गाजा पीस बोर्ड को मैक्रों ने किया एक्सपोज, UN में खड़े होकर ट्रंप पर कसा तंज
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाजा में शांति स्थापित करने के दावे पर सवाल उठाए हैं. संयुक्त राष्ट्र महासभा में बोलते हुए मैक्रों ने कहा कि जमीनी हालात ट्रंप की बताई गई कूटनीतिक कामयाबी को नहीं दिखाते. उन्होंने खास तौर पर गाजा में मानवीय मदद की पहुंच का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि शांति का दावा करने के बावजूद मानवीय पहुंच एक पल के लिए भी दोबारा नहीं खुली.
राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि अगर दुनिया गाजा की स्थिति को लेकर निष्क्रिय बनी रहती है तो उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में अपने भाषण के दौरान कहा कि कुछ लोग कथित शांति का जश्न मना रहे हैं, लेकिन गाजा में मानवीय मदद की पहुंच बहाल नहीं हुई है. मैक्रों ने पूछा कि क्या दुनिया सिर्फ इस स्थिति को देखती रहेगी.
Quelle est notre crédibilité si nous continuons de rester inactif face à Gaza ? Devons-nous contempler ce spectacle qui nous fait honte à tous ? pic.twitter.com/RMoYlwZ6Cq
मैक्रों के बयान के बाद व्हाइट हाउस ने ट्रंप के गाजा प्लान का बचाव किया. व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अन्ना केली ने कहा कि ट्रंप ने इजरायल और हमास के बीच जंग खत्म कराई, जिंदा बंधकों की रिहाई सुनिश्चित की और मारे गए बंधकों के शव उनके परिवारों तक पहुंचाए. उन्होंने कहा कि ट्रंप अब गाजा में शांति के लिए 20 सूत्रीय योजना को लागू कराने की अगुवाई कर रहे हैं. व्हाइट हाउस ने कहा कि जब दूसरे लोग सिर्फ बात कर रहे थे, तब ट्रंप ने इस जटिल समस्या पर सीधे काम किया.
मैक्रों ने फ्रांस के फिलिस्तीन को मान्यता देने के फैसले का भी बचाव किया. उन्होंने वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों के खिलाफ हो रही हिंसा का मुद्दा उठाया. मैक्रों ने कहा कि वहां हर दिन उल्लंघन हो रहे हैं. उन्होंने सवाल किया कि ये सब किसके नाम पर हो रहा है, जबकि हमास ने वेस्ट बैंक में कभी ऑपरेशन नहीं किया.
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मैक्रों ने कहा कि वेस्ट बैंक के हालात फिलिस्तीनी अधिकारों पर आधारित भविष्य की राजनीतिक व्यवस्था की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा रहे हैं. उन्होंने पड़ोसी देशों की संप्रभुता को कमजोर करने को इजरायल की सुरक्षा के लिए भी नुकसानदायक बताया.
मैक्रों ने अपने अंतिम UNGA संबोधन में बहुपक्षवाद का बचाव किया. उन्होंने कहा कि दुनिया के सामने ताकत और दबाव से चलने वाली व्यवस्था या एक सभ्य अंतरराष्ट्रीय समाज के बीच चुनाव है. उन्होंने देशों से संयुक्त राष्ट्र के साथ खड़े रहने की अपील की और कहा कि दुनिया ऐसी व्यवस्था को स्वीकार नहीं कर सकती, जिसमें किसी को भी मनमानी की छूट मिले. मैक्रों ने अपने भाषण का अंत संयुक्त राष्ट्र के समर्थन में करते हुए कहा, "लॉन्ग लिव द यूनाइटेड नेशंस."


