'चंद्रशेखरन का री-अपॉइंटमेंट पूरी तरह वैध', नोएल टाटा के सवालों पर TATA Sons ने दिया जवाब
टाटा ग्रुप के अंदर टाटा संस के चेयरमैन पद को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कानूनी लड़ाई की तरफ बढ़ता दिख रहा है. एक तरफ टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी तरफ टाटा संस ने साफ कर दिया है कि चंद्रशेखरन को अगले कार्यकाल के लिए फिर से चेयरमैन बनाना पूरी तरह वैध है. कंपनी का कहना है कि यह फैसला उसके नियमों और लागू कानून के मुताबिक लिया गया है.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, नोएल टाटा की आपत्तियों पर टाटा संस ने 24 सितंबर को अपना पहला औपचारिक जवाब दिया है. कंपनी ने पत्र में कहा कि चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्हें अगले पांच साल के लिए फिर से चेयरमैन नियुक्त करने का फैसला सही तरीके से लिया गया है. कंपनी का कहना है कि बोर्ड ने यह फैसला टाटा संस के नियमों और लागू कानून के दायरे में रहकर लिया. टाटा संस ने अपने जवाब में तीन कानूनी राय का भी हवाला दिया है. इनमें वकीलों के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जजों की राय भी शामिल है.
विवाद इस बात पर है कि चंद्रशेखरन को दोबारा चेयरमैन बनाने के लिए टाटा ट्रस्ट्स की मंजूरी किस तरह जरूरी थी और क्या उस प्रक्रिया का पालन हुआ? टाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति तब तक वैध नहीं मानी जानी चाहिए थी, जब तक ट्रस्ट्स की तरफ से बोर्ड में भेजे गए उसके निदेशकों के बहुमत का समर्थन नहीं मिलता. यहीं से मामला पेचीदा हो जाता है. टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है. यानी कंपनी में उसकी बड़ी हिस्सेदारी है. टाटा ट्रस्ट्स के प्रमुख नोएल टाटा हैं. ट्रस्ट्स यह भी देख रहा है कि चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के दौरान टाटा संस के नियमों में मौजूद विशेष वोटिंग प्रावधानों का पालन किया गया था या नहीं.
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इस पूरे विवाद में एक और दिलचस्प बात सामने आई है. टाटा ट्रस्ट्स के बोर्ड प्रतिनिधियों के बीच भी चंद्रशेखरन को लेकर एक जैसी राय नहीं है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन को चेयरमैन पद पर बनाए रखने का विरोध किया था. वहीं टाटा ट्रस्ट्स के दूसरे नॉमिनी डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन ने उनकी दोबारा नियुक्ति का समर्थन किया. इससे स्थिति कुछ असामान्य हो गई है. एक तरफ टाटा ट्रस्ट्स, जिसके पास टाटा संस की करीब दो-तिहाई हिस्सेदारी है, बोर्ड के फैसले पर सवाल उठा रहा है. दूसरी तरफ टाटा संस का बोर्ड अपने फैसले को कानूनी तौर पर सही बता रहा है. श्रीनिवासन टीवीएस मोटर के चेयरमैन एमेरिटस (मानद चेयरमैन) हैं. वह टाटा ट्रस्ट्स में बतौर वाइस-चेयरमैन और टाटा संस में बोर्ड मेंबर के रूप में भी शामिल हैं.
इस मामले में अगला कदम क्या होगा, यह टाटा ट्रस्ट्स की कानूनी टीम के हाथ में है. रॉयटर्स से बात करने वाले एक सूत्र के मुताबिक, ट्रस्ट्स की लीगल टीम टाटा संस की ओर से भेजे गए जवाब की जांच कर रही है. यानी अभी इस विवाद पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है. दोनों पक्ष अपने-अपने कानूनी पक्ष पर कायम हैं. यह विवाद सिर्फ इस सवाल तक सीमित नहीं है कि एन चंद्रशेखरन टाटा संस के चेयरमैन बने रहेंगे या नहीं. इसके पीछे टाटा संस की पूरी गवर्नेंस यानी कंपनी को चलाने के तरीके से जुड़े बड़े सवाल भी हैं.
इसके अलावा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) टाटा संस की नॉन-बैंक फाइनेंशियल कंपनी के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अर्जी पहले ही खारिज कर चुका है. इससे कंपनी के सामने रेगुलेटरी प्रेशर का एक और मुद्दा मौजूद है. टाटा संस की प्रस्तावित पब्लिक लिस्टिंग भी इस विवाद का एक अहम हिस्सा है. कंपनी लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ रही है, जबकि टाटा ट्रस्ट्स इस कदम का विरोध कर रहा है.


