UPI पेमेंट पर फीस का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, फैसला वापस लेने की मांग

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UPI के जरिए दो हजार रुपये से अधिक के पेमेंट पर चार्ज लगाए जाने के वित्त मंत्रालय के 14 सितंबर नोटिफिकेशन को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. अंजन दत्ता की ओर से दाखिल की गई इस याचिका में कहा गया है कि 14 सितंबर को चार्ज के लिए जारी किया गया नोटिफिकेशन और 1...

UPI के जरिए दो हजार रुपये से अधिक के पेमेंट पर चार्ज लगाए जाने के वित्त मंत्रालय के 14 सितंबर नोटिफिकेशन को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. अंजन दत्ता की ओर से दाखिल की गई इस याचिका में कहा गया है कि 14 सितंबर को चार्ज के लिए जारी किया गया नोटिफिकेशन और 15 सितंबर को MDR फ्रेमवर्क के लिए जारी किए गए दोनों नोटिफिकेशन को रद्द किया जाए, क्योंकि ये दोनों ही असंवैधानिक संशोधन पर आधारित हैं.

दरअसल वित्त मंत्रालय की ओर से भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10A के तहत अधिसूचना जारी की गई है. इस याचिका में सरकार की 14 सितंबर की अधिसूचना और 15 सितंबर को घोषित किए गए MDR फ्रेमवर्क को पूरी तरह रद्द करने की मांग की गई है. केंद्र सरकार और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने 15 सितंबर 2026 को एक नया फ्रेमवर्क पेश किया था. 

इसके तहत 15 अक्टूबर 2026 से व्यापारियों पर 2,000 रुपये से अधिक के UPI पेमेंट के लिए 0.4% शुल्क (MDR) लागू करने का फैसला लिया गया था. याचिकाकर्ता ने सरकार के इस कदम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.

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सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल कर केंद्र सरकार के 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ UPI मर्चेंट पेमेंट पर MDR चार्ज लगाने के फैसले को चुनौती दी गई है. याचिका में कहा गया है कि सरकार ने यह चार्ज लगाने से पहले न तो पर्याप्त कानूनी प्रक्रिया अपनाई, न पूरी पारदर्शिता बरती और न ही आम लोगों से राय ली.

उधर सरकार ने साफ किया है कि यह शुल्क केवल मर्चेंट्स के लिए है. आम उपभोक्ताओं के लिए पर्सन-टू-पर्सन (P2P) ट्रांजेक्शन और 2,000 रुपये तक के मर्चेंट पेमेंट पूरी तरह से मुफ्त बने रहेंगे. सरकार ने 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007' की धारा 10A के तहत नियमों में संशोधन करके 2,000 रुपये से अधिक के डिजिटल भुगतानों पर यह चार्ज लगाने का कानूनी रास्ता साफ किया था, जिसे अब कोर्ट में चुनौती दी गई है.

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केंद्र सरकार ने यूपीआई पेमेंट पर MDR चार्ज लागू कर दिया है. यह चार्ज चुनिंदा व्‍यापारियों पर लागू किया गया है. आम आदमी या ग्राहक और छोटे व्‍यापारियों पर यह चार्ज नहीं लगेगा. सर्कुलर के अनुसार, जिन कारोबारियों की मंथली यूपीआई से पेमेंट 1 लाख रुपये से ज्‍यादा का है, उनपर ये चार्ज लागू किया जाएगा. यूपीआई चार्ज का ये नया नियम 15 अक्‍टूबर से प्रभावी माना जाएगा.

सर्कुलर में कहा गया है कि अगर आप एक बड़े कारोबारी हैं तो आपको अधिकतम 300 रुपये का मर्चेंट डिस्‍काउंट रेट (MDR) देना होगा. इससे ज्‍यादा का एमडीआर नहीं वसूला जाएगा. सरकार ने 2000 रुपये तक का पेमेंट हासिल करने पर किसी भी तरह का कोई भी MDR चार्ज नहीं लागू किया है. अगर आप इससे ज्‍यादा का पेमेंट प्राप्‍त करते हैं तो आपको एमडीआर देना पड़ेगा, जो आपके पेमेंट का 0.4 फीसदी होगा.

Original Source
https://www.aajtak.in/india/news/story/upi-payment-charge-supreme-court-challenge-ministry-finance-notification-ntcpvp-dskc-2644078-2026-09-16?utm_source=rss
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