'अच्छा VFX नहीं आस्था जरूरी', रामायण पर बोले मुकेश खन्ना, रणबीर कपूर पर साधा निशाना
रणबीर कपूर की फिल्म रामायण हर समय चर्चा का विषय बनी रहती है. इंडस्ट्री से कोई ना कोई शख्स इस फिल्म पर बोलता नजर आता है. एक्टर की एक्टिंग को लेकर तो किसी ने आजतक आपत्ति नहीं जताई. मगर रामायण में उनकी कास्टिंग पर बहस छिड़ी रहती है. अब 'शक्तिमान' यानी मुकेश खन्ना ने रामायण फिल्म और रणबीर कपूर की कास्टिंग पर बात की है.
मुकेश खन्ना ने कहा है कि आम फिल्मों में किसी एक्टर के किसी भी तरह का किरदार निभाने पर लोग ज्यादा सवाल नहीं उठाते. लेकिन जब बात रामायण और महाभारत जैसे विषयों की आती है, तो मामला अलग हो जाता है. उनके मुताबिक, जनता ये देखना चाहते हैं कि भगवान राम को किस तरह पर्दे पर पेश किया जा रहा है.
बॉलीवुड नाऊ संग बातचीत में मुकेश खन्ना ने नमित मल्होत्रा की रामायण में रणबीर की कास्टिंग पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा- रामायण के बारे में मैं शुरू से आजतक मुझे लगता है कि ये एक-दो साल से बन रही है. कहानी आज की नहीं है, बहुत पुरानी है. जिस दिन पहली बार रामायण की बात निकली. पहली बार ये बात निकली कि ये एक्टर करने वाला है. वहां भी लोग खड़े हो गए थे कि ये तो बीफ खाता है. किसी ने कहा सर ये तो वो एनिमल जैसी फिल्म करता है.
'अब आमतौर पर कोई आदमी जब एक्टर बनता है कोई कुछ नहीं बोलता. आप दीवार बना दो, त्रिशूल बना दो या आप गुमराह कर दो कि उसमें कौन सा एक्टर क्या काम कर रहा है. कोई फर्क नहीं पड़ता. लेकिन अगर आप हमारे आस्था को टच करोगे, खासतौर पर जो हमारी रामायण-महाभारत है. तो वहां हम देखेंगे कि आपने इसको क्यों राम बनाया और जगह नहीं पूछोगे. लेकिन यहां राम नहीं बनाया.'
मुकेश खन्ना आगे रामायण में दिखाए गए एक्शन सीक्वेंस पर भी अपनी बात रखते हैं. उन्होंने कहा- अभी फिल्म रिलीज नहीं हुई है और मैंने भी इसे पूरा नहीं देखा है, लेकिन अब तक जो विजुअल्स सामने आए हैं, उनमें भगवान राम को एक्शन हीरो की तरह दिखाया गया है. मैंने बचपन से कई रामायण देखी हैं, रामलीलाएं देखी हैं और रामायण पढ़ी भी है. लेकिन भगवान राम को पेड़ पर चढ़कर इस तरह तीर चलाते हुए उन्होंने कभी नहीं देखा.
मुकेश खन्ना का कहना है कि भगवान राम सिर्फ धनुर्धर नहीं थे, बल्कि वो 'मर्यादा पुरुषोत्तम राम' थे. उनकी छवि संयम, मर्यादा और शालीनता से जुड़ी हुई है. लेकिन फिल्म में राम को जरूरत से ज्यादा एक्शन करते हुए दिखाया जाता है. अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए एक्टर ने कहा कि अगर राम को उनकी मर्यादा पुरुषोत्तम वाली छवि से हटाकर सिर्फ एक्शन हीरो की तरह पेश किया जाएगा, तो ये उन्हें सही नहीं लगेगा. उन्होंने यहां तक कहा कि ऐसा करते हुए कहीं राम को सलमान खान, अमिताभ बच्चन या रजनीकांत जैसा बनाने की कोशिश तो नहीं की जा रही.
उन्होंने अपनी बात समझाते हुए कहा कि अगर राम को इतना बड़ा 'मैन ऑफ एक्शन' बना दिया जाए कि वो अकेले ही सब कुछ कर सकते थे, तो फिर उन्हें हनुमान और पूरी वानर सेना की मदद लेने की जरूरत क्यों पड़ती? उनके मुताबिक, राम का किरदार एक 'वन मैन आर्मी' जैसा नहीं था.
मुकेश खन्ना आगे फिल्म के स्पेशल इफेक्ट्स को लेकर भी अपनी बात रखी. चूंकि फिल्म के वीएफएक्स में करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, इसलिए उनका कहना है कि स्पेशल इफेक्ट्स से ज्यादा आस्था पर भरोसा रखना सही होगा. एक्टर ने कहा- आज के समय में शानदार VFX और एक्शन दिखाना आम बात हो गई है. विदेशों में ऑडियंस फिल्म के शानदार विजुअल्स और फाइट सीक्वेंस की तारीफ कर सकते हैं. लेकिन भारत में रामायण को सिर्फ उसके VFX के आधार पर नहीं देखा जाएगा, बल्कि आस्था के आधार पर देखेंगे.
'इंडियन ऑडियंस के लिए फिल्म में राम, सीता, लक्ष्मण, भरत और हनुमान जैसे किरदारों की मर्यादा और उनका सही चित्रण ज्यादा महत्वपूर्ण है. जब टीवी पर रामायण आती थी, तब लोग उसे महज एक सीरियल की तरह नहीं देखते थे. पूरा गांव साथ बैठकर रामायण देखता था और कई जगह लोग पहले आरती करते थे, फिर रामायण देखते थे. रामायण से लोगों की ऐसी गहरी आस्था जुड़ी है कि इसे पर्दे पर उतारते समय सिर्फ भव्यता और स्पेशल इफेक्ट्स नहीं, बल्कि उस आस्था और मर्यादा का भी ध्यान रखना जरूरी है.'


