UPTET 2026: इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, मूल्यांकन से हटेंगे दो सवाल, दोबारा जारी होगा स्कोरकार्ड
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) 2026 के नतीजों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम आदेश दिया है. कोर्ट ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) को परीक्षा के मूल्यांकन से दो सवाल हटाने का निर्देश दिया है. इन दोनों सवालों के लिए आयोग की अंतिम उत्तर कुंजी में दो-दो विकल्प सही माने गए थे. कोर्ट ने कहा है कि इन सवालों को मूल्यांकन से हटाकर अभ्यर्थियों के अंक दोबारा तय किए जाएं.
जस्टिस विनोद दिवाकर ने यह आदेश विजय सोनकर और तीन अन्य अभ्यर्थियों की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया. याचिकाकर्ताओं ने परीक्षा के मूल्यांकन और अंतिम उत्तर कुंजी से जुड़े मुद्दे कोर्ट के सामने रखे थे.
कोर्ट ने आयोग को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ताओं के अंकों की दोबारा गणना करें. इसके साथ ही उनके परिणाम और स्कोरकार्ड में जरूरी सुधार भी किए जाएं.
हाईकोर्ट ने अपने इस फैसले में यह भी साफ कर दिया है कि जारी किए गए आदेश का फायदा केवल याचिकाकर्ताओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए. आयोग को उन सभी अभ्यर्थियों को इसका फायदा देना होगा, जो समान स्थिति में हैं. यानी लाभ केवल उन उम्मीदवारों को नहीं मिलेगा जिन्होंने विवादित सवालों के लिए अंतिम उत्तर कुंजी में स्वीकार किए गए विकल्पों में से कोई एक चुना था.
इस आदेश के बाद आयोग को UPTET 2026 के मूल्यांकन में दोनों सवालों को हटाकर संबंधित अभ्यर्थियों के अंक और स्कोरकार्ड संशोधित करने होंगे.
बता दें कि UPTET 2026 की अंतिम उत्तर कुंजी में दो सवालों को लेकर विवाद हुआ था. आयोग ने इन दोनों सवालों के लिए एक-एक नहीं, बल्कि दो-दो विकल्पों को सही माना था. इसके बावजूद मूल्यांकन में केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को अंक दिए गए, जिन्होंने इन दोनों सवालों के लिए आयोग की ओर से स्वीकार किए गए विकल्पों में से कोई एक चुना था.
इस व्यवस्था को विजय सोनकर समेत तीन अन्य अभ्यर्थियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी. उनका मामला था कि जब आयोग ने खुद दोनों सवालों में दो-दो विकल्प सही माने हैं, तो इन सवालों के आधार पर अभ्यर्थियों के बीच अंक का अंतर नहीं किया जाना चाहिए. याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि इन दोनों सवालों को मूल्यांकन से हटाकर परिणाम दोबारा तैयार किया जाए.
मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस विनोद दिवाकर की पीठ ने दोनों सवालों को मूल्यांकन से हटाने का निर्देश दिया. कोर्ट ने आयोग से याचिकाकर्ताओं के अंक और स्कोरकार्ड संशोधित करने को कहा. साथ ही स्पष्ट किया कि इस फैसले का लाभ केवल याचिकाकर्ताओं को नहीं, बल्कि सभी समान स्थिति वाले अभ्यर्थियों को दिया जाए.


