसरे चरण के बचे हुए 12 राज्यों में वोटर लिस्ट के अंतिम प्रकाशन के बाद ही चेलगा. 

आयोग के मुताबिक, सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर की अध्यक्षता वाली एक कमेटी, जिसमें IIT/IIIT का एक स्वतंत्र एक्सपर्ट भी शामिल होगा, ECINET की समीक्षा करेगी. यह कमेटी दोबारा जांच करेगी कि क्या यह सिस्टम कानूनों और नियमों के प्रावधानों का पालन करता है और फिर कमीशन को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.

यह भी पढ़ें: दिल्ली-महाराष्ट्र में बढ़ी डेडलाइन, बिहार-बंगाल के लोग जुड़वा सकेंगे नाम... SIR मीटिंग में EC के बड़े फैसले

पिछले कुछ महीनों में राज्य के CEOs से मिले इनपुट के आधार पर पोर्टल में कई अपग्रेड किए गए हैं. जरूरत पड़ने पर फील्ड अधिकारियों को और सुविधाएं दी जाएंगी. अब IT मॉड्यूल और पोर्टल से जुड़ी नई योजनाओं पर आयोग की मंजूरी से पहले अधिकारियों की कमेटी (COO) में चर्चा होगी.  

उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि 27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने SIR की प्रक्रिया को सही माना था. रविशंकर प्रसाद ने TMC और CP(I)M पर निशाना साधते हुए कहा कि ममता बनर्जी, कांग्रेस और अन्य पार्टियां SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक गई थी लेकिन कुछ नहीं हुआ.  उन्होंने राहुल गांधी के आरोपों पर सवाल उठाते हुए उनपर झूठ बोलने का आरोप लगाया. 

दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की आखिरी तारीख 30 अक्टूबर, 2026 तक कर दी गई है. वहीं, इसके निपटारी की समय-सीमा 30 नवंबर, 2026 तक कर दी गई है. साथ ही महाराष्ट्र में भी दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा 12 अक्टूबर, 2026 तक बढ़ा दी है. वहीं, निपटारे की समय सीमा 10 नवंबर तक कर दी गई है. 

चुनाव आयोग द्वारा प्रेस रिलीज जारी किए जाने के बाद बीजेपी कांग्रेस पर हमलावर है. बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि उन्होंने एक अखबार की रिपोर्ट के आधार पर बेबुनियाद आरोप लगाए. उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि चुनाव आयोग की बैठक में CEC और दोनों चुनाव आयुक्त मौजूद थे.

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि चुनाव आयोग की प्रेस रिलीज में साफ बताया गया है कि SIR की प्रक्रिया 24 जून 2025 को शुरू हुई थी. इसकी शुरुआत बिहार से हुई और बाद में पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों में भी हुई. 

Original Source
https://www.aajtak.in/india/news/story/election-commission-sir-process-unanimous-decision-bjp-accuses-rahul-gandhi-ntc-acwi-dskc-2654078-2026-09-26?utm_source=rss
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