'आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस, देते रहेंगे मुंहतोड़ जवाब', UNGA में जयशंकर ने पाकिस्तान को लताड़ा
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए इस बात पर जोर दिया कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना दुनिया में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से हुई थी.
जयशंकर ने कहा कि इसके बावजूद आज भी संघर्ष और टकराव दुनिया की सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है. उन्होंने शांति की अपील करते हुए कहा कि शांति बनाए रखने में नाकामी से न सिर्फ सुरक्षा कमजोर होती है, बल्कि विकास और प्रगति की रफ्तार पर भी असर पड़ता है. उन्होंने कहा कि आज की वैश्वीकृत दुनिया में किसी एक हिस्से में होने वाले जंग का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है.
जयशंकर ने साफ कहा कि कमर्शियल शिपिंग और समुद्री कर्मचारियों को निशाना बनाना बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जाएगा, खासकर अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरते समय. उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की.
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यूक्रेन में जारी संघर्ष का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि यह जंग अब पांचवे साल में पहुंच गई है और यह बहुत ही गंभीर चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के शब्दों में अब अंतहीन युद्ध की समाप्ति होनी चाहिए.
UNGA में जयशंकर ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति को दोहराया है. उन्होंने साफ कहा है कि आतंकवाद के खिलाफ कोई ढील नहीं होनी चाहिए. जयशंकर ने बिना नाम लिए पाकिस्तान पर भी निशाना साधा. उन्होंने साफ कहा कि बीते दिन आतंकवाद को लगातार बढ़ावा देने वाले एक देश ने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया.
उन्होंने साफ कहा कि दोस्ती और सद्भावना आतंकवाद के साथ नहीं चल सकते. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद फैलाने वालों को अपना रवैया बदलना होगा.
जयशंकर ने बताया कि भारत फिलिस्तीनी लोगों के लिए मानवीय सहायता और राहत कार्यों में मदद कर रहा है. उन्होंने साफ कहा कि शांति का मतलब सिर्फ जंग का खत्म होना नहीं है. अगर दुनिया लगातार खतरों और दबावों में घिरी रहेगी, तो यह एक बड़ी खाई के किनारे खड़े होने जैसा है, जिसमें कभी भी गिर सकते हैं. उन्होंने कहा कि शांति के लिए स्थिरता सुरक्षा और भरोसे का माहौल बनाना बहुत जरूरी है. उनका कहना है कि इनमें से किसी भी चीज को कमजोर करने से शांति भी कमजोर होगी.
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के दशकों बाद भी दुनिया में हर चीज को हथियार की तरह इस्तेमाल करने की आदत बढ़ रही है. प्रतिस्पर्धा की सोच हावी हो गई है और संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि वित्त और बाजार तक पहुंच सीमित करने, सप्लाई चेन में रुकावट डालने और तकनीक को रोकने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं.
भारतीय विदेश मंत्री ने ग्लोबल साउथ की स्थिति का जिक्र करेत हुए कहा कि यह और भी गंभीर है. उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ को '4F' संकट का सामना करना पड़ रहा है. 4F यानी- भोजन, ईंधन, उर्वरक और वित्त की सुरक्षा का संकट.
उन्होंने पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर साफ कहा कि भारत का दृढ़ विश्वास है कि स्थायी शांति के लिए 'टू-स्टेट सॉल्यूशन' (दो-राष्ट्र समाधान) की जरूरत है.